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Masik Krishna Janmashtami: आषाढ़ मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें जरूरी सावधानियां

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Aashadh Masik Krishna Janmashtami: मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत धार्मिक परंपरा के अनुसार निर्धारित समय पर ही पूर्ण करना चाहिए। पूजा, आरती और भगवान को भोग अर्पित करने के बाद ही व्रत का पारण करें। 

Aashadh Masik Krishna Janmashtami
Aashadh Masik Krishna Janmashtami: सनातन धर्म में भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित जन्माष्टमी का विशेष महत्व माना गया है। जहां भाद्रपद कृष्ण पक्ष की जन्माष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में बड़े उत्साह से मनाया जाता है, वहीं प्रत्येक माह आने वाली मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का भी धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व बताया गया है। आषाढ़ मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण का व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करते हैं और उनके बाल स्वरूप की आराधना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ और व्रत में कुछ छोटी-छोटी गलतियां भी व्रत के फल को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए इस दिन कुछ विशेष सावधानियों का ध्यान रखना आवश्यक माना गया है।

व्रत का संकल्प लेकर बीच में न तोड़ें

यदि आपने आषाढ़ मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखने का संकल्प लिया है तो बिना किसी उचित कारण के उसे बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार व्रत का पालन श्रद्धा, संयम और नियमपूर्वक करना चाहिए। यदि स्वास्थ्य संबंधी कोई गंभीर समस्या हो तो धार्मिक मर्यादा के अनुसार फलाहार या आवश्यक व्यवस्था अपनाई जा सकती है।

पूजा से पहले घर और पूजा स्थल की शुद्धि अवश्य करें

जन्माष्टमी की पूजा करने से पहले घर और विशेष रूप से पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। पूजा स्थल पर स्वच्छ वस्त्र बिछाकर भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या बाल गोपाल को स्थापित करें। बिना शुद्धि और स्वच्छता के पूजा करना उचित नहीं माना जाता।

भगवान श्रीकृष्ण को बासी या अशुद्ध भोग न लगाएं

आषाढ़ मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को केवल ताजा, सात्विक और शुद्ध भोजन का ही भोग अर्पित करना चाहिए। बासी भोजन, दूषित सामग्री या तामसिक पदार्थ भगवान को अर्पित नहीं किए जाते। माखन, मिश्री, पंचामृत, फल, मेवा, खीर और घर में बने सात्विक व्यंजन भोग के रूप में अर्पित किए जा सकते हैं।

तुलसी दल के बिना भोग अर्पित न करें

वैष्णव परंपरा में भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी दल का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी दल के बिना भोग पूर्ण नहीं माना जाता। इसलिए भोग अर्पित करते समय स्वच्छ तुलसी दल अवश्य अर्पित करें। यदि किसी कारणवश उसी दिन तुलसी न तोड़नी हो तो पहले से तोड़ी गई शुद्ध तुलसी का उपयोग किया जा सकता है।

पूजा के समय जल्दबाजी न करें

कई लोग समय की कमी के कारण पूजा को जल्दबाजी में पूरा कर लेते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जन्माष्टमी की पूजा शांत मन, श्रद्धा और पूरे विधि-विधान से करनी चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान, मंत्र जाप, आरती और भोग अर्पण क्रमबद्ध तरीके से करना शुभ माना गया है।

पूजा में तामसिक वस्तुओं का प्रयोग न करें

आषाढ़ मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन पूजा में मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज या अन्य तामसिक पदार्थों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इस दिन घर में भी सात्विक वातावरण बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए और सात्विक भोजन ही ग्रहण करना उचित माना गया है।

व्रत के दौरान क्रोध और कटु वचन से बचें

धार्मिक ग्रंथों में व्रत के समय केवल भोजन का ही नहीं बल्कि मन और वाणी का भी संयम आवश्यक बताया गया है। इस दिन क्रोध करना, विवाद करना, अपशब्द बोलना या किसी का अपमान करना व्रत की मर्यादा के विपरीत माना जाता है। यथासंभव शांत और सकारात्मक व्यवहार रखना चाहिए।

भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा के सामने दीपक बुझने न दें

पूजा के दौरान जलाया गया दीपक शुभता और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है। यदि संभव हो तो पूजा पूरी होने तक दीपक को जलता रहने दें। यदि किसी कारणवश दीपक बुझ जाए तो उसे पुनः श्रद्धापूर्वक प्रज्वलित किया जा सकता है।

व्रत में नियमों का पालन करें

यदि आप निर्जला व्रत नहीं रख सकते तो फलाहार कर सकते हैं, लेकिन व्रत के दौरान अनाज, तामसिक भोजन या वर्जित खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। व्रत के नियम अपनी क्षमता और धार्मिक परंपरा के अनुसार अपनाएं, लेकिन उनका पालन पूरी श्रद्धा से करें।

पूजा सामग्री अधूरी न रखें

पूजा आरंभ करने से पहले आवश्यक सामग्री एकत्र कर लेना उचित माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या बाल गोपाल, स्वच्छ वस्त्र, पंचामृत, माखन, मिश्री, तुलसी दल, फूल, धूप, दीप, चंदन, नैवेद्य, फल और आरती की सामग्री पहले से तैयार रखें ताकि पूजा के दौरान बार-बार उठना न पड़े।

श्रीकृष्ण के श्रृंगार में लापरवाही न करें

यदि घर में बाल गोपाल की प्रतिमा स्थापित है तो जन्माष्टमी के दिन उनका विधिवत स्नान कराकर स्वच्छ वस्त्र पहनाएं। चंदन का तिलक लगाएं, पुष्पमाला अर्पित करें और यथाशक्ति सुंदर श्रृंगार करें। गंदे या पुराने वस्त्रों में पूजा करना उचित नहीं माना जाता।

व्रत पारण में जल्दबाजी न करें

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत धार्मिक परंपरा के अनुसार निर्धारित समय पर ही पूर्ण करना चाहिए। पूजा, आरती और भगवान को भोग अर्पित करने के बाद ही व्रत का पारण करें। बिना पूजा पूरी किए व्रत समाप्त करना उचित नहीं माना जाता।

इन बातों का भी रखें विशेष ध्यान

  • पूजा के समय स्वच्छ और शुद्ध वस्त्र पहनें।
  • भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित भोग पहले स्वयं ग्रहण न करें।
  • पूजा के दौरान मोबाइल या अन्य अनावश्यक कार्यों में ध्यान न लगाएं।
  • पूजा समाप्त होने के बाद भगवान की आरती अवश्य करें।
  • प्रसाद को परिवार और श्रद्धालुओं में श्रद्धापूर्वक वितरित करें।
  • यदि संभव हो तो श्रीकृष्ण के नामों का जाप और गोपाल मंत्र का स्मरण करें।
  • पूजा के समय मन को शांत और एकाग्र रखने का प्रयास करें।

 
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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