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Vat Savitri Vrat 2025: वट सावित्री के दिन पत्नियां क्यों डोलाती है पति को पंखा, जानिए इससे जुड़ी कहानी

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Vat Savitri Vrat 2025: वट सावित्री का त्यौहार सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास त्यौहार माना जाता है। यह त्यौहार सावित्री और सत्यवान से जुड़ा हुआ है। हर साल यह त्यौहार ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाया जाता है।

Vat Savitri Vrat 2025
Vat Savitri Vrat 2025: वट सावित्री का त्यौहार सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास त्यौहार माना जाता है। यह त्यौहार सावित्री और सत्यवान से जुड़ा हुआ है। हर साल यह त्यौहार ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 26 मई 2025 का दिन है और वट सावत्री का व्रत रखा जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं वट सावित्री के दिन महिलाएं पूजा करने के बाद पति को पंखा झलती है। इसके पीछे का कारण क्या है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

कैसे मनाई जाती है वट सावित्री का व्रत

वट सावित्री पर सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। सुहागिन महिलाओं में यह त्यौहार बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पूजा के लिए महिलाएं दुल्हन की तरह सजती हैं और बांस की टोकरी में गुड़, भीगे हुए चने, मीठे पकोड़े, कुमकुम, रोली, अक्षत, मौली, फल, पान, सुपारी, धूपबत्ती लेती है। इसके साथ ही महिलाएं हाथ में जल का लोटा लेकर वट वृक्ष के पास जा विधि-विधान से पूजा करती

महिलाएं बरगद के पेड़ के नीचे एकत्र होकर पूजा करती हैं, पेड़ पर कच्चा धागा बांधती हैं, सत्यवान सावित्री की कथा सुनती हैं और आरती करती हैं। वट सावित्री पर बांस से बना पंखा चढ़ाने की परंपरा है, जिसका इस व्रत में विशेष धार्मिक और पारंपरिक महत्व है।

वट सावित्री पूजा में बांस के पंखे का महत्व

पूजा के दौरान महिलाएं बांस से बने हाथ के पंखे से बरगद के पेड़ को हवा भी करती हैं। इसके बाद वे अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य का वरदान मांगती हैं। पूजा समाप्त होने के बाद वे घर पहुंचकर अपने पति के पैर धोकर उनका आशीर्वाद लेती हैं और इसी पंखे से उन्हें हवा भी करती हैं। बांस के पंखे से पति को हवा करने के पीछे का कारण यह है कि, इससे उनके पति के सभी संकट दूर होते हैं। इसके अलावा वट सावित्री के दिन बांस का पंखा दान करना शुभ माना जाता है, इससे जीवन में शीतलता बनी रहती है।

वट सावित्री से जुड़ी कहानी

बांस के पंखे का महत्व सावित्री और सत्यवान की कथा से भी जुड़ा है, जिसके अनुसार जब सत्यवान लकड़ी काटने के लिए जंगल में गए तो अचानक बेहोश हो गए। तब सावित्री ने उन्हें बरगद के पेड़ के नीचे लिटा दिया। उस समय ज्येष्ठ माह की भीषण गर्मी थी। सत्यवान को शीतलता प्रदान करने के लिए सावित्री ने उसका सिर अपनी गोद में रखा और हाथ से बने बांस के पंखे से उसे हवा की। इसलिए आज भी इस परंपरा का पालन करते हुए और इस कथा की याद में विवाहित महिलाएं पूजा में बांस के पंखे चढ़ाती हैं और उसका सम्मान भी करती हैं।

परंपरा से जुड़ा है बांस का पंखा

आज भी वट सावित्री व्रत में बांस के पंखे का उपयोग किया जाता है और इसे पूजा में बहुत महत्वपूर्ण सामग्री माना जाता है, जिसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। आज के आधुनिक युग में जब कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मौजूद हैं। लेकिन इसके बाद भी त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों में इन नियमों का पालन श्रद्धा के साथ किया जाता है जो हमें परंपरा से जोड़ते हैं।

धार्मिक दृष्टि से बांस को सृजन का प्रतीक माना जाता है। बांस का पंखा जीवन चक्र का भी प्रतीक है जो विनम्रता, सरलता और शीतलता से जुड़ा है। वट सावित्री पर बांस के पंखे का उपयोग हमें सावित्री के त्याग और पति के प्रति समर्पण की याद दिलाता है।

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