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Jaipur Famous Temples: इस मंदिर में बच्चों की हकलाने की समस्याएं होती हैं दूर, प्रसाद में चढ़ाया जाता है पालना

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Jaipur Famous Temples: कभी आपने कभी बच्चों की देवी के बारे में सुना है, अगर नहीं, तो आज इस खबर में हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने वाले हैं, जिसे बच्चों की देवी के नाम से जाना जाता है।

Jaipur Famous Temples:
Jaipur Famous Temples: कभी आपने कभी बच्चों की देवी के बारे में सुना है, अगर नहीं, तो आज इस खबर में हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने वाले हैं, जिसे बच्चों की देवी के नाम से जाना जाता है। बता दें कि यह मंदिर जयपुर जिले से 40 किलोमीटर दूर स्थित "बच्चो वाली देवी" के मंदिर के बारे में बताएंगे। इस मंदिर में बड़ों की नहीं बल्कि बच्चों की मनोकामना पूरी होती है। यहां बच्चों का भी इलाज किया जाता है।

इस मंदिर में दूर-दराज के इलाकों से माता-पिता अपने बच्चों को लेकर आते हैं। यह चमत्कारी मंदिर जयपुर जिले के सामोद गांव में स्थित है। आपको बता दें कि सामोद गांव में वीर हनुमान बालाजी मंदिर का मंदिर है, जो राजस्थान के प्रमुख मंदिरों में से एक है।

"बच्चो वाली देवी" के नाम जाना जाता है यह मंदिर

यह मंदिर मां महामाया को समर्पित है, जिन्हें "बच्चो वाली देवी" के नाम से भी जाना जाता है। यहां आने वाले भक्तों का अटूट विश्वास है कि महामाया माता बच्चों की रक्षा करती हैं और उन्हें स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन प्रदान करती हैं। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां पूजा करने से निसंतान दंपत्तियों की सूनी गोद भर जाती है। इसके अलावा बच्चों को बुरी नजर, बीमारी और भूत-प्रेत बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है लकड़ी का पालना

बता दें कि बच्चों की देवी मंदिर की एक अनोखी मानन्यता यह है कि जब भी किसी श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होती है तो वे प्रसाद के रूप में लकड़ी का पालना अर्पित करते हैं। वहीं, जब किसी वैवाहिक जोड़ी की संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी हो जाती है तो मंदिर में लड़की का पालना अर्पित किया जाता है। इसके साथ ही जब बच्चा भी स्वस्थ होता है तो वे प्रसाद की जगह मंदिर में लकड़ी का पालना चढ़ाते हैं। यह परंपरा कई दशकों से चली आ रही है।

मंदिर में मौजूद है सैकड़ों पालने

बता दें कि मंदिर परिसर में आज भी सैकड़ों पालने देखने को मिल जाते हैं। इसके साथ ही साथ इस मंदिर की खासियत यह भी है कि यहां मुख्य रूप से हकलाने वाले बच्चों का इलाज भी किया जाता है। मान्यता है कि अगर कोई बच्चा साफ बोलने में असमर्थ है और इस मंदिर में आकर लकड़ी का पालना चढ़ाता है तो उसका हकलाना पूरी तरह ठीक हो जाता है।

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