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Yam Deepak: यम दीपदान में आटे का दीपक क्यों बनाया जाता है? जानिए इसका रहस्य

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Yam Deepak: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन यमराज के निमित्त दीपदान करने के लिए आटे का दीपक बनाना शुभ माना जाता है।

Yam Deepak:
Yam Deepak: छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी पर यमराज के नाम से दीपदान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस दिन घर के बाहर यम दीपक जलाया जाता है और परिवार की सुख-समृद्धि के साथ सभी सदस्यों की लंबी आयु की कामना की जाती है। हालांकि, यम दीपदान करते समय एक खास बात का ध्यान रखा जाता है। कई घरों में इस दिन मिट्टी के बजाय आटे का दीपक बनाया जाता है। आखिर यम दीपक के लिए आटे का ही इस्तेमाल क्यों किया जाता है? क्या इसके पीछे कोई धार्मिक मान्यता या विशेष रहस्य छिपा है? आइए जानते हैं इस परंपरा का महत्व...

आटे का दीपक बनाने की परंपरा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन यमराज के निमित्त दीपदान करने के लिए आटे का दीपक बनाना शुभ माना जाता है। इसके लिए गेहूं के आटे में थोड़ा पानी मिलाकर उसे गूंथ लिया जाता है और फिर हाथों से दीपक का आकार दिया जाता है। इसके बाद इसमें तेल या घी डालकर बाती रखी जाती है। मान्यता है कि इस तरह दीपक जलाने से यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं।

क्या है आटे के दीपक का रहस्य?

आटे का संबंध अन्न से माना जाता है और हिंदू धर्म में अन्न को जीवन का आधार बताया गया है। धार्मिक दृष्टि से अन्न को देवी अन्नपूर्णा का प्रसाद भी माना जाता है। ऐसे में आटे से दीपक बनाकर जलाना अन्न के प्रति सम्मान और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस परंपरा के पीछे यह भाव भी जुड़ा है कि व्यक्ति अपने जीवन में अन्न, सुख और समृद्धि के लिए ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करे। यमराज को समर्पित दीपक के रूप में आटे का इस्तेमाल करना इसी धार्मिक भावना से जुड़ा माना जाता है।

यमराज के लिए ही क्यों जलाते हैं दीपक?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यमराज को मृत्यु का देवता और कर्मों का फल देने वाला माना जाता है। नरक चतुर्दशी के दिन उनके नाम से दीपदान करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से यम दीपक जलाने पर अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार के सदस्यों को लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है। इसी वजह से इसे यम दीपदान कहा जाता है।

किस दिशा में रखना चाहिए आटे का दीपक?

परंपरा के अनुसार, नरक चतुर्दशी की शाम को घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर यम दीपक रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है। दीपक में सरसों का तेल डालकर रुई की बाती जलाई जाती है। इसके बाद यमराज से परिवार की सुख-शांति और सभी सदस्यों की अच्छी सेहत की प्रार्थना की जाती है।

क्या करना चाहिए आटे के दीपक का?

आटे का दीपक जलाने के बाद उसे लेकर अलग-अलग परंपराओं में अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। कई परिवारों में दीपदान के बाद इसे वहीं रहने दिया जाता है, जबकि कुछ परंपराओं में इसे किसी सुनसान स्थान पर रखकर घर लौटने की मान्यता है, इसलिए अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक रीति के अनुसार ही इसका पालन करना चाहिए।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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