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Abujh Muhurat: जानें क्या होता है अबूझ मुहूर्त? जानें क्यों बिना पंचांग देखे भी कर सकते हैं शुभ काम

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Abujh Muhurat: हिंदू पंचांग में अबूझ मुहूर्त उस शुभ समय या तिथि को कहा जाता है, जिसमें मांगलिक कार्य करने के लिए अलग से शुभ मुहूर्त निकलवाने की आवश्यकता नहीं मानी जाती। 

Abujh Muhurat
Abujh Muhurat: हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले मुहूर्त देखने की परंपरा है। विवाह हो, गृह प्रवेश हो, नया कारोबार शुरू करना हो या फिर कोई नई वस्तु खरीदनी हो, लोग अक्सर पंचांग देखकर शुभ समय का चुनाव करते हैं। हालांकि, कुछ तिथियां ऐसी भी मानी गई हैं, जिनमें शुभ कार्य करने के लिए अलग से मुहूर्त निकलवाने की जरूरत नहीं पड़ती। इन्हें अबूझ मुहूर्त कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन विशेष दिनों में बिना पंचांग देखे भी कई मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। आखिर अबूझ मुहूर्त क्या होता है और इसे इतना शुभ क्यों माना जाता है? आइए जानते हैं इससे जुड़ी प्रमुख बातें...

क्या होता है अबूझ मुहूर्त?

हिंदू पंचांग में अबूझ मुहूर्त उस शुभ समय या तिथि को कहा जाता है, जिसमें मांगलिक कार्य करने के लिए अलग से शुभ मुहूर्त निकलवाने की आवश्यकता नहीं मानी जाती। सामान्य दिनों में किसी भी शुभ कार्य के लिए तिथि, वार, नक्षत्र, योग और ग्रहों की स्थिति पर विचार किया जाता है। वहीं, अबूझ मुहूर्त के दिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समय अपने आप में शुभ माना जाता है। इसी वजह से लोग इन दिनों में विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत और खरीदारी जैसे कार्य करना पसंद करते हैं।

क्यों शुभ माना जाता है अबूझ मुहूर्त?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ विशेष तिथियों का संबंध देवी-देवताओं की कृपा, शुभता और मंगलकारी घटनाओं से माना जाता है। इन तिथियों पर किए गए कार्यों को शुभ फल देने वाला माना जाता है। यही कारण है कि कई परिवार इन दिनों को नए काम की शुरुआत के लिए चुनते हैं। हालांकि, अबूझ मुहूर्त का अर्थ यह नहीं है कि हर परिस्थिति में हर कार्य बिना किसी विचार के किया जा सकता है। कार्य की प्रकृति, परिवार की परंपरा और संबंधित धार्मिक मान्यताओं को भी ध्यान में रखा जाता है।

साल में कब आते हैं अबूझ मुहूर्त?

हिंदू परंपरा में अक्षय तृतीया, विजयादशमी और वसंत पंचमी को विशेष रूप से अबूझ मुहूर्त के रूप में जाना जाता है। इसके अलावा, कुछ परंपराओं में देवउठनी एकादशी को भी विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। इन तिथियों का महत्व अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार देखा जाता है।

अक्षय तृतीया को नई शुरुआत, सोना खरीदने, दान-पुण्य और विवाह जैसे कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग नए काम, व्यापार और शिक्षा से जुड़े कार्यों की शुरुआत करते हैं। वहीं, वसंत पंचमी को मां सरस्वती की पूजा के कारण शिक्षा, कला और ज्ञान से जुड़े कार्यों के लिए विशेष महत्व दिया जाता है। देवउठनी एकादशी के अवसर पर भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने की मान्यता के साथ कई स्थानों पर मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है।

अबूझ मुहूर्त में कौन-से काम कर सकते हैं?

अबूझ मुहूर्त के अवसर पर लोग विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करने, वाहन या आभूषण खरीदने और नए काम की शुरुआत करने जैसे कार्य करना शुभ मानते हैं। कुछ लोग इस दिन भूमि या संपत्ति खरीदने और नए घर के निर्माण से जुड़े कार्यों की शुरुआत भी करते हैं। हालांकि, इन सभी कार्यों के लिए एक जैसी मान्यता हर जगह लागू नहीं होती। उदाहरण के लिए, विवाह के मामले में परिवार की परंपरा, स्थानीय रीति-रिवाज और संबंधित धार्मिक नियमों को ध्यान में रखना उचित माना जाता है।

क्या अबूझ मुहूर्त में पंचांग देखना जरूरी नहीं?

अबूझ मुहूर्त की सबसे खास बात यही है कि सामान्य मान्यता के अनुसार, इन दिनों शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त निकलवाने की जरूरत नहीं होती। इसी वजह से कई लोग विवाह की तारीख तय करने या नए काम की शुरुआत के लिए इन तिथियों को प्राथमिकता देते हैं। फिर भी, पंचांग देखने पर पूरी तरह रोक नहीं है। यदि किसी कार्य के लिए विशेष धार्मिक नियम लागू होते हैं या परिवार के पुरोहित से परामर्श लेने की परंपरा है, तो उनसे जानकारी ली जा सकती है। विशेष रूप से विवाह और गृह प्रवेश जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार निर्णय लेना बेहतर रहता है।

क्या हर काम के लिए मान्य है अबूझ मुहूर्त?

अबूझ मुहूर्त को मुख्य रूप से मांगलिक और शुभ कार्यों से जोड़कर देखा जाता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि इस दिन किए जाने वाले प्रत्येक कार्य को बिना किसी तैयारी या विचार के शुरू कर देना चाहिए। विवाह जैसे आयोजनों में सामाजिक और पारिवारिक सहमति, जबकि व्यवसाय या संपत्ति से जुड़े फैसलों में जरूरी दस्तावेज और व्यावहारिक पहलुओं का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है। धार्मिक मान्यता के अनुसार शुभ दिन चुनने के साथ-साथ उचित योजना बनाना भी जरूरी है। इस तरह अबूझ मुहूर्त लोगों को शुभ शुरुआत के लिए एक विशेष अवसर प्रदान करता है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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