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Sarvapitri Amavasya: सर्वपितृ अमावस्या पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें इस दिन क्या करें और क्या न करें

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Sarvapitri Amavasya: सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त तर्पण करना महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके लिए जल में काले तिल, कुश और फूल डालकर पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण किया जाता है।

Sarvapitri Amavasya
Sarvapitri Amavasya: पितृ पक्ष में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन उन सभी पितरों के श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात न हो या जिनका श्राद्ध किसी कारण से न किया जा सका हो। मान्यता है कि इस दिन पितरों का स्मरण कर विधि-विधान से तर्पण और श्राद्ध करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं, कुछ ऐसे काम भी बताए गए हैं जिन्हें इस दिन करने से बचना चाहिए। क्या आपको पता है कि सर्वपितृ अमावस्या पर किन गलतियों को करने से बचना चाहिए और इस दिन क्या करना शुभ माना जाता है? आइए जानते हैं।

सर्वपितृ अमावस्या पर क्या करें?

पितरों का तर्पण करें
सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त तर्पण करना महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके लिए जल में काले तिल, कुश और फूल डालकर पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा के साथ किया गया तर्पण पितरों को समर्पित होता है।

श्राद्ध और पिंडदान करें
जिन पितरों की श्राद्ध तिथि मालूम नहीं होती, उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध करने की परंपरा है। इस दिन पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने से पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण भोजन और दान भी किया जा सकता है।

पंचबलि जरूर करें
श्राद्ध कर्म में पंचबलि का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गाय, कुत्ते, कौए, देवताओं और चींटियों के लिए भोजन निकालना चाहिए। इसे पंचबलि कहा जाता है। सर्वपितृ अमावस्या पर श्रद्धा के साथ पंचबलि करने की परंपरा है।

जरूरतमंदों को दान दें
इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, वस्त्र, अनाज या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान किया जा सकता है। पितरों के निमित्त किया गया दान श्रद्धा और सेवा भाव से करने की परंपरा है।

कौए को भोजन कराएं
श्राद्ध पक्ष में कौए को पितरों का प्रतीक माना जाता है। इसलिए सर्वपितृ अमावस्या के दिन भोजन का एक हिस्सा कौए के लिए निकालने की परंपरा है। इसके साथ ही गाय, कुत्ते और अन्य जीवों के लिए भी भोजन निकालकर पंचबलि की परंपरा निभाई जाती है।

सर्वपितृ अमावस्या पर क्या न करें?

मांसाहार और शराब से बचें
सर्वपितृ अमावस्या के दिन घर में सात्विक वातावरण बनाए रखने की परंपरा है। इसलिए इस दिन मांसाहार और शराब का सेवन करने से बचना चाहिए। श्राद्ध कर्म के दौरान सात्विक भोजन और संयम का पालन करना धार्मिक रूप से उचित माना जाता है।

किसी का अपमान न करें
पितृ पक्ष में व्यक्ति को अपने व्यवहार पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है। सर्वपितृ अमावस्या के दिन किसी व्यक्ति का अपमान करना, झगड़ा करना या किसी को जानबूझकर दुख पहुंचाना उचित नहीं माना जाता। इस दिन शांत मन से पितरों का स्मरण और पूजा करनी चाहिए।

घर में कलह से बचें
सर्वपितृ अमावस्या पर घर में अशांति और कलह का वातावरण न बनने दें। परिवार के सदस्यों को आपसी विवाद से बचकर पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान के साथ दिन बिताने की कोशिश करनी चाहिए।

बाल और नाखून काटने से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान बाल और नाखून काटने से बचने की परंपरा है। विशेष रूप से श्राद्ध और तर्पण के दिन शरीर की सजावट या अनावश्यक रूप से तैयार होने के बजाय सादगी और संयम रखने की सलाह दी जाती है।

बिना श्रद्धा के श्राद्ध न करें
श्राद्ध कर्म में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा मानी जाती है। केवल दिखावे या किसी दबाव में आकर श्राद्ध कर्म करने के बजाय पितरों का मन से स्मरण करना चाहिए। अपनी सामर्थ्य के अनुसार ही तर्पण, भोजन और दान करना उचित माना जाता है।

 सूर्य को अर्घ्य देना भी माना जाता है शुभ
सर्वपितृ अमावस्या के दिन स्नान करने के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करने की भी परंपरा है। इसके बाद पितरों का स्मरण करके तर्पण किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन पितरों के लिए श्रद्धापूर्वक किए गए कर्म का विशेष महत्व होता है।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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