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Shiva Purana: पृथ्वी वासियों की रक्षा के लिए भिक्षुक बने थे शिव जी, मां अन्नपूर्णा से मांगी थी अन्न की भिक्षा

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
साक्षी
सार

Shiva Purana: हिंदू धर्म में भगवान शिव और मां पार्वती की कथाएं अनंत हैं, जो न केवल भक्ति और आध्यात्मिकता का संदेश देती हैं, बल्कि जीवन के गहरे सत्य को भी उजागर करती हैं। 

शिव जी-मां अन्नपूर्णा
Shiva Purana: हिंदू धर्म में भगवान शिव और मां पार्वती की कथाएं अनंत हैं, जो न केवल भक्ति और आध्यात्मिकता का संदेश देती हैं, बल्कि जीवन के गहरे सत्य को भी उजागर करती हैं। ऐसी ही एक कथा है शिव और मां अन्नपूर्णा की, जब स्वयं कैलाशपति भिक्षु बनकर मां अन्नपूर्णा के द्वार पर भिक्षा मांगने पहुंचे। यह कहानी न केवल शिव-पार्वती के अटूट प्रेम को दर्शाती है, बल्कि भौतिक और आध्यात्मिक संसार के बीच संतुलन को भी दिखाती है। आइए, इस पौराणिक कथा के बारे में जानते हैं।

शिव और पार्वती के बीच क्यों छिड़ी बहस

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान शिव और मां पार्वती के बीच एक गहन चर्चा छिड़ गई। विषय था संसार की प्रकृति और उसकी सार्थकता। शिव जी ने कहा कि यह समस्त सृष्टि माया है। भौतिक सुख, धन, वैभव और यहां तक कि भोजन भी मायावी है, जो आत्मा को सत्य के मार्ग से भटकाता है। दूसरी ओर मां पार्वती ने इस विचार का खंडन किया। उन्होंने तर्क दिया कि भौतिक संसार और उसका पोषण भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना आध्यात्मिक साधना। भोजन के बिना जीवन संभव नहीं और भोजन ही वह आधार है, जो प्राणियों को जीवित रखता है।

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जब पृथ्वी पर हुई अन्न जल की कमी

शिव द्वारा सृष्टि को माया कहने पर मां पार्वती को यह बात खटक गई। उन्होंने इसे अपनी अवमानना माना, क्योंकि वह स्वयं अन्नपूर्णा के रूप में संसार का पोषण करती हैं। क्रोधित होकर मां पार्वती ने कैलाश छोड़ दिया और काशी में जाकर तप करने लगीं। उनके जाने से समस्त सृष्टि में अन्न-जल का अभाव हो गया। प्राणी भूख-प्यास से व्याकुल होने लगे। कैलाश पर भी शिव और उनके गणों को भोजन की कमी खलने लगी।

मां पार्वती का अन्नपूर्णा अवतार

ऐसे में पृथ्वी पर सूखा पड़ना गए। इस कारण जमीन भी बंजर हो गई और फसले भी सूखने लगीं। ऐसे में अन्न और जल का बहुत आभाव हो गया। फल, अनाज और पानी की कमी होने लगी तो मानव और पशु-पक्षी के जीवन पर संकट आ गया, तब लोगों ने इस समस्या से मुक्ति पाने के लिए भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश की पूजा की। फिर लोगों के कल्याण के लिए शिवजी ने एक भिक्षु का रूप धारण किया और माता पार्वती ने मां अन्नपूर्णा का अवतार लिया। इसके बाद शिव जी ने मां अन्नपूर्णा से अन्न की भिक्षा मांगी। भिक्षा में मिले अन्न को शिव जी ने पृथ्वी लोक के प्राणियों में बांट दिया और इस तरह फिर से पृथ्वी पर अन्न और जल की कमी दूर हो गई। इस घटना के बाद से ही हर वर्ष मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा तिथि के दिन अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाने लगी।

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