facebook pixel
विज्ञापन
Home›  dharm›  sharad purnima ki raat maa lakshmi kiske ghar deti hain dastak janiye kojagari vrat ki katha

Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी किसके घर देती हैं दस्तक? जानें कोजागरी व्रत की कथा

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Religious Beliefs: शरद पूर्णिमा और कोजागरी व्रत का मुख्य संदेश श्रद्धा, अनुशासन और सकारात्मक जीवन से जुड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात माता लक्ष्मी का स्मरण करने से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। 

Sharad Purnima
Sharad Purnima Puja Vidhi: हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा मनाई जाती है। इसे कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी चांदनी को अमृत के समान गुणकारी माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है।

मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और उन लोगों के घर दस्तक देती हैं, जो जागकर उनकी आराधना करते हैं। इसी कारण इस पर्व को कोजागरी पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन भक्त माता लक्ष्मी से सुख, समृद्धि, धन-धान्य और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

माता लक्ष्मी किसके घर देती हैं दस्तक?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर आकर देखती हैं कि कौन जाग रहा है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस रात जागकर माता लक्ष्मी का ध्यान करता है, पूजा-पाठ करता है और भक्ति में समय बिताता है, उस पर माता की विशेष कृपा होती है। कोजागरी शब्द का संबंध संस्कृत के ‘को जागर्ति’ से माना जाता है, जिसका अर्थ है कि कौन जाग रहा है। 

धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता लक्ष्मी उन घरों में प्रसन्न होती हैं, जहां स्वच्छता रहती है, पूजा-पाठ किया जाता है और परिवार के सदस्य सदाचार का पालन करते हैं। इस दिन घर के मंदिर और मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की परंपरा भी प्रचलित है। हालांकि, यह मान्यताएं धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं। इनका उद्देश्य लोगों को भक्ति, सकारात्मकता और अच्छे कर्मों के लिए प्रेरित करना है।

क्या है कोजागरी व्रत की पौराणिक कथा?

कोजागरी व्रत से जुड़ी एक प्रचलित कथा के अनुसार, एक नगर में एक साहूकार रहता था। उसकी दो बेटियां थीं। दोनों बेटियां पूर्णिमा का व्रत रखती थीं, लेकिन छोटी बेटी व्रत के नियमों का ठीक से पालन नहीं करती थी। वहीं, बड़ी बेटी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ व्रत करती थी। धार्मिक कथा के अनुसार, छोटी बेटी के व्रत में कमी रहने के कारण उसे व्रत का पूरा फल नहीं मिला। दूसरी ओर, बड़ी बेटी को व्रत के पुण्य का लाभ प्राप्त हुआ। 

इस कथा के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धा, नियम और सच्ची भावना का विशेष महत्व होता है। कोजागरी पूर्णिमा की एक अन्य प्रचलित मान्यता माता लक्ष्मी के रात्रि भ्रमण से जुड़ी है। कहा जाता है कि इस रात माता लक्ष्मी अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए पृथ्वी पर आती हैं और जागकर उनकी आराधना करने वाले लोगों पर प्रसन्न होती हैं। इसलिए भक्त रात में भजन-कीर्तन करते हैं, माता लक्ष्मी की कथा सुनते हैं और दीपदान करते हैं।

कैसे करें माता लक्ष्मी की पूजा?

शरद पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और घर के पूजा स्थल की सफाई करें। इसके बाद माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने दीपक जलाकर पूजा करें। माता को कमल का फूल, फल, मिठाई और अन्य श्रद्धानुसार भोग अर्पित कर सकते हैं। इसके बाद माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें और कोजागरी व्रत की कथा सुनें। इस रात घर में दीपक जलाने और लक्ष्मी स्तुति करने की परंपरा भी है। भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा के समय मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें और परिवार में प्रेम तथा सद्भाव बनाए रखें।

शरद पूर्णिमा की रात खीर रखने की परंपरा

शरद पूर्णिमा पर रात में खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणें अमृतमयी होती हैं और खीर को चांदनी में रखने से उसमें विशेष गुण आ जाते हैं। इसके बाद खीर को भगवान को अर्पित करके प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। हालांकि, चांदनी में रखी खीर के औषधीय गुणों से संबंधित मान्यताओं के लिए ठोस वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। इसलिए खीर को स्वच्छ और सुरक्षित स्थान पर ढककर रखना चाहिए।

कोजागरी व्रत से क्या मिलता है संदेश?

शरद पूर्णिमा और कोजागरी व्रत का मुख्य संदेश श्रद्धा, अनुशासन और सकारात्मक जीवन से जुड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात माता लक्ष्मी का स्मरण करने से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। यह पर्व हमें घर में स्वच्छता रखने, जरूरतमंदों की सहायता करने और अच्छे कर्म करने की प्रेरणा भी देता है। सच्ची श्रद्धा और सदाचार के साथ मनाया गया यह त्योहार भक्तों के लिए आध्यात्मिक शांति और आनंद का अवसर बनता है।

ये भी पढ़ें -  कब से शुरू होगा कार्तिक स्नान 2026? जानें तुलसी पूजा और दीपदान का महत्व

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel