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Ahoi Ashtami Vrat Katha : अहोई अष्टमी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा , मिलेगा आशीर्वाद

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Ahoi Ashtami Vrat Katha :  माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं। यह व्रत सुबह से लेकर शाम तक रखा जाता है। तारों को देखने के बाद ही इस व्रत को पूरा माना जाता है

Ahoi Ashtami Vrat Katha : 
Ahoi Ashtami Vrat Katha :  माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं। यह व्रत सुबह से लेकर शाम तक रखा जाता है। तारों को देखने के बाद ही इस व्रत को पूरा माना जाता है कुछ महिलाएं चंद्रमा को देखकर अपना व्रत खोलती हैं। कई इलाकों में इस व्रत को 'अहोई आठे' के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ हम अहोई अष्टमी से जुड़ी व्रत कथा साझा करेंगे।

अहोई अष्टमी व्रत कथा

प्राचीन समय में एक शहर में एक साहूकार रहता था जिसके सात बेटे थे। दिवाली से पहले साहूकार की पत्नी अपने घर की लिपाई-पुताई के लिए मिट्टी लाने गई और कुदाल से खुदाई करने लगी। अनजाने में उसने ठीक उसी जगह खुदाई कर दी जहाँ एक साही का मांद था। कुदाल एक साही के बच्चे को लग गई, जिससे उसकी तुरंत मौत हो गई। साहूकार की पत्नी को इस अनजाने में हुए काम से बहुत गहरा दुख हुआ लेकिन वह कुछ नहीं कर सकती थी। दुख और पछतावे से भरी वह घर लौट आई।

कुछ समय बाद, साहूकार के एक बेटे की मृत्यु हो गई। फिर दूसरा, तीसरा और इस तरह एक साल के भीतर उसके सातों बेटों की मौत हो गई। वह महिला गहरे दुख में डूब गई। एक दिन रोते हुए उसने पड़ोस की महिलाओं को बताया कि उसने कभी जानबूझकर कोई पाप नहीं किया है। उसने बताया कि मिट्टी खोदते समय अनजाने में उससे एक साही के बच्चे की जान चली गई थी, और उसके बाद उसके सातों बेटों की मृत्यु हो गई।

यह सुनकर, पड़ोस की एक बुजुर्ग महिला ने उससे कहा कि अपनी गलती मान लेने और पछतावा करने से उसका आधा पाप तो पहले ही धुल गया है। उसने सलाह दी कि अष्टमी के दिन देवी अहोई की शरण में जाए, साही और उसके बच्चों का चित्र बनाए, उनकी पूजा करे और देवी से क्षमा मांगे। ऐसा करने से वह अपने पाप से मुक्त हो जाएगी।

साहूकार की पत्नी ने इस सलाह का पालन किया। उसने कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को व्रत रखा और पूजा-अर्चना की। वह हर साल नियमित रूप से ऐसा करने लगीं। इसके फलस्वरूप उन्हें सात पुत्रों का आशीर्वाद मिला। कहा जाता है कि 'अहोई व्रत' की परंपरा उसी समय से शुरू हुई। 

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)
 

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