facebook pixel
विज्ञापन
Home›  dharm›  kartik mass kartik snan 2026 kab se shuru hoga janiye tulsi pooja aur deepdan ka mahatva

Kartik Mass: कब से शुरू होगा कार्तिक स्नान 2026? जानें तुलसी पूजा और दीपदान का महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Kartik Mass 2026:  हिंदू कैलेंडर में कार्तिक का महीना धार्मिक स्नान, दान, पूजा-पाठ और दीपदान जैसे कार्यों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। कार्तिक को 'दामोदर मास' के नाम से भी जाना जाता है। यह महीना भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है

Kartik Mass 2026:
Kartik Mass 2026:  हिंदू कैलेंडर में कार्तिक का महीना धार्मिक स्नान, दान, पूजा-पाठ और दीपदान जैसे कार्यों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। कार्तिक को 'दामोदर मास' के नाम से भी जाना जाता है। यह महीना भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है। इस महीने में नदियों या पवित्र तीर्थ स्थलों पर स्नान करना तुलसी के पौधे की पूजा करना और दीपदान करना बहुत पुण्यदायी माना जाता है। पद्म पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार जो लोग कार्तिक के महीने में स्नान करते हैं उनके कई जन्मों के पाप धुल जाते हैं और भगवान विष्णु की कृपा से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।

कार्तिक स्नान की शुरुआत

कार्तिक के महीने में धार्मिक स्नान की अवधि कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है यानी महीने के पहले दिन से ही। इस वर्ष कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा तिथि सोमवार, 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे शुरू होगी और मंगलवार, 27 अक्टूबर को सुबह 7:01 बजे तक रहेगी। 'उदयातिथि'  के आधार पर कार्तिक का महीना 27 अक्टूबर से शुरू होगा। इसलिए, कार्तिक का स्नान 27 अक्टूबर से आरंभ होगा।

कार्तिक के पहले स्नान का समय

कार्तिक महीने का पहला स्नान 'ब्रह्म मुहूर्त' के दौरान करना सबसे उत्तम माना जाता है। शास्त्रों में, स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त को सबसे शुभ समय माना गया है। इस दिन, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:47 बजे से सुबह 5:38 बजे तक रहेगा। जो लोग इस समय स्नान नहीं कर पाते, वे सूर्योदय के बाद स्नान कर सकते हैं  सूर्योदय सुबह 6:29 बजे होगा। इस दिन सुबह से लेकर सुबह 10:53 बजे तक 'सिद्धि योग' रहेगा। माना जाता है कि इस 'योग' के दौरान पवित्र स्नान और दान-पुण्य करने से बहुत अधिक आध्यात्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है।

कार्तिक स्नान की अवधि कब समाप्त होती है?

कार्तिक मास में पवित्र स्नान की अवधि 'पूर्णिमा' के दिन समाप्त होती है। 'कार्तिक पूर्णिमा' के दिन स्नान के बाद दान-पुण्य करने की परंपरा है। इसके अलावा, अपने पूर्वजों की भलाई के लिए 'तर्पण'  और 'श्राद्ध'  जैसे कार्य भी किए जाते हैं। पंचांग  के अनुसार, 'कार्तिक पूर्णिमा' तिथि 23 नवंबर को रात 11:42 बजे शुरू होगी और 24 नवंबर को रात 8:23 बजे तक रहेगी। 'उदयातिथि' के आधार पर 'कार्तिक पूर्णिमा' मंगलवार, 24 नवंबर को पड़ रही है। इसलिए 'कार्तिक स्नान' की अवधि 24 नवंबर, 2026 को समाप्त होगी।

'कार्तिक स्नान' का महत्व

प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में भगवान विष्णु जल में निवास करते हैं। इसी कारण लोग नदियों, तालाबों या पवित्र तीर्थ स्थलों पर स्नान करते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है, पापों से मुक्ति मिलती है और अंततः 'मोक्ष' की प्राप्ति होती है। जो लोग पवित्र स्नान के लिए किसी तीर्थ स्थल या नदी पर नहीं जा सकते, वे घर पर ही अपने नहाने के पानी में 'गंगाजल' मिलाकर स्नान कर सकते हैं।

कार्तिक मास में 'तुलसी' पूजा और 'दीपदान'

कार्तिक मास में 'तुलसी विवाह' का आयोजन होता है, जो भगवान शालिग्राम और तुलसी के पौधे के बीच एक प्रतीकात्मक विवाह है। माना जाता है कि तुलसी के पत्ते में गंगा नदी, पवित्र तीर्थ पुष्कर और वासुदेव सहित कई देवी-देवताओं का वास होता है। जो लोग स्नान करके भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते अर्पित करते हैं, उन्हें भगवान की कृपा  प्राप्त होती है। इसके अलावा, कार्तिक के पूरे महीने तुलसी के पौधे की नित्य पूजा करने और दीपदान करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।

यह भी पढ़ें 

Shukra Pradosh Vrat: शुक्र प्रदोष व्रत में कितने दीपक जलाने चाहिए? जानें दीपदान का महत्व और सही विधि

Karwa Chauth 2026: पहली बार रख रही हैं करवाचौथ का व्रत? तो इन नियमों का रखें ध्यान

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

 

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel