Karwa Chauth 2026: करवाचौथ का व्रत रखने वाली महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास करती हैं और शाम को विधि-विधान से पूजा करने के बाद चंद्रमा के दर्शन का इंतजार करती हैं। मान्यता है कि चंद्रदेव को अर्घ्य देने और पति का चेहरा छलनी से देखने के बाद ही व्रत पूरा होता है। लेकिन कई बार मौसम खराब होने, आसमान में बादल छाए रहने या अन्य कारणों से चांद दिखाई नहीं देता। ऐसे में महिलाओं के मन में सवाल उठता है कि अगर करवाचौथ की रात चंद्रमा के दर्शन न हों, तो व्रत कैसे खोलना चाहिए? क्या चांद देखे बिना व्रत खोल सकते हैं और ऐसी स्थिति में पूजा की क्या विधि है? आइए जानते हैं करवाचौथ से जुड़े जरूरी नियम और धार्मिक मान्यताएं...
कब है करवाचौथ 2026?
साल 2026 में करवाचौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार, शाम को भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इसके बाद चंद्रमा के उदय होने पर उन्हें अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। चंद्रोदय का अनुमानित समय रात 8 बजकर 17 मिनट है। हालांकि, अलग-अलग शहरों में चांद निकलने का समय अलग हो सकता है।
चांद न दिखे तो क्या करें?
करवाचौथ की रात अगर आसमान में बादल छाए हों और चंद्रमा दिखाई न दे रहा हो, तो सबसे पहले अपने शहर में चंद्रोदय का निर्धारित समय देख लें। कई बार चांद निकलने के बाद भी बादलों की वजह से उसके दर्शन नहीं हो पाते। ऐसी स्थिति में थोड़ी देर इंतजार कर सकती हैं और खुले स्थान या छत से चंद्रमा को देखने का प्रयास कर सकती हैं। अगर इसके बाद भी चांद दिखाई न दे, तो घबराने के बजाय अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय विद्वान की सलाह के अनुसार आगे की पूजा करें।
चंद्रमा की दिशा में करें पूजा
अगर काफी देर तक चांद दिखाई न दे, तो कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रोदय का समय बीतने के बाद चंद्रमा की अनुमानित दिशा की ओर मुख करके प्रार्थना की जा सकती है। इस दौरान चंद्रदेव का स्मरण करें और पति की सुख-समृद्धि तथा अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें। कुछ परिवारों में चंद्रमा के प्रतीक के रूप में चांदी के सिक्के या चावल से बनी चंद्र आकृति की पूजा करने की परंपरा भी बताई जाती है।
भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा के दर्शन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रदेव विराजमान हैं। इसी आधार पर कुछ लोग चांद न दिखने की स्थिति में भगवान शिव की प्रतिमा या तस्वीर में सुशोभित चंद्रमा का स्मरण करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती से सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना की जाती है। ध्यान रहे कि शिवजी के मस्तक पर चंद्रमा के दर्शन करना एक प्रचलित धार्मिक उपाय है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि
करवाचौथ पर चंद्रमा के दर्शन होने के बाद उन्हें जल अर्पित करने की परंपरा है। इसके लिए एक लोटे में जल लेकर उसमें अक्षत या फूल डाल सकती हैं। चंद्रमा के दर्शन होने पर श्रद्धापूर्वक अर्घ्य दें और पति की लंबी उम्र तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें। इसके बाद कई परिवारों में छलनी से पहले चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखने की परंपरा निभाई जाती है। पति के हाथों से जल ग्रहण करके व्रत खोलने की रस्म भी प्रचलित है।
व्रत खोलते समय इन बातों का रखें ध्यान