Path of Devotion: जब मनुष्य को बिना मांगे इतना कुछ मिल रहा है, तब भी यदि वह परमात्मा को याद नहीं करता, उनके प्रति कृतज्ञ नहीं होता और अपने जीवन में भक्ति के लिए समय नहीं निकालता, तो यह उसके लिए विचार करने का विषय है।
Religious Thoughts: स्वामी चिन्मयानंद बापू ने भगवान की करुणा और कृपा का वर्णन करते हुए कहा कि परमात्मा किसी एक व्यक्ति या केवल अपने भक्तों पर ही कृपा नहीं करते, बल्कि भगवान की कृपा संसार के प्रत्येक जीव पर समान रूप से बनी रहती है। हम भगवान का नाम लेते हैं, उनकी पूजा करते हैं और उनकी भक्ति करते हैं, इसलिए हमें लगता है कि भगवान हम पर विशेष कृपा कर रहे हैं। लेकिन वास्तव में भगवान की करुणा ऐसी है जो बिना किसी भेदभाव के हर व्यक्ति तक पहुंचती है।
स्वामी जी समझाते हैं कि यदि भगवान केवल अपने भक्तों पर ही कृपा करते, तो संसार में केवल भक्तों के घर ही वर्षा होती और जो लोग भगवान को नहीं मानते या उनका अपमान करते हैं, उनके घर वर्षा नहीं होती। लेकिन ऐसा नहीं है। सूर्य सभी के लिए प्रकाश देता है और वर्षा सभी के लिए होती है। इसी प्रकार भगवान भी किसी के भक्ति करने या न करने के आधार पर अपनी मूल कृपा को नहीं रोकते।
अकारण करुणा करने वाले हैं भगवान
मनुष्य भगवान को माने या न माने, उनका नाम जपे या न जपे, परमात्मा फिर भी उसके जीवन का ध्यान रखते हैं। भगवान इतने दयालु हैं कि वे बिना किसी स्वार्थ के जीवों पर कृपा करते रहते हैं। हम दिन-रात भगवान की आलोचना करें या उनके प्रति कृतज्ञ न रहें, फिर भी भगवान हमें सांस लेने से नहीं रोकते। यही उनकी असीम करुणा का सबसे बड़ा प्रमाण है।
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भगवान की कृपा को करना चाहिए महसूस
स्वामी चिन्मयानंद बापू कहते हैं कि मनुष्य को कभी शांत होकर यह सोचना चाहिए कि उसके जीवन में भगवान ने उसे कितना कुछ दिया है। भगवान ने हमें हाथ-पैर दिए, सोचने और समझने के लिए बुद्धि दी, देखने के लिए आंखें दीं और जीवन को जीने का अवसर दिया। इन चीजों को हम अक्सर अपना अधिकार समझ लेते हैं, जबकि वास्तव में ये परमात्मा की बड़ी कृपा हैं।
कृपा मिलने के बाद भी भक्ति क्यों नहीं?
जब मनुष्य को बिना मांगे इतना कुछ मिल रहा है, तब भी यदि वह परमात्मा को याद नहीं करता, उनके प्रति कृतज्ञ नहीं होता और अपने जीवन में भक्ति के लिए समय नहीं निकालता, तो यह उसके लिए विचार करने का विषय है। भगवान ने हमें जीवन दिया, लेकिन उस जीवन का सही उपयोग करना हमारी जिम्मेदारी है। इसलिए हमें केवल संकट के समय भगवान को याद नहीं करना चाहिए। सुख, सुविधा, स्वास्थ्य, परिवार, बुद्धि और जीवन में मिलने वाले प्रत्येक अवसर को भगवान की कृपा मानकर उनके प्रति कृतज्ञ होना चाहिए। जब मनुष्य भगवान की इस अकारण करुणा को महसूस करने लगता है, तब उसके भीतर अहंकार कम होता है और भक्ति, विनम्रता तथा कृतज्ञता का भाव बढ़ने लगता है। यही भगवान की कृपा को पहचानने का सच्चा मार्ग है।