Bhakti Marg: श्रीमद्भागवत में तीनों विशेषताएं एक साथ मिलती हैं, यह सभी कल्याणों में श्रेष्ठ कल्याण करने वाला है, सभी पवित्र करने वाले साधनों में श्रेष्ठ है और भगवान श्रीकृष्ण की प्राप्ति कराने वाला है।
Shrimad Bhagavatam: जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज ने श्रीमद्भागवत के महत्व और उसकी अद्भुत विशेषताओं के बारे में बताते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीव को भगवान की प्राप्ति कराने वाला दिव्य साधन है। इसके महत्व को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि श्रीमद्भागवत में ऐसे कौन-कौन से गुण हैं, जो इसे अन्य ग्रंथों से विशेष बनाते हैं।
श्रीमद्भागवत के प्रथम अध्याय में शौनक आदि ऋषियों ने सूत जी से जिज्ञासा की। उन्होंने पूछा कि ऐसा कौन सा साधन है, जो सभी प्रकार के कल्याणों में सबसे श्रेष्ठ हो, जो सभी पवित्र करने वाली वस्तुओं में सबसे अधिक पवित्र करने वाला हो और जिसके माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की प्राप्ति हो सके। ऋषियों की यह जिज्ञासा केवल किसी धार्मिक साधन को जानने के लिए नहीं थी, बल्कि वे ऐसा मार्ग जानना चाहते थे, जिससे मनुष्य का जीवन वास्तव में सफल और पवित्र हो सके।
श्रीमद्भागवत में हैं तीनों विशेषताएं
रामभद्राचार्य जी महाराज बताते हैं कि ऋषियों के इन तीनों प्रश्नों का उत्तर एक ही है और वह है श्रीमद्भागवत। श्रीमद्भागवत में ये तीनों विशेषताएं एक साथ दिखाई देती हैं। यह सभी कल्याणों का भी कल्याण करने वाला है, सभी पवित्र करने वाले साधनों में श्रेष्ठ पवित्र करने वाला है और भगवान श्रीकृष्ण की प्राप्ति कराने वाला भी है। इसी कारण श्रीमद्भागवत को अत्यंत पवित्र और दिव्य शास्त्र माना गया है। इसके श्रवण और मनन से मनुष्य के भीतर भगवान के प्रति भक्ति और समर्पण की भावना जागृत होती है।
Trending Video
सभी कल्याणों का कल्याण
श्रीमद्भागवत की पहली अद्भुत विशेषता यह है कि यह सभी प्रकार के कल्याणों का भी कल्याण करने वाला है। संसार में मनुष्य अनेक प्रकार के सुख और उपलब्धियां प्राप्त करना चाहता है, लेकिन श्रीमद्भागवत मनुष्य को केवल सांसारिक सुख की ओर नहीं ले जाता, बल्कि उसके जीवन को परम कल्याण अर्थात भगवान की ओर मोड़ता है।
सबसे बड़ा पवित्र करने वाला
इसकी दूसरी विशेषता इसकी पवित्रता है। श्रीमद्भागवत का श्रवण और चिंतन मनुष्य के मन को भगवान के नाम, रूप, गुण और लीलाओं से जोड़ता है। यही कारण है कि इसे पवित्र करने वाले साधनों में भी श्रेष्ठ माना गया है। यह केवल बाहरी शुद्धि की बात नहीं करता, बल्कि मन और विचारों को भी भगवान की भक्ति से निर्मल करने का मार्ग दिखाता है।
भगवान की प्राप्ति का साधन
श्रीमद्भागवत की तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह भगवान की प्राप्ति का साधन है। रामभद्राचार्य जी महाराज के अनुसार श्रीमद्भागवत का स्वभाव ही जीव को भगवान से जोड़ना और भगवान की प्राप्ति के लिए अनुकूल बनाना है। जब मनुष्य श्रद्धा से भागवत कथा सुनता और उसके संदेश को अपने जीवन में उतारता है, तो उसके भीतर भगवान के प्रति प्रेम और भक्ति की भावना बढ़ती है।
श्रीमद्भागवत का अद्भुत महत्व
इस प्रकार श्रीमद्भागवत में तीनों विशेषताएं एक साथ मिलती हैं, यह सभी कल्याणों में श्रेष्ठ कल्याण करने वाला है, सभी पवित्र करने वाले साधनों में श्रेष्ठ है और भगवान श्रीकृष्ण की प्राप्ति कराने वाला है। यही श्रीमद्भागवत की अद्भुत महिमा है, जिसे रामभद्राचार्य जी महाराज ने सरल शब्दों में समझाते हुए बताया कि भागवत का मूल उद्देश्य जीव को भगवान के निकट ले जाना और उसके जीवन को भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ाना है।