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Shivam Sadhak Ji Maharaj: गया में पितृ दोष से मुक्ति का है दुर्लभ अवसर, शिवम साधक जी महाराज ने बताया महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Pitru Paksha: पितृ पक्ष और पितरों से जुड़े धार्मिक कर्म केवल किसी समस्या के समाधान के लिए ही नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम भी माने जाते हैं।
 

Shivam Sadhak Ji Maharaj
Gaya Dham Pind Daan: हिंदू धर्म में पितरों का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परिवार में जिन पूर्वजों का देहांत हो चुका है, उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान जैसे कर्म किए जाते हैं। मान्यता है कि यदि किसी कारण से पूर्वजों का विधि-विधान से श्राद्ध, तर्पण या पिंडदान नहीं हो पाता, तो पितरों की शांति में बाधा आ सकती है। इसी स्थिति को कई धार्मिक परंपराओं में पितृ दोष से जोड़कर देखा जाता है।

कई लोग घर में बार-बार होने वाले पारिवारिक क्लेश, मानसिक अशांति, कार्यों में रुकावट या आर्थिक परेशानियों को भी पितृ दोष से जोड़ते हैं। हालांकि ऐसी समस्याओं के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए इन्हें केवल पितृ दोष का परिणाम मानना उचित नहीं है। धार्मिक दृष्टि से पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक कर्म करना एक महत्वपूर्ण परंपरा मानी गई है।

गया धाम में पिंडदान का विशेष महत्व

गया धाम को हिंदू धर्म में पितरों के श्राद्ध और पिंडदान के लिए अत्यंत पवित्र तीर्थ माना जाता है। मान्यता है कि गया में विधि-विधान से पिंडदान और तर्पण करने से पितरों की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। यही कारण है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपने पूर्वजों के निमित्त गया धाम पहुंचते हैं।

4 से 10 अक्टूबर तक विशेष धार्मिक आयोजन

इसी धार्मिक उद्देश्य से 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2026 तक गया धाम में विशेष आयोजन किया जा रहा है। परम पूज्य डॉक्टर श्री शिवम साधक जी महाराज के पावन सानिध्य में श्रीमद्भागवत कथा, पोथी पाठ, तर्पण एवं पिंडदान का आयोजन होगा। इस दौरान श्रद्धालु कथा श्रवण के साथ अपने पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान में शामिल हो सकेंगे।

पितरों के प्रति श्रद्धा का अवसर

पितृ पक्ष और पितरों से जुड़े धार्मिक कर्म केवल किसी समस्या के समाधान के लिए ही नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम भी माने जाते हैं। अपने पूर्वजों को स्मरण करना, उनके निमित्त तर्पण और पिंडदान करना तथा भगवान से उनकी शांति की प्रार्थना करना हिंदू परंपरा में विशेष महत्व रखता है। गया धाम में होने वाला यह आयोजन उन श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है, जो अपने पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान करना चाहते हैं। श्रीमद्भागवत कथा और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से श्रद्धालु आध्यात्मिक वातावरण में भगवान का स्मरण और अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित कर सकेंगे।

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कथावाचक डॉ. शिवम साधक जी महाराज
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