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Sadhvi Krishnapriya Ji: घर में कितने रख सकते हैं शिवलिंग? साध्वी कृष्णप्रिया जी ने बताया नियम और महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Shivling at Home: शिवलिंग की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, पवित्रता और उचित विधि मानी जाती है। घर में शिवलिंग रखने से पहले अपनी पारिवारिक परंपरा और पूजा-पद्धति को समझना अच्छा रहता है। 
 

Sadhvi Krishnapriya Ji
Shivling Puja Rules: सनातन धर्म में भगवान शिव के शिवलिंग स्वरूप को अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना गया है। मान्यता है कि घर में शिवलिंग की विधि-विधान से पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। साध्वी कृष्णप्रिया जी के अनुसार, सामान्य रूप से घर के मंदिर में एक शिवलिंग रखना उचित माना जाता है। हालांकि, अगर किसी के पास दो शिवलिंग हैं तो इसे लेकर घबराने या परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। तीन शिवलिंग होने की स्थिति को भी उन्होंने विशेष अर्थ, काम और मोक्ष से जोड़कर बताया है।

घर में शिवलिंग रखने के साथ उसके स्वरूप और स्थापना का भी ध्यान रखना जरूरी बताया गया है। साध्वी कृष्णप्रिया जी कहती हैं कि घर में रखे जाने वाले शिवलिंग को अलग-अलग करके नहीं रखना चाहिए। शिवलिंग के साथ उसका अर्घा या वेदी भी उचित रूप से होना चाहिए। पूजा में शिवलिंग और उसके आधार का संबंध महत्वपूर्ण माना जाता है।

धातु के शिवलिंग के साथ वेदी का नियम

अगर घर में धातु का शिवलिंग रखा गया है तो उसके अर्घे या वेदी की धातु भी उसी के अनुरूप होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि शिवलिंग सोने का है तो उसकी वेदी भी सोने की होनी चाहिए। इसी तरह चांदी के शिवलिंग के साथ चांदी की और पीतल के शिवलिंग के साथ पीतल की वेदी रखने की बात कही गई है। अलग-अलग धातुओं को मिलाकर शिवलिंग और उसके आधार को रखना उचित नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से पूजा की शुद्धता प्रभावित हो सकती है।

नर्मदेश्वर शिवलिंग का विशेष महत्व

नर्मदा नदी से प्राप्त होने वाले नर्मदेश्वर शिवलिंग को लेकर अलग मान्यता बताई जाती है। यदि नर्मदा नदी से प्राप्त छोटा शिवलिंग हो, तो उसके लिए अलग से अर्घा रखने की परंपरा भी देखने को मिलती है। नर्मदेश्वर शिवलिंग को स्वयं भगवान शिव का स्वरूप मानकर श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा जाता है।

बड़े मंदिरों के अलग हो सकते हैं नियम 

साध्वी कृष्णप्रिया जी यह भी स्पष्ट करती हैं कि बड़े मंदिरों में स्थापित शिवलिंग के नियम घर में रखे जाने वाले शिवलिंग से अलग हो सकते हैं। मंदिरों में स्वयंभू या विधिवत प्रतिष्ठित शिवलिंग की स्थापना विशेष परंपराओं और धार्मिक विधियों के अनुसार होती है। इसलिए घर के पूजा स्थान और बड़े मंदिरों की व्यवस्था को एक समान नहीं समझना चाहिए। शिवलिंग की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, पवित्रता और उचित विधि मानी जाती है। घर में शिवलिंग रखने से पहले अपनी पारिवारिक परंपरा और पूजा-पद्धति को समझना अच्छा रहता है। भगवान शिव की पूजा सच्चे मन और श्रद्धा से करने पर भक्त को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मकता का अनुभव होता है।

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