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Pradeep Mishra Ji Maharaj: हमारे कर्मों का हिसाब कौन लिखता है? पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज ने बताया

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Shiv Mahapuran: हमारे कर्मों का हिसाब किसी दूसरे के पास नहीं, बल्कि हमारे अपने कर्मों में ही छिपा हुआ है। आज हम जो करेंगे, वही हमारे भविष्य का आधार बनेगा। 

Pandit Pradeep Mishra Ji Maharaj
Spiritual Knowledge: पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज अपने प्रवचन में कर्मों के गहरे रहस्य को बहुत सरल भाषा में समझाते हैं। वे कहते हैं कि अक्सर मनुष्य यह सोचता है कि भगवान हमारे अच्छे-बुरे कर्मों को लिख रहे हैं और उसी के अनुसार हमें सुख या दुख मिल रहा है। लेकिन सही मायने में देखा जाए तो हमारे कर्मों को कोई दूसरा नहीं लिखता। हमारे कर्मों का लेखा-जोखा हम स्वयं तैयार करते हैं। हमने अपने जीवन में जो कर्म किए हैं, उन्हीं का परिणाम हमें आगे चलकर प्राप्त होता है।

महाराज जी समझाते हैं कि मनुष्य ने पूर्व में जो कर्म किए होते हैं, वह आज उनके परिणाम के रूप में पढ़ रहा होता है। जीवन में मिलने वाली परिस्थितियां, सुख-दुख और अनुभव हमारे पुराने कर्मों से जुड़े हो सकते हैं। इसी प्रकार हम आज जो कर्म कर रहे हैं, उनका परिणाम हमें आने वाले समय में प्राप्त होगा। इसलिए मनुष्य को अपने वर्तमान कर्मों के प्रति हमेशा सजग रहना चाहिए।

अपने कर्मों की जिम्मेदारी

हमारे जीवन में जो कुछ घटता है, उसकी जिम्मेदारी दूसरों पर डालना उचित नहीं है। हम जैसा कर्म करते हैं, वैसा ही फल हमें प्राप्त होता है। कोई दूसरा व्यक्ति हमारे कर्मों को बदल नहीं सकता। इसलिए हमें यह समझना चाहिए कि हमारे जीवन की दिशा हमारे विचारों और कर्मों से बनती है। अच्छे विचार और अच्छे कर्म जीवन में सकारात्मक परिणाम लेकर आते हैं, जबकि गलत कर्म आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकते हैं।

बुरे कर्मों से बचने की सीख

पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज लोगों को यह भी समझाते हैं कि मनुष्य को बुरे कर्म करने से बचना चाहिए। कई बार व्यक्ति गुस्से, लालच, अहंकार या स्वार्थ में आकर ऐसा काम कर देता है, जिसका पछतावा उसे बाद में होता है। उस समय किया गया कर्म भले ही छोटा लगे, लेकिन उसका प्रभाव भविष्य में दिखाई दे सकता है। इसलिए किसी भी काम को करने से पहले उसके परिणाम के बारे में विचार करना चाहिए।

भगवान की शरण और सही कर्म

भगवान की भक्ति का अर्थ केवल पूजा-पाठ करना नहीं, बल्कि अपने व्यवहार और कर्मों को भी सुधारना है। यदि हम भगवान को मानते हैं तो हमें अपने जीवन में सत्य, प्रेम, दया और अच्छे आचरण को अपनाना चाहिए। मनुष्य अपने कर्मों को सुधारकर अपने आने वाले समय को बेहतर बना सकता है।

जीवन की सबसे बड़ी सीख

इस पूरी बात का सार यही है कि हमारे कर्मों का हिसाब किसी दूसरे के पास नहीं, बल्कि हमारे अपने कर्मों में ही छिपा हुआ है। आज हम जो करेंगे, वही हमारे भविष्य का आधार बनेगा। इसलिए जीवन में हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए, किसी को दुख नहीं देना चाहिए और गलत रास्ते से बचना चाहिए। अपने कर्मों की जिम्मेदारी समझ लेना ही जीवन को सही दिशा देने की पहली सीढ़ी है।

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