महाकाल की नगरी उज्जैन में स्थित मंगलनाथ का मंदिर बहुत प्रसिद्ध मंदिर है। मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में कुंडली में प्रबल मंगल या कुंडली में मंगल की खराब स्थिति के लिए मांगलिक दोष के निवारण हेतु पूजा-अर्चना की जाती है।
Mangalnath Temple: देशभर में ऐसे करोड़ों मंदिर हैं जो चमत्कारों के लिए मशहूर हैं। इन मंदिरों से करोड़ों लोगों की श्रद्धा और आस्था जुड़ी हुई है। इन्हीं में से एक मंदिर उज्जैन में है जो मंगलनाथ के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर में मंगल दोष का निवारण किया जाता है। शहर के बाहरी इलाके में स्थित मंगलनाथ मंदिर पर्यटन सर्किट के सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है। भगवान शिव, जिन्हें महादेव के नाम से भी जाना जाता है, इस मंदिर के मुख्य देवता हैं और दुनिया भर के भक्त उनकी पूजा करते हैं।
मत्स्य पुराण के अनुसार मंगलनाथ मंदिर को मंगल ग्रह का जन्मस्थान कहा जाता है। प्राचीन काल में यह मंदिर मंगल ग्रह के स्पष्ट दर्शन के लिए सबसे अच्छे स्थानों में से एक माना जाता था क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यह लोगों की नकारात्मक ऊर्जा और परेशानियों को दूर करता है। यहां से पर्यटक पवित्र क्षिप्रा नदी का शानदार और विस्तृत दृश्य भी देख सकते हैं। इस मंदिर में मंगल दोष के लिए विधि-विधान से पूजन किया जाता है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष होता है और मंगल दोष के कारण उन्हें अपने करियर और विवाह में परेशानी होती है, वे इस मंदिर में जाकर मंगल शांति के लिए पूजा करवाते हैं। आइए जानते हैं मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के बारे में।
मंगलनाथ मंदिर की कहानी (Mangalnath Temple Story)
पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बार अंधकासुर नामक राक्षस ने अपनी कठोर तपस्या के बल पर भगवान शिव से वरदान प्राप्त कर लिया कि यदि उसके रक्त की एक बूंद भी धरती पर गिरेगी तो उससे सैकड़ों राक्षस पैदा हो जाएंगे। इसके बाद उसने इसका गलत इस्तेमाल करते हुए पूरी धरती पर उत्पात मचाना शुरू कर दिया। मान्यता है कि जब देवताओं ने भगवान शिव को अपनी व्यथा सुनाई तो महादेव ने अंधकासुर से युद्ध करना शुरू कर दिया। युद्ध के दौरान जब महादेव के पसीने की एक बूंद धरती पर गिरी तो उसकी गर्मी से धरती फट गई और मंगल देवता प्रकट हुए और उन्होंने अंधकासुर के शरीर से निकलने वाले रक्त को सोख लिया। इसके बाद भगवान शिव ने अंधकासुर का वध कर दिया।
उज्जैन को क्यों कहा जाता है 'मंगल की नगरी' (Mangal Dosh Ujjain)
महाकाल की नगरी उज्जैन में स्थित मंगलनाथ का मंदिर बहुत प्रसिद्ध मंदिर है। मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में कुंडली में प्रबल मंगल या कुंडली में मंगल की खराब स्थिति के लिए मांगलिक दोष के निवारण हेतु पूजा-अर्चना की जाती है। इस मंदिर में देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी लोग दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। साल भर में यहां लाखों भक्त आते हैं। इसके अलावा धार्मिक मान्यताओं की मानें तो उज्जैन नगरी को मंगल की नगरी कहा जाता है। इसलिए यहां मंगल दोष निवारण के लिए पीड़ित लोग आते हैं।
दर्शन मात्र से मगल दोष का निवारण (Removal of Mangal Dosh by just seeing it)
ऐसी मान्यता है कि मंगलनाथ मंदिर को मंगल ग्रह का जन्म स्थान माना जाता है। मंगल की उत्पत्ति वाले स्थान पर पूजा-अर्चना और दर्शन करने से मंगल दोष दूर हो जाता है। जिन लोगों की कुंडली में मांगलिक होता है, वे यहां दर्शन करने आते हैं। इसके अलावा मंगलनाथ मंदिर में की गई पूजा भी फल देती है। ज्योतिष शास्त्र में मंगल को उग्र ग्रह बताया गया है। मंगल के कमजोर और दूषित होने पर धन हानि, दुर्घटना और वैवाहिक जीवन में परेशानियां आती हैं। विवाह से पहले कुंडली मिलान के दौरान मंगल दोष की जांच की परंपरा बहुत पुरानी है।
मगंलनाथ मंदिर हमे कब जाना चाहिए? (When should one visit Mangalnath Temple?)
चूंकि मंगलवार को मंगल ग्रह का शासक दिन माना जाता है, इसलिए इसे मंगल दोष की प्रार्थना और प्रसाद चढ़ाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। मंगलनाथ मंदिर में सभी प्रमुख हिंदू त्यौहार मनाए जाते हैं, लेकिन अंगारकी चतुर्थी और महा शिवरात्रि का यहाँ अधिक महत्व है।
मगंलनाथ मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय (Best time to visit Mangalnath Temple)
पूरे साल भक्त आते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। अगर आप उज्जैन के आसपास के आकर्षणों को देखना चाहते हैं, तो अक्टूबर से मार्च का समय सुहावना मौसम और हवादार शामों के साथ पीक सीज़न माना जाता है।
मगंलनाथ मंदिर कैसे जाएं (How to reach Mangalnath Temple)
हवाई मार्ग से: इस स्थान से सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा, लगभग 53 किलोमीटर दूर, इंदौर में देवी अहिल्याबाई होल्कर हवाई अड्डा है। रेल मार्ग से: अगर आप ट्रेन से यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो उज्जैन जंक्शन के लिए अपनी टिकट बुक करें। मंदिर रेलवे स्टेशन से लगभग 6 किमी दूर है। सड़क मार्ग से: सरकारी और निजी दोनों तरह की नियमित बसें इंदौर से उज्जैन को जोड़ती हैं। निर्बाध बस संपर्क के कारण यह स्थान अहमदाबाद, भोपाल, दिल्ली, मुंबई, ग्वालियर आदि सहित भारत के विभिन्न शहरों और कस्बों से आसानी से पहुँचा जा सकता है। आप मंगलनाथ मंदिर और आसपास के दर्शनीय स्थलों को देखने के लिए ऑटो रिक्शा और टैक्सी जैसे स्थानीय परिवहन का उपयोग कर सकते हैं।