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Temple Facts: मंदिर में भगवान के सामने बार-बार क्यों लगाया जाता है पर्दा? जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यता

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Temple Facts: कई मंदिरों में भगवान को भोग अर्पित करते समय भी पर्दा लगाया जाता है। मान्यता है कि भोग भगवान की सेवा का एक निजी हिस्सा है और इस दौरान भक्तों के सीधे दर्शन नहीं होते। 

jeevanjali
Temple Facts: मंदिर में भगवान के दर्शन करने के लिए जब भक्त पहुंचते हैं, तो कई बार उनके सामने अचानक पर्दा लगा दिया जाता है। कुछ देर बाद पर्दा हटता है और भक्तों को फिर से भगवान के दर्शन होते हैं। खासकर बड़े और प्राचीन मंदिरों में यह परंपरा पूजा-पद्धति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। इस दौरान गर्भगृह में पूजा, श्रृंगार या भगवान को भोग लगाने जैसी सेवाएं भी की जाती हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान के सामने बार-बार पर्दा क्यों लगाया जाता है? क्या इसके पीछे केवल पूजा की व्यवस्था है या फिर इससे जुड़ी कोई खास धार्मिक मान्यता भी है? आइए जानते हैं मंदिर में भगवान के सामने पर्दा लगाने की परंपरा का धार्मिक महत्व...

भगवान के विश्राम का समय

सनातन धर्म की मंदिर परंपरा में भगवान की पूजा केवल मूर्ति के रूप में नहीं, बल्कि उन्हें जीवंत स्वरूप मानकर की जाती है। इसी कारण मंदिरों में भगवान के लिए जागरण, स्नान, श्रृंगार, भोग और विश्राम जैसी सेवाओं की परंपरा देखने को मिलती है। जब भगवान को विश्राम कराया जाता है, तब गर्भगृह के सामने पर्दा लगा दिया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस प्रकार किसी व्यक्ति के विश्राम के समय उसकी निजता का ध्यान रखा जाता है, उसी तरह भगवान के विश्राम के समय भी पर्दा किया जाता है।

भोग लगाते समय भी होता है पर्दा

कई मंदिरों में भगवान को भोग अर्पित करते समय भी पर्दा लगाया जाता है। मान्यता है कि भोग भगवान की सेवा का एक निजी हिस्सा है और इस दौरान भक्तों के सीधे दर्शन नहीं होते। भोग अर्पित करने के बाद जब पर्दा हटाया जाता है, तब भक्त दोबारा भगवान के दर्शन कर सकते हैं। मंदिरों में यह परंपरा अलग-अलग नियमों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है।

श्रृंगार के समय क्यों लगता है पर्दा?

मंदिरों में भगवान का प्रतिदिन श्रृंगार किया जाता है। इसमें वस्त्र बदलना, आभूषण पहनाना, चंदन लगाना, फूलों से सजाना और अन्य पूजा सामग्री से भगवान का श्रृंगार करना शामिल होता है। श्रृंगार के दौरान पर्दा लगाना भगवान की सेवा के प्रति सम्मान से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक परंपरा में भगवान को आराध्य के साथ-साथ परिवार के सदस्य के समान भी माना गया है। इसलिए उनके वस्त्र बदलने और श्रृंगार के समय पर्दा रखना मर्यादा का हिस्सा माना जाता है।

गर्भगृह की पवित्रता से जुड़ी मान्यता

मंदिर का गर्भगृह सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। यहां भगवान की मुख्य प्रतिमा स्थापित होती है और पूजा की विशेष विधियां संपन्न की जाती हैं। जब गर्भगृह में विशेष पूजा, मंत्रोच्चार, भोग या अन्य सेवा चल रही होती है, तब पर्दा लगाकर बाहरी गतिविधियों से उस पूजा को अलग रखा जाता है। इससे मंदिर की पारंपरिक पूजा-पद्धति और गर्भगृह की मर्यादा भी बनी रहती है।

हर मंदिर में अलग हो सकते हैं नियम

यह जरूरी नहीं है कि हर मंदिर में पर्दा लगाने की परंपरा बिल्कुल एक जैसी हो। अलग-अलग मंदिरों में वहां की परंपरा, संप्रदाय और पूजा-विधि के अनुसार दर्शन के समय तय किए जाते हैं। कुछ मंदिरों में दिन में कई बार पर्दा लगाया जाता है, जबकि कुछ स्थानों पर विशेष पूजा या भोग के समय ही भगवान के सामने पर्दा किया जाता है। कई प्रसिद्ध मंदिरों में तो भगवान के पूरे दिन के कार्यक्रम को अलग-अलग सेवाओं में बांटा गया है और उसी के अनुसार दर्शन के समय भी निर्धारित होते हैं।

भक्तों के लिए भी है खास महत्व

भगवान के सामने पर्दा लगने के बाद भक्तों को कुछ समय के लिए दर्शन नहीं मिलते। धार्मिक दृष्टि से इसे भगवान की सेवा का समय माना जाता है। जब सेवा पूरी होने के बाद पर्दा हटाया जाता है, तो भक्त दोबारा दर्शन करते हैं। इसी वजह से कई मंदिरों में पर्दा हटने के समय भक्त विशेष उत्साह के साथ भगवान के दर्शन करते हैं। इसे भगवान की सेवा पूरी होने के बाद मिलने वाले दर्शन के रूप में देखा जाता है।

राधा-कृष्ण मंदिरों में भी दिखती है परंपरा

राधा-कृष्ण और लड्डू गोपाल के मंदिरों में भगवान के श्रृंगार और भोग की परंपरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां भगवान को बाल स्वरूप या प्रियतम स्वरूप में पूजा जाता है। ऐसे मंदिरों में वस्त्र परिवर्तन, श्रृंगार, भोग और विश्राम के समय पर्दा लगाने की परंपरा देखने को मिलती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पर्दा भगवान की सेवा के दौरान उनकी निजता और मंदिर की मर्यादा बनाए रखने का प्रतीक है। यही कारण है कि पर्दा हटने के बाद मिलने वाले दर्शन को भी भक्त विशेष श्रद्धा के साथ करते हैं।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।) 

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