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Devyani Temple: इस मंदिर में होती है दैत्यगुरु शुक्रचार्य की पुत्री की पूजा, कहते हैं सभी मंदिरों की नानी

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Sambhar Jaipur Devyani Temple: तीर्थों की नानी के नाम से भी प्रसिद्ध देवयानी मंदिर राजधानी जयपुर से 70 किलोमीटर दूर सांभर शहर में स्थित है। यहां कई देवी-देवताओं के मंदिर मौजूद हैं। मंदिर के पुजारियों के अनुसार देवयानी तीर्थ स्थल सभी तीर्थों में सबसे प्राचीन है।

Devyani Temple
Sambhar Jaipur Devyani Temple: तीर्थों की नानी के नाम से भी प्रसिद्ध देवयानी मंदिर राजधानी जयपुर से 70 किलोमीटर दूर सांभर शहर में स्थित है। यहां कई देवी-देवताओं के मंदिर मौजूद हैं। मंदिर के पुजारियों के अनुसार देवयानी तीर्थ स्थल सभी तीर्थों में सबसे प्राचीन है। इसी प्राचीनता के कारण इस स्थान को तीर्थों की नानी के नाम से जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार यदि कोई व्यक्ति सभी तीर्थों के दर्शन करने में असमर्थ हो तो देवयानी तीर्थ स्थल पर आकर पूजा-अर्चना करने से उसे सभी तीर्थों में स्नान करने के समान पुण्य की प्राप्ति होती है।

दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य की पुत्री का है मंदिर

राजस्थान के सांभर के देवयानी तीर्थ स्थल पर दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी का मुख्य मंदिर मौजूद है। इसके अलावा देवयानी का संबंध कौरवों से भी है। सावन के महीने में देवयानी सरोवर पर कांवड़ियों का मेला लगता है और लोग शिव मंदिरों के लिए पवित्र जल लेने आते हैं। 

यह झील सांभर झील के बिल्कुल नजदीक मौजूद है, जहां बड़ी संख्या में लोग अपने पाप धोने आते हैं। झील के चारों ओर हिंदू देवी-देवताओं के मंदिर बने हुए हैं। मुख्य रूप से देवयानी का मंदिर है। मंदिर में मौजूद माता देवयानी की मूर्ति की पुजारी द्वारा प्रतिदिन पूजा की जाती है। इसके अलावा माता का श्रृंगार भी किया जाता है।

छोटा पुष्कर के नाम से प्रसिद्ध

देवयानी तीर्थ स्थल को छोटा पुष्कर भी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई सभी तीर्थ स्थलों के दर्शन कर ले और देवयानी तीर्थ स्थल पर स्नान न करे तो उसे मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती है।

सभी तीर्थ स्थलों में सबसे प्राचीन होने के कारण देवयानी तीर्थ स्थल का महत्व अधिक माना जाता है। देवयानी तीर्थ स्थल के पास ही एक विशाल सांभर झील मौजूद है। जहां नमक का उत्पादन होता है, इसके अलावा यहां देशी-विदेशी पर्यटक भी आते हैं।

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