Stambheshwar Mahadev Mandir History: भारत में कई प्राचीन शिव मंदिर हैं, जिनसे कई मान्यताएं जुड़ी हैं। इन्हीं मंदिरों की श्रेणी में गुजरात का एक अनोखा शिव मंदिर भी है। यह मंदिर गुजरात के सोमनाथ मंदिर के पास है।
Stambheshwar Mahadev Mandir History: भारत में कई प्राचीन शिव मंदिर हैं, जिनसे कई मान्यताएं जुड़ी हैं। इन्हीं मंदिरों की श्रेणी में गुजरात का एक अनोखा शिव मंदिर भी है। यह मंदिर गुजरात के सोमनाथ मंदिर के पास है। कहा जाता है कि यह अनोखा शिव मंदिर दिन में दो बार आंखों से ओझल हो जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि समुद्र के पास स्थित शिव मंदिर का जल अभिषेक अपने आप होता है।
मंदिर का नाम स्तंभेश्वर महादेव मंदिर है। गुजरात के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक स्तंभेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण 7वीं शताब्दी के आसपास हुआ था। इसका निर्माण चावड़ी संतों ने कराया था। बाद में इस मंदिर का पुनर्निर्माण श्री शंकराचार्य ने करवाया था। इस मंदिर में भगवान महादेव की मूर्ति मंदिर के गर्भगृह में स्थापित है।
मंदिर के पास ही त्रिलोचन गढ़ किला है, जिसे सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की रक्षा के लिए बनवाया गया था। यह किला गुजरात के सौराष्ट्र का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। आइए जानते हैं गुजरात के अनोखे स्तंभेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी रोचक बातें और यहां कैसे पहुंचें। स्तंभेश्वर महादेव मंदिर कहां स्थित है
भारत के सबसे अनोखे मंदिरों में से एक स्तंभेश्वर महादेव मंदिर गुजरात की राजधानी गांधीनगर से करीब 175 किलोमीटर दूर जंबूसर के कवि कंबोई गांव में स्थित है। यह प्राचीन सोमनाथ मंदिर से करीब 15 किलोमीटर दूर है। ऐसे में अगर आप सोमनाथ मंदिर के दर्शन करने जा रहे हैं तो स्तंभेश्वर महादेव मंदिर भी जा सकते हैं।
स्तंभेश्वर महादेव मंदिर कैसे पहुंचें
स्तंभेश्वर महादेव मंदिर पहुंचने के लिए यात्री ट्रेन या फ्लाइट से द्वारका, पोरबंदर और दिवे जैसे बड़े शहरों तक पहुंच सकते हैं। यहां से स्तंभेश्वर महादेव के लिए परिवहन सुविधाएं उपलब्ध होंगी। स्तंभेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव के दर्शन के लिए आपको अहमदाबाद या वडोदरा से बस या ट्रेन सेवाएं भी उपलब्ध हैं। यहां पहुंचने के बाद आप सबसे पहले सोमनाथ मंदिर के पास पहुचेंगे। उसके बाद आपको स्तंभेश्वर महादेव मंदिर के लिए बस या ऑटो रिक्शा आसानी से मिल जाएंगे। मंदिर के पास पार्किंग की सुविधा भी है। ऐसे में आप निजी वाहन से भी जा सकते हैं।
मंदिर से जुड़ी मान्यताएं
शिवपुराण के अनुसार तारकासुर नामक राक्षस की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे वरदान दिया था कि शिव के पुत्र के अलावा कोई भी उसका वध नहीं कर सकेगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पुत्र की आयु 6 दिन की होनी चाहिए। बता दें कि इस वरदान को मिलने के बाद तारकासुर राक्षस का आतंक और अधिक बढ़ गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तारकासुर राक्षस का वध करने के लिए श्वेत पर्वत के कुंड से 6 दिन के कार्तिकेय भगवान का जन्म हुआ। उन्होंने राक्षस का वध कर दिया लेकिन भक्त की मृत्यु से भगवान शिव दुखी हो गए। इस पर कार्तिकेय ने प्रायश्चित के उद्देश्य से उस स्थान पर शिवलिंग की स्थापना की जहां उन्होंने राक्षस का वध किया था। इस स्थान का नाम स्तंभेश्वर महादेव मंदिर पड़ा।
क्यों समुद्र में डूब जाता है स्तंभेश्वर महादेव मंदिर