Kedarnath Dham History: Kedarnath Dham History: केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई को खुल गए हैं। यहां पर भगवान शिव का प्रतीक शिवलिंग ऊर्जा का एक शक्तिशाली स्त्रोत माना गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं, केदारनाथ को जागृत महादेव के नाम से जानते हैं। आखिर क्यों आइए जानते हैं।
Kedarnath Dham History: भगवान शिव का प्रतीक शिवलिंग ऊर्जा का एक शक्तिशाली स्रोत माना जाता है। पूरे भारत में 12 ऐसे स्थान हैं जहां शिवलिंग को सबसे प्रमुख बताया गया है। इन्हें ज्योतिर्लिंग इसलिए कहा जाता है क्योंकि ज्योतिर्लिंग का मतलब होता है वो शिवलिंग जिसमें स्वयं भगवान शिव की ज्योति विद्यमान होती है। इन्हीं ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ के मंदिर में है। लेकिन केदारनाथ के इस शिवलिंग को जागृत महादेव भी कहा जाता है। केदारनाथ के शिवलिंग में ऐसा क्या रहस्य छिपा है जिसके कारण इसे जागृत महादेव कहा जाता है, आइए जानते हैं...
केदारनाथ का शिवलिंग
महाभारत काल से केदारनाथ धाम का इतिहास शुरू हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब पांडवों और कौरवों के बीच युद्ध हुए थे तो उस युद्ध में पांडवों की जीत हुई थी, लेकिन पांडवों पर अपने भाई की हत्या का पाप था और इस पाप से मुक्ति पाने के लिए पांडव भगवान शिव की तलाश में काशी से हिमालय पहुंचे। लेकिन भगवान शिव पांडवों से नाराज थे और पांडवों से मिलना नहीं चाहते थे। उन्होंने एक बैल (नंदी) का रूप धारण किया और हिमालय के गढ़वाल क्षेत्र में छिप गए।
दृढ़ निश्चयी पांडवों ने भगवान शिव का पीछा किया। जैसे ही शिव छिपने के लिए जमीन में गोता लगाने लगे, भीम ने बैल की पूंछ पकड़ ली। उनकी दृढ़ता और भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें माफ कर दिया और फिर पांच अलग-अलग स्थानों पर अपने दिव्य रूप में प्रकट हुए, जिन्हें अब पंच केदार के रूप में जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि बैल का कूबड़ केदारनाथ में प्रकट हुआ, जहां भगवान शिव के सम्मान में एक मंदिर बनाया गया।
केदारनाथ आधा ज्योतिर्लिंग है
मान्यता है कि केदारनाथ धाम में मौजूद ज्योतिर्लिंग आधा है। साथ ही जो नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर का शिवलिंग केदारनाथ के अर्धज्योतिर्लिंग को पूरा बनाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, केदारनाथ मंदिर का निर्माण पांडवों के बाद आदि गुरु शंकराचार्य ने करवाया था। उन्होंने मंदिर के पीछे समाधि भी ली थी। इसके बाद 10वीं शताब्दी में मालवा के राजा भोज ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया था।
केदारनाथ को जागृत महादेव क्यों कहते हैं
केदारनाथ को 'जागृत महादेव' क्यों कहते हैं इसके पीछे एक प्रचलित कथा है। कथा के अनुसार, बहुत समय पहले एक शिव भक्त केदारनाथ के दर्शन के लिए अपने घर से पैदल निकला। उसे केदारनाथ धाम पहुंचने में कई महीने लग गए और जब वह केदारनाथ पहुंचा तो केदारनाथ के कपाट 6 महीने के लिए बंद हो रहे थे। परंपरा के अनुसार यह कपाट 6 महीने बाद ही खुलते थे। भक्त ने पंडित जी से भगवान के दर्शन करने की बहुत विनती की लेकिन पंडित ने उसे 6 महीने बाद ही आने को कहा। मंदिर बंद होने से भक्त बहुत परेशान और निराश हुआ। उसके बाद वह रोने लगा।
पंडित ने उसे घर जाने को कहा लेकिन भक्त ने उसकी एक न सुनी और वहीं इंतजार करने लगा। रात होने पर उसे बहुत भूख और प्यास लगी। अचानक रात के अंधेरे में उसे एक संन्यासी बाबा दिखाई दिए। बाबा ने उससे अंधेरे में वहां बैठने का कारण पूछा तो उसने सारी बात बता दी। बाबा ने उससे पूछा- 'तुम्हें भूख लगी होगी।' भक्त के हां कहने पर बाबा ने उसे कुछ खाने को दिया। खाते ही उसे नींद आ गई। जब उसने आंखें खोली तो देखा कि उसे शिव के दर्शन अवश्य होंगे। कुछ देर बाद भक्त गहरी नींद में सो गया।
सुबह जब भक्त की आंख खुली तो उसने देखा कि पंडित जी केदारनाथ के द्वार खोलने की तैयारी कर रहे थे। भक्त ने आश्चर्य से पंडित से पूछा कि आपने तो कहा था कि द्वार 6 महीने बाद खुलेंगे लेकिन आप आज खोलने जा रहे हैं। पंडित जी ने उस भक्त को पहचान लिया और कहा कि द्वार 6 महीने बाद ही खोले जा रहे हैं। भक्त ने उसे सारी बात बता दी। पंडित जी समझ गए कि उस रात स्वयं शिव इस भक्त से मिलने आए थे। यही कारण है कि केदारनाथ को 'जागृत महादेव' कहा जाता है। केदारनाथ 6 महीने बंद रहता है और इन 6 महीनों के लिए वहां एक ज्योति इस तरह से जलाई जाती है कि वह बुझती नहीं है।