Char Dham Yatra 2025: चार धामों में से एक बद्रीनाथ धाम भी है। आज यानी रविवार को बद्रीनाथ धाम के कपाट सुबह छह बजे वैदिक मंत्रोच्चार और जय बद्रीविशाल के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। इस अवसर पर हजारों से अधिक श्रद्धालु कपाट खुलने के साक्षी बने।
Char Dham Yatra 2025: चार धामों में से एक बद्रीनाथ धाम भी है। आज यानी रविवार को बद्रीनाथ धाम के कपाट सुबह छह बजे वैदिक मंत्रोच्चार और जय बद्रीविशाल के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। इस अवसर पर हजारों से अधिक श्रद्धालु कपाट खुलने के साक्षी बने। यह उत्तराखंड के सबसे अधिक देखे जाने वाले मंदिरों में से एक है, जो मई से नवंबर तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। सर्दियों के दौरान मंदिर बंद रहता है और उस समय जोशीमठ के नरसिंह मंदिर में भगवान की पूजा की जाती है। बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारों धामों गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट खुल गए हैं और श्रद्धालु दर्शन का लाभ उठा रहे हैं।
चतुर्भुज रूप में दर्शन देते हैं भगवान
बद्रीनाथ धाम को भगवान विष्णु का निवास स्थान माना जाता है और यह अलकनंदा नदी के बाएं तट पर नर और नारायण नामक दो पर्वतों के बीच स्थित है। केदारनाथ धाम को भगवान शिव का विश्राम स्थल माना जाता है, इसी तरह बद्रीनाथ धाम को धरती का वैकुंठ धाम भी कहा जाता है। यहां भगवान नारायण 6 महीने सोते हैं और 6 महीने जागकर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। यहां भगवान विष्णु के शालिग्राम से बने चतुर्भुज स्वरूप की पूजा की जाती है।
मंदिर के दीपक का रहस्य
चार धामों में से एक बद्रीनाथ के बारे में एक कहावत बहुत प्रसिद्ध है, जो है 'जो जाए बद्री, वो न आए ओदरी', जिसका अर्थ है कि जो व्यक्ति एक बार बद्रीनाथ धाम में आकर पूजा कर लेता है, उसे दोबारा गर्भ में नहीं आना पड़ता। मंदिर के कपाट बंद होने से पहले एक दीपक जलाया जाता है और इस समय मंदिर के आसपास कोई नहीं रहता, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से यह दीपक 6 महीने तक जलता रहता है और भगवान बद्रीनाथ की पूजा की जाती है। कपाट खुलने के बाद भी दीपक जलता रहता है और मंदिर की साफ-सफाई वैसी ही मिलती है, जैसी छोड़ी गई थी।