facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  religious places  ganesh chaturthi festival ashtavinayak ganpati temple in maharashtra

Ganesh Chaturthi 2026: महाराष्ट्र के 8 अष्टविनायक गणपति मंदिर जानिए महत्व और अद्भुत कथा

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
निधि यादव
सार

Ashtavinayak Mandir In Maharashtra: जिस तरह बंगाल में माता दुर्गा, काली और पार्वती की भक्ति का प्रचलन है उसी तरह महाराष्ट्र में भगवान गणेश और महालक्ष्मी की भक्ति का प्रचलन है।

गणेश जी के मंदिर
Ashtavinayak Names: जिस तरह बंगाल में माता दुर्गा, काली और पार्वती की भक्ति का प्रचलन है उसी तरह महाराष्ट्र में भगवान गणेश और महालक्ष्मी की भक्ति का प्रचलन है। पूरे महाराष्ट्र में अन्य राज्यों की अपेक्षा गणेश उत्सव की सबसे ज्यादा धूम रहती है। यहां गणेशजी के अष्ट विनायक रूप के प्रसिद्ध मंदिर भी है। जिस प्रकार भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का विशेष महत्व है वैसे ही गणपति उपासना के लिए महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिरों का विशेष महत्व है। आओ जानते हैं कि कहां हैं ये मंदिर।

अष्ट विनायक के नाम:- वक्रतुंड, एकदंत, महोदर, गजानन, लंबोदर, विकट, विघ्नराज और धूम्रवर्ण।
 
अष्ट विनायक के नाम
1. वक्रतुंड
2. एकदंत
3. महोदर
4. गजानन
5. लंबोदर
6. विकट
7. विघ्नराज
8. धूम्रवर्ण


महाराष्ट्र में पुणे के समीप अष्टविनायक के आठ पवित्र मंदिर 20 से 110 किलोमीटर के क्षेत्र में स्थित हैं। इन मंदिरों का पौराणिक महत्व और इतिहास है। इनमें विराजित गणेश की प्रतिमाएं स्वयंभू मानी जाती हैं।  इन सभी मंदिरों के बारें में गणेश और मुद्गल पुराण में बताया गया।  ये मंदिर हैं- 

1. मयूरेश्वर या मोरेश्वर मंदिर, पुणे:

अष्टविनायक यात्रा की शुरुआत और समापन इसी मंदिर से मानी जाती है। यह मंदिर पुणे जिले के मोरगांव में स्थित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, सिंधु नामक राक्षस का वध करने के लिए भगवान गणेश ने मोर पर सवार होकर रूप धारण किया था, इसीलिए उन्हें मयूरेश्वर कहा जाता है। मंदिर का निर्माण काली शिलाओं से हुआ है और इसकी वास्तुकला बहुत ही आकर्षक है।

2. सिद्धिविनायक मंदिर, अहमदनगर:

यह मंदिर अहमदनगर जिले के सिद्धटेक में भीमा नदी के तट पर स्थित है। माना जाता है कि भगवान विष्णु ने मधु और कैटभ नामक असुरों से युद्ध करने से पूर्व इसी स्थान पर गणेश जी की साधना की थी और सिद्धियां प्राप्त की थीं। यह अष्टविनायक का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां गणपति जी की सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई है।

3. बल्लालेश्वर मंदिर, रायगढ़:

रायगढ़ जिले के पाली गांव में स्थित यह मंदिर अष्टविनायक का एकमात्र ऐसा धाम है, जिसका नाम गणेश जी के परम भक्त बल्लाल के नाम पर रखा गया है। कथा के अनुसार, बालक बल्लाल की निश्छल भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश जी ने उन्हें दर्शन दिए थे और वादा किया था कि वे इस स्थान पर बल्लाल के नाम से ही पूजे जाएंगे।  

4. वरदविनायक मंदिर, रायगढ़:

यह मंदिर रायगढ़ जिले के महाड़ (महद) गांव में स्थित है। 'वरदविनायक' का अर्थ है मनोकामनाएं पूरी करने वाले और वरदान देने वाले गणपति। इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां वर्ष 1892 से एक नंददीप (अखंड दीपक) लगातार जल रहा है। यहां आने वाले भक्त प्रतिमा के दर्शन के साथ-साथ स्वयं पूजा करने का सौभाग्य भी पाते हैं।  

5. चिंतामणी मंदिर, पुणे:

पुणे जिले के थेऊर गांव में स्थित इस मंदिर में विराजित गणेश जी भक्तों के सभी कष्टों और चिंताओं का हरण करते हैं, इसीलिए उन्हें चिंतामणि कहा जाता है। पौराणिक प्रसंग के अनुसार, गणेश जी ने ऋषि कपिला की अमूल्य चिंतामणि (मणि) को लालची राजा गणासुर से वापस प्राप्त करके ऋषि को सौंपा था। इस मंदिर का परिसर अत्यंत शांत और सुरम्य है।

6. गिरिजात्मज अष्टविनायक मंदिर, पुणे:

यह मंदिर पुणे जिले के जुन्नर क्षेत्र में लेण्याद्री पर्वत की गुफाओं में स्थित है। 'गिरिजात्मज' का अर्थ है माता पार्वती (गिरिजा) के पुत्र। मान्यता है कि माता पार्वती ने इसी पर्वत की गुफा में पुत्र प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या की थी और गणेश जी बालक रूप में प्रकट हुए थे। इस मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 307 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।

7. विघ्नेश्वर अष्टविनायक मंदिर, ओझर:

पुणे जिले के ओझर गांव में कुकड़ी नदी के तट पर स्थित विघ्नेश्वर मंदिर अष्टविनायक के प्रमुख धामों में से एक है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब विघ्नासुर नामक दैत्य ने ऋषि-मुनियों के यज्ञ और पूजा-पाठ में बाधा डालना शुरू किया, तब गणेश जी ने उसका दमन किया। पराजित होकर असुर ने गणेश जी से अपना नाम जोड़ने की प्रार्थना की, जिसके बाद वे विघ्नेश्वर कहलाए।

8. महागणपति मंदिर, रांजणगांव:

पुणे जिले के रांजणगांव में स्थित यह अष्टविनायक यात्रा का आठवां मंदिर है। मान्यता है कि त्रिपुरासुर का वध करने से पूर्व भगवान शिव ने इसी स्थान पर महागणपति का स्मरण और पूजन किया था। यह मंदिर गणपति जी के अत्यंत शक्तिशाली और विशाल रूप को समर्पित है, जिसे महागणपति कहा जाता है।

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel