
Bhukund Bhairavnath Kapat: केदारनाथ धाम के रक्षक क्षेत्रपाल भुकुंट भैरवनाथ के कपाट शनिवार यानी 3 मई को खुल गए हैं। भैरवनाथ के कपाट पूरे विधि-विधान और पूजा अर्चना के बाद खोले गए। वहीं केदारनाथ के कपाट 2 मई को खोले गए थे। धार्मिक और पौराणिक परंपरा के अनुसार, केदारनाथ के कपाट खुलने के तुरंत बाद आने वाले मंगलवार या शनिवार को भैरवनाथ के कपाट खोले जाते हैं। मान्यता है कि जो भी जातक भगवान केदारनाथ के दर्शन करने के बाद भुकुंट भैरव बाबा के दर्शन करते हैं। उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। साथ ही साथ उन्हें बाबा भैरव और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
बता दें कि बाबा केदारनाथ धाम में होने वाली आरतियों के साथ ही प्रसिद्ध संध्या आरती भी शुरू हो जाती है। इस आरती में देश-विदेश से भाग लेने के लिए श्रद्धालु आते हैं। कहा जाता है कि जहां भगवान भोलेनाथ के सिद्ध मंदिर होते हैं, वहां-वहां काल भैरव के भी मंदिर होते हैं। तो आज इस खबर में जानेंगे कि किस तरह से भुंकुंट भैरवनाथ के कपाट खोले गए और इनकी क्या-क्या मान्यता है।
बता दें कि भुंकुंट भैरवनाथ को केदारनाथ का रक्षक माना गया है। पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव भक्तों में सबसे शक्तिशाली भैरवनाथ को माना गया है। 3 मई दिन शनिवार को बाबा भैरवनाथ के कपाट खोलते समय केदारनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी बागेश लिंग और हक-हकूक धारियों और सभी पुजारियों की मौजूदगी में यज्ञ और हवन के साथ पूजा अर्चना की गई। बता दें कि भैरवनाथ के पश्चात पर देवता अवतरित हुए और यात्रा की कुशलता का सभी को आशीर्वाद भी दिया। बाबा केदारनाथ के दर्शन करने के बाद बाबा भुकुंट भैरवनाथ के दर्शन करना अनिवार्य है। जो भक्त बाबा केदारनाथ के दर्शन के बाद भैरवनाथ के दर्शन करते हैं तभी उनकी यात्रा पूरी मानी जाती है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भुकुंट भैरवनाथ बाबा को केदारनाथ धाम का पहला रावल माना गया है। साथ ही यह यहां के क्षेत्रपाल भी हैं। बाबा का मंदिर केदारनाथ धाम से आधा किमी की दूरी पर दक्षिण दिशा में स्थित है। बता दें कि इस स्थान पर बाबा भैरवनाथ की मूर्ति खुले में रखी गई है और शीतकाल के समय केदारनाथ मंदिर की सुरक्षा की जिम्मेदारी भुकुंट भैरवनाथ के पास ही होती है।
यह भी पढ़ें- Kedarnath Dham : केदारनाथ में भगवान शिव को चढ़ता है कौन-कौन सा भोग? जानिए पौराणिक मान्यता
यह भी पढ़ें- Kedarnath Aarti: केदारनाथ की आरती करने से क्या मिलते हैं लाभ, जानिए महत्व
धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।
WhatsApp Channel