facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  religious places  achleshwar mahadev temple here the color of shivling changes thrice achleshwar mahadev mandir mystery history

Achleshwar Mahadev Mandir: जानिए क्या है अचलेश्वर महादेव मंदिर का रहस्य और इतिहास

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
निधि
सार

Achleshwar Mahadev Mandir: दुनियाभर में भगवान शिव के कई मंदिर हैं। हर मंदिर की अपनी विशेषता है।

Achleshwar Mahadev Mandir:
Achleshwar Mahadev Mandir: माउंट आबू राजस्थान का इकलौता हिल स्टेशन है. यहां स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर बेहद प्रसिद्ध और प्राचीन है. इस मंदिर में भगवान शिव के अंगूठे की पूजा की जाती है. मंदिर में मौजूद शिवलिंग रंग बदलता है. 

माउंट आबू में भगवान शिव के अनेक मंदिर हैं, जिनमें अचलेश्वर महादेव मंदिर की खूब मान्यता है. कहा जाता है कि भोलेनाथ के अंगूठे के नीचे एक गड्ढा है जो कभी नहीं भरता है. यहां शिवलिंग के ऊपर चढ़ने वाला जल भी नजर नहीं आता है. श्रद्धालु यहां भगवान शिव के पैर के अंगूठे की पूजा करते हैं चलिए इस लेख में हम आपको बताएगें इस मंदिर का रहस्य।।

महादेव के दाहिने अंगूठे की पूजा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब अर्बुदा पर्वत पर स्थित नंदीवर्धन हिलने लगा, तो हिमालय में तपस्या कर रहे भगवान शंकर की तपस्या भंग हो गई। क्योंकि इस पर्वत पर भगवान शिव की प्रिय गाय कामधेनु और बैल नंदी भी मौजूद थे। पर्वत के साथ नंदी और गाय को बचाने के लिए भगवान शंकर ने हिमालय से ही अपना अंगूठा फैलाया और अर्बुदा पर्वत को स्थिर कर दिया।

Amarnath Yatra 2025: कब से शुरू हो रही है अमरनाथ यात्रा? जानें रजिस्ट्रेशन से लेकर अन्य कुछ महत्वपूर्ण बातें

रंग बदलता है शिवलिंग

श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी और आसपास के लोगों का कहना है कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग हर दिन 24 घंटे में दो बार रंग बदलता है। यह शिवलिंग कभी काले तो कभी केसरिया रंग में नजर आता है। साथ ही जलहरी का भी विशेष महत्व है। कहा जाता है कि अगर गर्मियों में बारिश नहीं हो रही हो, तो जलहरी में जल भरने से जल्द से जल्द बारिश होती है, यहां भक्त जो भी मांगते हैं, उन्हें मिल जाता है। मनोकामना पूरी होने पर भक्त मंदिर की जलहरी में जल और दूध भरते हैं।

रहस्यमय है अचलेश्वर महादेव मंदिर

धौलपुर से पांच किलोमीटर दूर चंबल नदी के किनारे बीहड़ों में स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर कितना पुराना है और इस शिवलिंग की स्थापना कब हुई, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। लेकिन श्रद्धालुओं की मानें तो यह करीब एक हजार साल पुराना बताया जाता है। शिवलिंग धरती में कितनी गहराई में है, इसका पता लगाने के लिए एक बार खुदाई भी की गई थी। कई दिनों तक खुदाई करने के बाद भी लोग इसके सिरे तक नहीं पहुंच पाए, तो खुदाई का काम रोक दिया गया। आज तक इस शिवलिंग की गहराई का अंदाजा नहीं लगाया जा सका है। प्राचीन काल में राजा-महाराजाओं ने भी शिवलिंग की खुदाई करवाई, लेकिन जब शिवलिंग का कोई सिरा नहीं मिला, तो खुदाई रोक दी गई।

Mangalnath Temple: दर्शन मात्र से दूर हो जाता है मंगल दोष, जानिए मंगलनाथ मंदिर का रहस्य

बेहतरीन शिल्पकला

इस मंदिर की शिल्पकला अद्भुत है। इस मंदिर से जुड़ी एक प्रचलित कथा यह भी है कि जब राजा यहां गद्दी पर बैठते थे तो धर्मकांटा के नीचे अचलेश्वर महादेव से आशीर्वाद लेकर प्रजा के साथ न्याय करने की शपथ लेते थे। मंदिर परिसर में द्वारकाधीश मंदिर भी बना हुआ है। गर्भगृह के बाहर वराह, नरसिंह, वामन, कच्छप, मत्स्य, कृष्ण, राम, परशुराम, बुद्ध और कल्कि अवतार की काले पत्थर की भव्य मूर्तियां हैं।

यह भी पढ़ें:- 

Rakshas Ki Utpatti: कैसे हुई राक्षसों की उत्पत्ति, जानिए कथा

Siddheshwar Dham: महाभारत और सती के अग्निकुंड से जुड़ी है सिद्धेश्वर धाम की कहानी

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel