Rakshas Ki Utpatti: हिंदू धर्म की कई पौराणिक कथाओं में कई भयानक राक्षसों का जिक्र मिलता है लेकिन देवताओं की तरह उनका उद्देश्य पता नहीं चलता.
Rakshas Ki Utpatti: हिंदू धर्म की कई पौराणिक कथाओं में कई भयानक राक्षसों का जिक्र मिलता है लेकिन देवताओं की तरह उनका उद्देश्य पता नहीं चलता. उनके बारे में सिर्फ डरावनी बातें ही लिखी गई हैं. ऐसे में कई बार मन में सवाल आता है कि क्या राक्षस हमेशा से बुरे थे? आखिर इन राक्षसों की उत्पत्ति कैसे, कहां और क्यों हुई? आइए विस्तार से जानते हैं....
पौराणिक कथाओं में राक्षस हमेशा से ही बुराई के प्रतीक रहे हैं. न सिर्फ उनके कार्यों को घिनौना दिखाया गया है बल्कि उनका स्वरूप भी भयानक बताया गया है. लेकिन मन में सवाल आता है कि आखिर भगवान ने ऐसे भयानक राक्षसों को क्यों बनाया जिनका काम ही बुराई फैलाना था. क्या राक्षस वाकई बुरे थे या किसी कारण से बाद में उनका स्वभाव ऐसा हो गया?
राक्षसों का जन्म (Rakshaso Ka Janm)
पुराणों में राक्षसों के जन्म का वर्णन किया गया है. इसके अनुसार सप्तऋषि कश्यप की 13 पत्नियां थीं. ऋषि कश्यप की पत्नी अदिति ने 12 आदित्यों को जन्म दिया, जिन्हें देवता कहा गया, जबकि दिति ने 2 पुत्रों हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप को जन्म दिया. दिति के पुत्र होने के कारण इन्हें राक्षस कहा गया।
राक्षसों की उत्पत्ति पृथ्वी पर प्राणियों की रक्षा के लिए हुई( Kis Liye Hui Thi Rakshaso Ki Utpatti)
वेदों और पुराणों के अनुसार जब सृष्टि की रचना हुई, तब पृथ्वी पर 3 प्रकार के प्राणी रहते थे, 'भू', भुव और स्व। इसमें 'भू' का अर्थ है पृथ्वी पर रहने वाले, 'स्व' का अर्थ है आकाश में रहने वाले और 'भुव' का अर्थ है पृथ्वी और आकाश के बीच रहने वाले। जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की, तो उन्होंने सभी हिंसक-अहिंसक प्राणियों और मनुष्यों को पृथ्वी पर रहने के लिए भेजा। देवताओं को आकाश में रहने का आदेश दिया और राक्षसों को पृथ्वी पर प्राणियों और देवताओं की रक्षा के लिए आकाश और जमीन के बीच रहने के लिए भेजा। रक्षा करना उनका दायित्व था, इसलिए उन्हें राक्षस कहा गया। ऋग्वेद में राक्षस शब्द 105 बार आया है और वह भी अच्छे अर्थों में। पहले राक्षस पृथ्वी और आकाश में रहने वाले प्राणियों की रक्षा करते थे, लेकिन धीरे-धीरे इन राक्षसों को अपनी शक्ति और ताकत का अहंकार होने लगा। जिसके कारण वे देवताओं और प्राणियों को परेशान करने लगे। उनकी इस प्रवृत्ति के कारण ही वे आगे चलकर राक्षस या दानव कहलाए।
क्या राक्षस कुरूप होते हैं?( Kya Rakshas Kuroop Hote Hai )
राक्षसों को बहुत ही डरावना बताया गया है। लेकिन वाल्मीकि रामायण में रावण की सुंदरता का जो वर्णन किया गया है, उससे पता चलता है कि राक्षस भी आकर्षक और सुंदर दिखते थे। वाल्मीकि रामायण में लिखते हैं कि जब हनुमान भगवान श्री राम का संदेश लेकर लंका पहुंचते हैं, तो रावण को पहली बार देखते ही उसकी सुंदरता पर मोहित हो जाते हैं। वाल्मीकि लिखते हैं - 'अहो रूपमहो धैर्यमहो सत्वमहो धुति:।
अहो राक्षस राजस्व सर्व लक्षण युक्तता'।
अर्थात् रावण को देखकर हनुमान कहते हैं, 'ओह! इस राक्षसराज का रूप कैसा अद्भुत है! इसमें कैसा अद्वितीय धैर्य, कैसी अतुलनीय शक्ति और कैसा अद्भुत तेज है! यह कितने आश्चर्य की बात है कि यह सभी राजसी विशेषताओं से संपन्न है!'