Rahu-Ketu Kavach: ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु को छाया ग्रह माना जाता है, जिनका कुंडली पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ये दोनों ग्रह अशुभ स्थिति में होने पर जीवन में कई समस्याएं जैसे आर्थिक तंगी, मानसिक अशांति, स्वास्थ्य समस्याएं, शत्रु बाधा और कालसर्प दोष उत्पन्न कर सकते हैं। राहु-केतु कवच एक शक्तिशाली वैदिक स्तोत्र है, जिसके नियमित पाठ से इन ग्रहों के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिलती है और सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य व सफलता प्राप्त होती है। यह कवच विशेष रूप से शनिवार को पढ़ने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह दिन राहु-केतु की पूजा के लिए शुभ माना जाता है।
राहु कवच
ॐ अस्य श्रीराहुकवचस्तोत्रमंत्रस्य चंद्रमा ऋषिः।
अनुष्टुप् छंदः। राहुर्देवता। रां बीजं। नमः शक्तिः।
स्वाहा कीलकम्। राहुप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः।
प्रणमामि सदा राहुं शूर्पाकारं किरीटिनम्।
सैंहिकेयं करालास्यं लोकानामभयप्रदम्।
नीलांबरः शिरः पातु ललाटं लोकवंदितः।
चक्षुषी पातु मे राहुः श्रोत्रे त्वर्धशरीरवान्।
नासिकां मे धूम्रवर्णः शूलपाणिर्मुखं मम।
जिह्वां मे सिंहिकासूनुः कण्ठं मे कठिनांघ्रिकः।
भुजंगेशो भुजौ पातु नीलमाल्यांबरः करौ।
पातु वक्षःस्थलं मन्त्री पातु कुक्षिं विधुंतुदः।
कटिं मे विकटः पातु ऊरु मे सुरपूजितः।
स्वर्भानुर्जानुनी पातु जंघे मे पातु जाड्यहा।
गुल्फौ ग्रहपतिः पातु पादौ मे भीषणाकृतिः।
सर्वं च पातु मे राहुः नीलचंदनभूषणः।
राहोरिदं कवचमृद्धिदं वस्तुदं यो।
भक्त्या पठति सततं नियतः शुचिः सन्।
प्राप्नोति कीर्तिमतुलां श्रियमृद्धिमायु
रारोग्यमात्मविजयं च हि तत्प्रसादात्।
केतु कवच