Radha Ashtami Vrat Vidhi: वैष्णव परंपरा को मानने वालों के लिए भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि जो श्री कृष्ण जन्माष्टमी के बाद आती है का इंतज़ार पूरे साल रहता है|
Radha Ashtami Vrat Vidhi: वैष्णव परंपरा को मानने वालों के लिए, भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि जो श्री कृष्ण जन्माष्टमी के बाद आती है का इंतज़ार पूरे साल रहता है| ऐसा इसलिए है क्योंकि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण की प्रिय संगिनी राधा रानी का प्राकट्य उत्सव मनाया जाता है। इस साल, यह पवित्र त्योहार 31 अगस्त 2025 को, जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद मनाया जाएगा। राधा अष्टमी का व्रत रखने और पूजा-अर्चना करने से राधा और कृष्ण दोनों का आशीर्वाद मिलता है; आइए इस अवसर की पूजा विधि, शुभ समय और धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानें।
2026 में राधा अष्टमी कब है?
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, राधा अष्टमी का त्योहार 19 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर 1:00 बजे शुरू होगी और 19 सितंबर को दोपहर 3:26 बजे समाप्त होगी। राधा रानी के प्राकट्य उत्सव के लिए 'मध्याह्न काल' विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
पूजा का शुभ समय
राधा अष्टमी पर पूजा का शुभ समय सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक है। इस दौरान भक्त निर्धारित रीति-रिवाजों के अनुसार राधा रानी और श्री कृष्ण की पूजा कर सकते हैं।
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राधा अष्टमी व्रत की विधि
पुराणों में बताए गए राधा अष्टमी व्रत के आध्यात्मिक पुण्य को प्राप्त करने के लिए इस दिन सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। स्नान, ध्यान और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद, सबसे पहले राधा जी का ध्यान करना चाहिए। इसके बाद, निर्धारित नियमों के अनुसार व्रत रखने का संकल्प लें। फिर दोपहर के शुभ समय में ईशान कोण में बैठकर विधि-विधान से राधा जी की पूजा करें। पीले कपड़े से ढकी चौकी पर राधा जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। इसके सामने मिट्टी या तांबे का कलश स्थापित करें और उसकी पूजा करें। इसके बाद षोडशोपचार विधि से राधा रानी की पूजा करें। अगर ऐसा करना संभव न हो तो बस जो भी फल, फूल, धूप, दीपक और भोग उपलब्ध हों उन्हें श्रद्धा के साथ राधा जी को अर्पित करें और उनके स्तोत्र और चालीसा का पाठ करें। राधा रानी के साथ-साथ भगवान श्री कृष्ण की पूजा करना न भूलें। राधा अष्टमी के दिन किसी विवाहित महिला को भोजन,धन और कपड़े दान करना या भोजन कराना बहुत पुण्य का काम माना जाता है।
राधा अष्टमी व्रत का महत्व
हिंदू मान्यताओं के अनुसार राधा अष्टमी पर श्रद्धा और विश्वास के साथ राधा रानी और श्री कृष्ण की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और उनकी इच्छाएं पूरी होती हैं। माना जाता है कि इस व्रत के शुभ फल से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। साथ ही जो अविवाहित महिलाएं यह व्रत रखती हैं उन्हें अपनी पसंद का जीवनसाथी मिलता है।
राधा अष्टमी का धार्मिक महत्व
धार्मिक परंपराओं में राधा रानी को प्रेम करुणा और भक्ति का स्वरूप माना जाता है। कहा जाता है कि राधा के नाम का जाप करने और श्रद्धापूर्वक उनकी पूजा करने से भक्त को भगवान श्री कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। राधा अष्टमी पर विशेष परंपराएं निभाई जाती हैं, जिनमें राधा-कृष्ण की पूजा राधा रानी का अभिषेक और श्रृंगार तथा भजन-कीर्तन शामिल हैं। माना जाता है कि इस दिन राधा रानी की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है। भक्त उनसे सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रार्थना करते हैं। यह त्योहार विशेष रूप से बरसाना और वृंदावन में बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह भी पढ़ें-
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)