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Pitru Paksha 2025: किसने किया था पितृ पक्ष की शुरुआत, जानें श्राद्ध में अग्नि का महत्व

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Pitru Paksha 2025: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष में पितरों का आशीर्वाद लिया जाता है, उन्हें याद किया जाता है और भोजन कराकर उनकी आत्मा को तृप्त किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष में आपके पूर्वज पितृलोक से धरती पर आते हैं।

Pitru Paksha 2025
Pitru Paksha 2025: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष में पितरों का आशीर्वाद लिया जाता है, उन्हें याद किया जाता है और भोजन कराकर उनकी आत्मा को तृप्त किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष में आपके पूर्वज पितृलोक से धरती पर आते हैं। पितृ पक्ष का वर्णन कई पुराणों और शास्त्रों में मिलता है। गीता के अध्याय 7 में कहा गया है कि जो पितरों की पूजा करते हैं वे पितरों के पास जाते हैं, जो देवताओं की पूजा करते हैं वे देवताओं के पास जाते हैं और जो परमात्मा की पूजा करते हैं वे परमात्मा के पास जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शास्त्रों में पितृ और पितृलोक के बारे में जानकारी दी गई है, लेकिन पितृ पक्ष में सबसे पहले श्राद्ध करना किसने शुरू किया होगा। आइए इस खबर में विस्तार से जानते हैं।

सबसे पहले पितृ पक्ष की शुरुआत किसने की

पितृ पक्ष यानी श्राद्ध का सबसे पहले उल्लेख महाभारत काल में मिलता है, जहां भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को श्राद्ध के बारे में कई बातें बताई थीं। उन्होंने बताया कि महर्षि निमि को श्राद्ध का उपदेश देने वाले पहले व्यक्ति महान तपस्वी अत्रि थे। उस उपदेश को सुनकर महर्षि निमि ने श्राद्ध करना शुरू किया और उन्हें देखकर अन्य ऋषिगण भी श्राद्ध करने लगे, जिससे उनके सभी पितर निरंतर श्राद्ध का भोजन पाकर तृप्त होने लगे।

श्राद्ध में अग्नि का महत्व

ऋग्वेद के अनुसार अग्नि मृतकों को पितृलोक ले जाने में सहायता करती है। श्राद्ध के दौरान वंशजों के दान और भोजन को पितरों तक पहुंचाकर मृतात्मा को भटकने से बचाने के लिए अग्नि से प्रार्थना की जाती है। ऐतरेय ब्राह्मण में अग्नि को उस रस्सी के रूप में उल्लेखित किया गया है जिसकी सहायता से मनुष्य स्वर्ग तक पहुंचता है। वहीं, पुराणों के अनुसार जब देवताओं और पितरों को पितृ पक्ष या श्राद्ध से प्राप्त भोजन से अपच हो गया तो वे इस समस्या से मुक्ति पाने के लिए ब्रह्माजी के पास गए। 

तब ब्रह्माजी ने कहा कि अग्निदेव ही उनका कल्याण करेंगे क्योंकि भोजन के पाचन के लिए अग्नि तत्व बहुत महत्वपूर्ण है। जब वे अग्निदेव के पास गए तो अग्निदेव ने देवताओं और पितरों से कहा कि अब से हम सभी श्राद्ध के दौरान एक साथ भोजन करेंगे। मेरे पास रहने से तुम्हारा अजीर्ण भी दूर हो जाएगा। इसलिए तब से श्राद्ध का भोजन अग्निदेव को और फिर पितरों को दिया जाता है। श्राद्ध के समय अग्निदेव को देखकर राक्षस और ब्रह्म राक्षस भी भोजन को दूषित नहीं कर पाते और यदि ऐसा हो भी जाए तो अग्नि सब कुछ शुद्ध कर देते हैं।

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