Vaishakh Purnima 2025: हिंदू धर्म में पूर्णिमा का बहुत महत्व है. पूर्णिमा 12 मई, सोमवार को पड़ रही है. इसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं. क्योंकि इस दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था. इसे पीपल पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. भगवान बुद्ध की जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है. इस दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रकाश उत्सव मनाया जाता है. पीपल के पेड़ पर विभिन्न देवी-देवताओं का वास होता है. इसलिए वैशाख पूर्णिमा के दिन पीपल के पेड़ का विशेष महत्व होता है.
पीपल पूर्णिमा कब है, इसका क्या महत्व है
पंचांग के अनुसार 12 मई, सोमवार को वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। मान्यता के अनुसार इस दिन पीपल पूर्णिमा मनाई जाएगी। साथ ही इस दिन व्रत भी रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन पीपल की पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्योदय के बाद पीपल के पेड़ में देवी लक्ष्मी का वास होता है। यही वजह है कि सूर्योदय के बाद पीपल की पूजा की जाती है। पीपल के पेड़ को काटना या नष्ट करना ब्रह्महत्या के बराबर माना जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से पीपल सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देने वाला पेड़ है। पीपल के पेड़ को जल देने के बाद उसकी परिक्रमा की जाती है। क्योंकि जल देने के तुरंत बाद पीपल सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देता है।
पीपल के पेड़ पर ब्रह्मा, विष्णु, महेश, ये तीनों देवता निवास करते हैं. पौराणिक मान्यता के अनुसार पीपल के पेड़ पर हर समय देवी लक्ष्मी का वास होता है. इसलिए वैशाख पूर्णिमा के दिन पीपल की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है.
करें ये उपाय
- पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. जल में काले तिल मिलाकर पीपल के पेड़ पर चढ़ाएं।
- पीपल के पेड़ की पूजा करने से कुंडली दोष दूर होता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में शनि ग्रह हो उसे पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए, जिससे शनिदेव का प्रभाव कम होता है। और उन्नति के अवसर मिलते हैं।
- पीपल के पेड़ पर त्रिदेवों का वास होने से पीपल के पेड़ का महत्व बढ़ जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार सूर्योदय के बाद लक्ष्मी पीपल के पेड़ पर निवास करती हैं। इसलिए स्नान करने के बाद पीपल के पेड़ पर दूध और जल चढ़ाने से मनोवांछित फल मिलता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार पीपल पूर्णिमा के दिन कुछ शुभ काम भी किए जाते हैं। यदि किसी कन्या की कुंडली में वैधव्य योग हो तो पहले उसका विवाह किसी शुभ मुहूर्त में पीपल के पेड़ या घड़े से कराकर, फिर दीर्घायु वर से विवाह कराने से कन्या का वैधव्य योग समाप्त हो जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान विष्णु ग्रहों के अशुभ प्रभावों को अवशोषित कर लेते हैं और कन्या को सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
इन चीजों का करें दान
वैशाख पूर्णिमा के दिन अन्न, जल, फल, वस्त्र, चावल और दूध का दान करें। इसके अलावा जूते और छाता दान करना भी पुण्यदायी होता है। कहा जाता है कि वैशाख पूर्णिमा के दिन किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को ये चीजें दान करने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। घर का भंडार धन-धान्य से भरा रहता है।
वैशाख पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें। ऐसा करने से भाग्य आपका साथ देता है और घर में कभी दरिद्रता नहीं आती।
चंद्रमा को अर्घ्य दें
पूर्णिमा की रात को कच्चे दूध में चीनी मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इस उपाय को करने से आपको सभी तरह के दोषों से मुक्ति मिलेगी। साथ ही घर में होने वाले बेवजह के वाद-विवाद और झगड़े भी खत्म होंगे। घर में खुशियां बनी रहेंगी।