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Mahakumbh 2025 : कब है महाकुंभ का आखिरी स्नान, इस दिन कैसे करें देवों को प्रसन्न, जानें विधि

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Mahakumbh 2025 : महाकुंभ की शुरुआत 13 जनवरी से हो चुकी है अब धीरे-धीरे समापन की ओर बढ़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाकुंभ में स्नान और दान का बहुत ही ज्यादा महत्व बताया गया है।

Mahakumbh 2025
Mahakumbh 2025 : महाकुंभ की शुरुआत 13 जनवरी से हो चुकी है अब धीरे-धीरे समापन की ओर बढ़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाकुंभ में स्नान और दान का बहुत ही ज्यादा महत्व बताया गया है। बता दें कि जो जातक महाकुंभ में स्नान-दान करता है उसके जीवन में सुख-शांति और उन्नति आती है। महाकुंभ के भव्य समागम में अब तक लगभग कुल 57-58 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं। साथ ही साथ ये आकंड़ा अभी लगातार बढ़ रहा है। 

महाकुंभ का समापन 26 फरवरी को होगा। इस दिन महाकुंभ का आखिरी स्नान है। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाकुंभ के दौरान स्नान करने से व्यक्ति के जीवन मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। तो आज इस खबर में जानेंगे संगम के जल में स्नान के दिन कैसे देवता को प्रसन्न कर सकते हैं। आइए पूजा विधि के बारे में जानते हैं।

जल के देवता है वरुण देव

हिंदू धर्म में हर चीज किसी न किसी देवता से जुड़ी होती है। ऐसे में वरुण देव को जल का देवता और समुद्र का स्वामी माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार वरुण देव धरती पर मौजूद सभी जल स्रोतों की पवित्रता बनाए रखते हैं। वरुण देव की कृपा से ही व्यक्ति को स्नान के बाद मानसिक और शारीरिक शांति मिलती है, जिसके चलते महाकुंभ के पवित्र स्नान से पहले वरुण देव की पूजा करना बहुत जरूरी माना जाता है। वहीं शास्त्रों में मां गंगा को मोक्ष दायनी कहा गया है और भगवान विष्णु ने जल में ही मत्स्य अवतार लिया था। 

इस पूजा विधि से करें उन्हें प्रसन्न

महाकुंभ में स्नान से पहले श्रद्धालुओं को गंगा जल लेकर वरुण देव का ध्यान करना चाहिए। फिर मां गंगा का ध्यान करना चाहिए और इसके बाद भगवान विष्णु और महादेव का भी ध्यान करना चाहिए। ध्यान करने के लिए व्यक्ति को स्नान से पहले तांबे के बर्तन में जल लेकर उसमें फूल, चंदन और तुलसी के पत्ते डालकर वरुण देव, मां गंगा, भगवान विष्णु और भोलेनाथ का ध्यान करना चाहिए। ध्यान के दौरान ओम वरुणाय नम:, गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती, नर्मदे सिंधु कावेरी जले अस्मिन सन्निधिम कुरु.., ओम नमो नारायणाय नम: और ओम नम: शिवाय का जाप करना चाहिए।

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