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Mahashivrati 2025: महाशिवरात्रि पर 2 महत्वपूर्ण समय में करेंगे पूजा तो शिवजी होंगे प्रसन्न

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
निधि
सार

महाशिवरात्रि पर त्रिग्रही योग के साथ ही छत्र योग रहेगा। यानी चतुर्थ से दशम भाव के बीच सभी ग्रह रहेंगे। इस दिन चतुर्दशी तिथि के योग में बुधवार रहेगा।

Mahashivrati 2025
Mahashivrati 2025: फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। 26 फरवरी 2025 बुधवार के दिन महाशिवरात्रि का पर्व रहेगा। इस दिन सूर्य, बुध और शनि का विशेष त्रिग्रही योग बनेगा। इस योग में बुधादित्य का योग सफलता और समृद्धि का प्रतीक है। इसी के साथ इस दिन श्रवण नक्षत्र में अमृत काल पूजा का समय सुबह 07:28 से 09:00 बजे तक रहेगा परंतु यहां जानिए शास्त्रों के अनुसार शिव पूजा के 2 महत्वपूर्ण समय।

फाल्गुनकृष्णचतुर्दश्यामादिदेवो महानिशि।
शिवलिंगतयोद्भूत: कोटिसूर्यसमप्रभ:॥


ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि में चंदमा सूर्य के नजदीक होता है। उसी समय जीवनरूपी चंद्रमा का शिवरूपी सूर्य के साथ योग-मिलन होता है। इसलिए इस चतुर्दशी को शिवपूजा करने का विधान है। प्रलय की बेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से भस्म कर देते हैं। इसलिए इसे महाशिवरात्रि या जलरात्रि भी कहा गया है। इस दिन भगवान शंकर की शादी भी हुई थी। इसलिए रात में शंकर की बारात निकाली जाती है। रात में पूजा कर फलाहार किया जाता है। अगले दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेल पत्र का हवन करके व्रत समाप्त किया जाता है।

1. पहला समय प्रदोष काल: शास्त्रानुसार प्रदोषकाल सूर्यास्त से 2 घड़ी (48 मिनट) तक रहता है। कुछ विद्वान मतांतर से इसे सूर्यास्त से 2 घड़ी पूर्व व सूर्यास्त से 2 घड़ी पश्चात् तक भी मान्यता देते हैं। इसी के साथ संधिकाल प्रारंभ होता है। 

सूर्यास्त से दिनअस्त तक का समय भगवान 'शिव' का समय होता है जबकि वे अपने तीसरे नेत्र से त्रिलोक्य (तीनों लोक) को देख रहे होते हैं और वे अपने नंदी गणों के साथ भ्रमण कर रहे होते हैं। इस काल में भूतों के स्वामी भगवान रुद्र का जो अपराधी होता है कठोर दंड पाता है। यदि आपको किसी अमंगल से बचना हो तो इस वक्त भोजन, पानी, संभोग, यात्रा, बहस और हर तरह की वार्तालाप करने की मनाही है। इस काल को धरधरी का काल कहते हैं जबकि राक्षसादि प्रेत योनि की आत्माएं सक्रिय रहती है। इस समय जो पिशाचों जैसा आचरण करते हैं, वे नरकगामी होते हैं।

2. दूसरा समय निशीथ काल क्या होता है:- निशीथ या निशिता काल को आमजन इसे मध्यरात्रि या अर्धरात्रि काल कहते हैं। यह समय 12 बजे के आसपास का होता है। साल के कुछ दिनों को छोड़कर जैसे दीपावली, 4 नवरात्रि, जन्माष्टमी, महाशिवरात्रि पर निशीथ काल महानिशीथ काल बनकर शुभ प्रभाव देता है जबकि अन्य समय में दूषित प्रभाव देता है।

दिल्ली टाइम के अनुसार निशीथ काल पूजा समय- मध्यरात्रि 12:09 से 12:59 के बीच।

महाशिवरात्रि पर त्रिग्रही योग के साथ ही छत्र योग रहेगा। यानी चतुर्थ से दशम भाव के बीच सभी ग्रह रहेंगे। इस दिन चतुर्दशी तिथि के योग में बुधवार रहेगा। तिथि शिवजी की और वार गणेशजी का है। इस दिन श्रवण नक्षत्र रहेगा। इस नक्षत्र के देवता भगवान विष्णु हैं। 

महाशिवरात्रि पर करें 4 शुभ कार्य: 

1. दान: भगवान शिव की पूजा के बाद यथाशक्ति ब्राह्मण या गरीबों को दान दक्षिणा दें। 
2. दीपक: सायंकाल के समय शिव मंदिर में दीया इस तरह जलाएं कि वह रातभर जलता रहे। इससे अपार धन-संपत्ति तथा ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी।
3. पाठ: इस दिन शिव चालीसा, शिव स्तुति, रुद्राष्टक, शिव तांडव स्तोत्र आदि का पाठ करना चाहिए
4. अभिषेक: इस दिन शिव का जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक और रुद्राभिषेक करना चाहिए।

रुद्राभिषेक का महत्व एवं लाभ:-

1. रुतम्-दु:खम्, द्रावयति-नाशयतीतिरुद्र: यानी कि रुद्र भगवान सभी दु:खों को नष्ट कर देते हैं।
2. रुद्राभिषेक से हमारे द्वारा किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं। 
3. रुद्रार्चन और रुद्राभिषेक से हमारी कुंडली से पातक कर्म एवं महापातक भी जलकर भस्म हो जाते हैं।
4. कालसर्प योग, गृहक्लेश, व्यापार में नुकसान, शिक्षा में रुकावट सभी कार्यों की बाधाओं को दूर करने के लिए रुद्राभिषेक करें।

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