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Lakshmi Panchami 2025: कल सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग में मनाया जाएगा लक्ष्मी पंचमी व्रत, जानिए शुभ मुहूर्त

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
निधि
सार

Lakshmi Panchami 2025 Date: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को लक्ष्मी पंचमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है।

Lakshmi Panchami 2025
Lakshmi Panchami 2025 Date: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को लक्ष्मी पंचमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। लक्ष्मी पंचमी (Lakshmi Purnima 2025) को इसलिए भी खास माना जाता है क्योंकि यह व्रत चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन पड़ता है. इसी वजह से लक्ष्मी पंचमी व्रत (Lakshmi Purnima Ka Vrat) को बेहद खास माना जाता है. इस वर्ष लक्ष्मी पंचमी 02 अप्रैल को मनाई जाएगी।  

लक्ष्मी पंचमी, जिसे श्री व्रतम के नाम से भी जाना जाता है, धन और समृद्धि की देवी देवी लक्ष्मी को समर्पित एक प्रमुख हिंदू त्योहार है। यह शुभ अवसर चैत्र के महीने में शुक्ल पक्ष के पांचवें दिन पड़ता है, जो आमतौर पर मार्च या अप्रैल में होता है। यह त्यौहार पूरे भारत में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, जिसमें भक्त देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने के लिए पूजा-अर्चना करते हैं, व्रत रखते हैं और व्रत कथा का पाठ करते हैं। 2025 में, लक्ष्मी पंचमी पूजा की तिथि और समय उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो अनुष्ठान और उपवास करने की योजना बना रहे हैं। इस लेख में हम आपको बताते है की लक्ष्मी पंचमी व्रत की तिथि और समय, व्रत कथा, पूजा प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करता है।

लक्ष्मी पंचमी तिथि (Laxmi Panchami 2025 Kab Hai)

2 अप्रैल 2025, बुधवार को लक्ष्मी पंचमी

पंचमी तिथि प्रारम्भ - 02 अप्रैल 2025 प्रातः 02:32 बजे

पंचमी तिथि समाप्त - 02 अप्रैल 2025 रात्रि 11:49 बजे

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लक्ष्मी पंचमी पूजा समय और शुभ योग  (Laxmi Panchami 2025 Shubh Muhurat Yog)

अभिजीत मुहूर्त

कोई नहीं

अमृत काल

प्रातः 06:39 बजे से प्रातः 08:06 बजे तक

प्रातः 04:04, अप्रैल 03 से प्रातः 05:33, अप्रैल 03 तक

सर्वार्थ सिद्धि योग

पूरे दिन

रवि योग

प्रातः 06:10 से प्रातः 08:49 तक

विजया मुहूर्त

दोपहर 02:30 बजे से 03:20 बजे तक

स्याहं संध्या

शाम 06:40 बजे से शाम 07:49 बजे तक

निशिता मुहूर्त

12:01 पूर्वाह्न, 03 अप्रैल से 12:47 पूर्वाह्न, 03 अप्रैल

ब्रह्म मुहूर्त

प्रातः 04:38 से प्रातः 05:24 तक

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लक्ष्मी पंचमी का महत्व (Lakshmi Panchami 2025 Significance)

माना जाता है कि शुक्ल पंचमी को कल्पादि तिथि कहा जाता है। आज से कल्प तिथि शुरू हो रही है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, एक साल में सात कल्प तिथि होती हैं। लक्ष्मी पंचमी के दिन पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इसके अलावा इस दिन मां लक्ष्मी की आरती, चालीसा और मंत्रों का जाप करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और आपकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

लक्ष्मी पूजा सामग्री (Laxmi Puja Samagri)

दिवाली की पूजा करते समय आपके पास लकड़ी की चौकी, लाल कपड़ा, लक्ष्मी पूजा सामग्री की मूर्ति, कुमकुम, हल्दी की गांठ, रोली, सुपारी, पान, लौंग, धूपबत्ती, अगरबत्ती, दीपक, ज्योति, माचिस, घी, गंगाजल होना चाहिए। पंचामृत, फूल, फल, कपूर, गेहूं, दूर्वा, जनेऊ, खील बताशे, चांदी के सिक्के और कलावा आदि होना चाहिए।

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श्री लक्ष्मी पूजा विधि (Laxmi Puja Vidhi)

इस दिन श्री लक्ष्मी पंचमी व्रत रखने वाले भक्तों को सूर्योदय से पहले उठकर मां लक्ष्मी पूजा से पहले पवित्र नदियों का जल डालकर स्नान करना चाहिए।
शुद्ध स्वच्छ वस्त्र पहनें। अपने पूजा स्थल को भी साफ करें।
एक चौकी पर लाल रेशमी कपड़ा बिछाएं।
अब देवी लक्ष्मी की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं और चौकी पर स्थापित करें। अगर मूर्ति न हो तो फोटो रखें।
अब पूजा में चंदन, पुष्प, अक्षत, दूर्वा, लाल कमल का फूल, कपास, सुपारी, श्रीफल, पांच प्रकार के फल, गन्ना, मिठाई आदि चढ़ाएं।
यदि आप यह सब सामग्री नहीं ला सकते हैं तो देवी लक्ष्मी की पूजा करें और उन्हें मिश्री का भोग लगाएं।
इसके बाद वहीं बैठकर 11 श्री सूक्त का पाठ करें।
शुद्ध घी के दीपक से लक्ष्मी जी की आरती करें। ध्यान रहे कि पूजा के दौरान सुगंधित धूप का प्रयोग करें। पूरे दिन उपवास रखें और अन्न का सेवन न करें।
यदि आवश्यक हो तो फल और दूध ले सकते हैं।
लक्ष्मी पंचमी व्रत के दिन भक्त को देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए श्री सूक्त, ललिता सहस्त्रनाम, कनकधारा स्तोत्र और लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
ललिता पंचमी के दिन की गई लक्ष्मी साधना अक्षय फल देती है। इस दिन की गई पूजा हमेशा जारी रहती है।

लक्ष्मी पंचमी व्रत कथा (Lakshmi Panchami 2025 Vrat Katha)

एक बार देवी लक्ष्मी देवताओं से नाराज हो गईं। देवी लक्ष्मी के चले जाने से देवता धन-संपत्ति से रहित हो गए। तब देवराज इंद्र ने देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप किया। उनका अनुसरण करते हुए अन्य देवताओं ने भी देवी लक्ष्मी का व्रत रखा। देवताओं की तरह दानवों ने भी देवी लक्ष्मी की पूजा की। मां ने अपने भक्तों की पुकार सुनी और व्रत पूरा होने पर प्रकट हुईं, देवताओं को फिर से धन-संपत्ति का आशीर्वाद मिला। मान्यता है कि यह तिथि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी। यही कारण था कि इस तिथि को लक्ष्मी पंचमी के व्रत के रूप में मनाया जाने लगा।

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