Kharmas Kya Hai: खरमास वह मास है जब सूर्य देव धनु राशि में गोचर करते हैं। ज्योतिष शास्त्र में इसे “मलिन मास” या “खर मास” कहा जाता है, क्योंकि इस काल में सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं।
Kharmas 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष 16 दिसंबर 2025, मंगलवार से खरमास शुरू हो रहा है, जो 14 जनवरी 2026 तक चलेगा। इस एक महीने के विशेष काल में सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं और इसे खरमास या धनु संक्रांति का मलमास कहा जाता है। इस दौरान शुभ कार्यों पर पूर्ण रूप से रोक लग जाती है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि आखिर क्या होता है खरमास और खरमास क्यों और कब लगता है।
खरमास क्या होता है?
खरमास वह मास है जब सूर्य देव धनु राशि में गोचर करते हैं। ज्योतिष शास्त्र में इसे “मलिन मास” या “खर मास” कहा जाता है, क्योंकि इस काल में सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं और इनकी शक्ति अपेक्षाकृत कम हो जाती है। संस्कृत में “खर” शब्द का अर्थ गधा भी होता है, इसलिए इसे खर (गधे) के नाम वाला मास भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस मास में सूर्य देव थककर गधे की पीठ पर सवार होकर चलते हैं, इसलिए यह समय शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है।
इस दौरान सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं और उनकी शक्ति कम हो जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार सूर्य का सारथी अरुण इस मास में थक जाता है, इसलिए सूर्य देव अपने सात घोड़ों वाले रथ की जगह गधे पर सवार होकर धीरे-धीरे यात्रा करते हैं। संस्कृत में गधे को “खर” कहते हैं, इसी से इस मास का नाम खरमास पड़ा। धनु राशि का स्वामी बृहस्पति है और सूर्य उनके पुत्र होने के कारण इस राशि में कमजोर पड़ जाते हैं।
खरमास क्यों लगता है?
सूर्य हर राशि में लगभग एक महीना रहते हैं। जब वे धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो यह काल खरमास कहलाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से दिसंबर-जनवरी में सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर मुड़ता है, जिससे दिन छोटे और रातें लंबी होती हैं तथा सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं। पौराणिक मान्यता के साथ-साथ यह मौसमी परिवर्तन भी खरमास को अशुभ कार्यों के लिए वर्जित बनाने का कारण है।
खरमास में कौन-से कार्य पूरी तरह वर्जित हैं?
इस एक महीने में कोई भी नया शुभ या मांगलिक कार्य करना सख्त मना है। विवाह, सगाई, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश, नया घर-दुकान-व्यवसाय शुरू करना, वाहन खरीदना, भूमि पूजन, नामकरण, अन्नप्राशन, विद्यारंभ, देव प्रतिष्ठा, बड़े निवेश जैसे सभी कार्य स्थगित कर दिए जाते हैं। मान्यता है कि इस दौरान शुरू किए कामों में बाधाएं आती हैं और वे सफल नहीं होते।
खरमास में क्या करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है?
हालांकि, शुभ कार्य बंद रहते हैं, लेकिन यह काल धार्मिक और पुण्य कार्यों के लिए बेहद उत्तम होता है। रोज सुबह सूर्य देव को अर्घ्य देना, आदित्य हृदय स्तोत्र और गायत्री मंत्र का जाप, गौ-दान, अन्न-दान, ब्राह्मण भोजन, गंगा स्नान या किसी पवित्र नदी में स्नान, भगवान विष्णु और सूर्य नारायण की पूजा, पीपल-तुलसी और केले के पेड़ की परिक्रमा, हनुमान जी व शनि देव के दर्शन करना अत्यंत फलदायी माने जाते हैं।
सूर्यदेव की उपासना का महीना है खरमास
इस वर्ष खरमास 16 दिसंबर 2025 से 14 जनवरी 2026 तक रहेगा। उत्तर भारत के लगभग सभी राज्यों में खरमास का पूर्ण पालन होता है, जबकि बंगाल, ओडिशा जैसे पूर्वी राज्यों में मलमास का अर्थ अलग है और दक्षिण भारत में इसका प्रचलन बहुत कम है। खरमास प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने और सूर्य देव की उपासना का महीना है। इस दौरान धैर्य रखकर पूजा-पाठ और दान-पुण्य में समय लगाएं तो यह काल आपके लिए अत्यंत कल्याणकारी सिद्ध होगा। 15 जनवरी 2026 से फिर शुभ मुहूर्तों की बहार आ जाएगी।
(इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)