विज्ञापन
Home  dharm  hera panchami katha bhagvan jagannath aur mata laxmi k

Hera Panchami:  हेरा पंचमी की पौराणिक कथा और इसका आध्यात्मिक संदेश

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

 Hera Panchami: हेरा पंचमी, भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा के दौरान मनाया जाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण उत्सव है। यह पर्व आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है, अर्थात रथयात्रा शुरू होने के पाँचवें दिन।

Hera Panchami

 Hera Panchami: हेरा पंचमी, भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा के दौरान मनाया जाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण उत्सव है। यह पर्व आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है, अर्थात रथयात्रा शुरू होने के पाँचवें दिन। इस दिन माता लक्ष्मी, भगवान जगन्नाथ से मिलने के लिए श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक जाती हैं। यह उत्सव केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि भगवान और माता लक्ष्मी के मधुर दांपत्य प्रेम, मान-मनुहार और लीला का अद्भुत प्रतीक भी माना जाता है।

हेरा पंचमी की कथा

जब भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर की यात्रा पर निकलते हैं, तब वे अपनी पत्नी माता लक्ष्मी को श्रीमंदिर में ही छोड़ जाते हैं। भगवान लगभग नौ दिनों तक गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहते हैं।कुछ दिन बीतने पर माता लक्ष्मी को यह चिंता होने लगती है कि भगवान अभी तक वापस क्यों नहीं लौटे। आषाढ़ शुक्ल पंचमी के दिन वे अपने सेवकों और दासियों के साथ भव्य पालकी में सवार होकर भगवान जगन्नाथ से मिलने गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करती हैं। इस यात्रा को ही "हेरा पंचमी" कहा जाता है। ओड़िया भाषा में "हेरा" का अर्थ होता है  दर्शन करना या देखने जाना।माता लक्ष्मी जब गुंडिचा मंदिर के निकट पहुँचती हैं, तो भगवान जगन्नाथ के सेवक उनका आदरपूर्वक स्वागत करते हैं। भगवान जगन्नाथ माता लक्ष्मी को सम्मानपूर्वक भेंट और उपहार अर्पित करते हैं तथा उन्हें विश्वास दिलाते हैं कि वे शीघ्र ही श्रीमंदिर लौट आएँगे।

लेकिन माता लक्ष्मी भगवान से थोड़ी नाराज़ भी होती हैं, क्योंकि वे बिना उन्हें साथ लिए ही यात्रा पर चले गए थे। इस मान और रोष को व्यक्त करने के लिए एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। मान्यता है कि माता लक्ष्मी के सेवक भगवान जगन्नाथ के रथ के एक छोटे हिस्से को प्रतीकात्मक रूप से क्षतिग्रस्त कर देते हैं। यह इस बात का संकेत है कि माता लक्ष्मी अपने पति के बिना बताए चले जाने से अप्रसन्न हैं।इसके बाद माता लक्ष्मी भगवान के दर्शन कर, उनका संदेश प्राप्त करके श्रीमंदिर लौट आती हैं। लौटते समय वे मुख्य मार्ग से न जाकर एक विशेष मार्ग से वापस जाती हैं, जिसे परंपरा में अत्यंत शुभ माना जाता है।

इस कथा का आध्यात्मिक संदेश

सबसे पहला संदेश यह है कि परिवार में प्रेम के साथ संवाद भी आवश्यक है। भगवान स्वयं जगत के पालनकर्ता हैं, फिर भी उनकी इस लीला के माध्यम से यह बताया गया है कि परिवार में किसी भी निर्णय से पहले अपने प्रियजनों का सम्मान और उनकी भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए।

दूसरा संदेश यह है कि पति-पत्नी के बीच मान-मनुहार भी प्रेम का एक सुंदर रूप है। माता लक्ष्मी का नाराज़ होना और भगवान जगन्नाथ का उन्हें मनाना यह दर्शाता है कि सच्चे रिश्तों में रूठना और मनाना स्वाभाविक है, लेकिन अंत में प्रेम और विश्वास ही सबसे बड़ा होता है।

तीसरा संदेश यह है कि भगवान की प्रत्येक लीला भक्तों को धर्म, प्रेम, धैर्य और मर्यादा का पाठ पढ़ाने के लिए होती है। हेरा पंचमी की परंपरा भी इसी दिव्य भावना का प्रतीक है।

 हेरा पंचमी का धार्मिक महत्व

पुरी में हेरा पंचमी का उत्सव अत्यंत भव्य रूप से मनाया जाता है। हजारों श्रद्धालु इस दिन माता लक्ष्मी की शोभायात्रा के दर्शन करते हैं। श्रीमंदिर से निकलकर माता लक्ष्मी की पालकी गुंडिचा मंदिर तक जाती है, जहाँ विशेष पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रों के साथ भगवान जगन्नाथ का पूजन किया जाता है।

यह उत्सव यह भी दर्शाता है कि भगवान जगन्नाथ और माता लक्ष्मी का संबंध केवल पति-पत्नी का नहीं, बल्कि शक्ति और पुरुष के दिव्य मिलन का प्रतीक है। जहाँ भगवान जगन्नाथ करुणा और धर्म के स्वरूप हैं, वहीं माता लक्ष्मी समृद्धि, ऐश्वर्य और मंगल की अधिष्ठात्री हैं।

यह भी पढ़ें 

Lord Jagannath: आखिर किस भक्त की पीड़ा भोगते हैं भगवान जगन्नाथ? पौराणिक कथा से जानें अनासर काल का रहस्य

Jagannath Rath Yatra: क्या है जगन्नाथ रथयात्रा के नियम? जानें भगवान जगन्नाथ के रथ को कौन खींच सकता है

Bhagvan Jagannath: जानिए क्या हुआ जब भगवान जगन्नाथ को लेना पडा गणेश जी का स्वरूप


(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel