Vaishnav Yogini Ekadashi Kab Hai: उत्तर भारतीय पञ्चाङ्ग के अनुसार योगिनी एकादशी आषाढ़ माह में कृष्ण पक्ष के दौरान पड़ती है। इस एकादशी पर व्रत रखने व भगवान विष्णु की उपासना करने से अट्ठासी हज़ार ब्राह्मणों को भोजन कराने सामान फल प्राप्त होता है।
Vaishnav Yogini Ekadashi Kab Hai: उत्तर भारतीय पञ्चाङ्ग के अनुसार योगिनी एकादशी आषाढ़ माह में कृष्ण पक्ष के दौरान पड़ती है। इस एकादशी पर व्रत रखने व भगवान विष्णु की उपासना करने से अट्ठासी हज़ार ब्राह्मणों को भोजन कराने सामान फल प्राप्त होता है। अन्य एकादशियों की तरह ये एकादशी भी भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन व्रत रखने वाले जातक को धन-समृद्धि के साथ-साथ जीवन के उपरांत मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। वहीं इस इस साल योगिनी एकादशी 2 दिन मनाई जाएगी। पहले दिन गृहस्थ जातक, और दूसरे दिन वैष्णव जातक उपासना करेंगे, जिसे वैष्णव परिवर्तिनी एकादशी कहा जायेगा।
वैष्णव योगिनी एकादशी कब है ?
वैष्णव योगिनी एकादशी 2026 में 11 जुलाई 2026 शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है और व्रत रखने से सभी पापों से मुक्ति व उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है
वैष्णव योगिनी एकादशी के दिन किसकी पूजा करें?
वैष्णव योगिनी एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप, विशेषकर शयन मुद्रा में पूजन का विधान है। श्रद्धालु तुलसी पत्र, पंचामृत, फल, दीप और धूप आदि से भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। साथ ही, व्रती दिनभर उपवास रखकर भजन, कीर्तन और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं।
वैष्णव योगिनी एकादशी कौन लोग मनाते हैं?
वैष्णव योगिनी एकादशी मुख्यतः वैष्णव संप्रदाय, हिंदू धर्म के अनुयायी, विशेषकर वे लोग जो एकादशी व्रत नियमित रूप से रखते हैं, उनके द्वारा मनाई जाती है। यह व्रत गृहस्थ, ब्रह्मचारी, और साधक सभी के लिए उपयुक्त है। जो व्यक्ति मोक्ष, शुद्धि और पुण्य की प्राप्ति की कामना करता है, वह इस व्रत को श्रद्धा से करता है।
वैष्णव योगिनी एकादशी की पूजा कैसे करें?
योगिनी एकादशी का व्रत और पूजन ब्रह्मा, विष्णु समेत तीनों लोकों की पूजा के समान है।
योगिनी एकादशी का व्रत रखने वाले जातक को एक दिन पहले, यानि दशमी तिथि पर सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए और रात्रि में भगवान विष्णु का स्मरण करके ही सोना चाहिए।
व्रत वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान-ध्यान के बाद व्रत का संकल्प करें।
इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं।
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी, ऋतु फल और तिल का प्रयोग अवश्य करें।
योगिनी एकादशी पर दिन भर अन्न-जल का सेवन न करें, शाम को पूजा के बाद फलाहार कर सकते हैं।
व्रत वाले दिन किसी की बुराई करने या झूठ बोलने से बचें।
योगिनी एकादशी के दिन तांबा, चावल और दही का दान अवश्य करना चाहिए।
एकादशी के अगले दिन किसी निर्धन व ब्राह्मण को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दें, और बताए गये पारण समय में अपना व्रत खोलें।
वैष्णव व स्मार्त में क्या अंतर है?
जिस व्यक्ति ने किसी वैष्णव संप्रदाय के गुरु या धर्माचार्य से दीक्षा लेकर कंठी-तुलसी माला, तिलक आदि धारण करते हुए तप्त मुद्रा से शंख-चक्र अंकित करवाए हों, वे सभी 'वैष्णव' के अंतर्गत आते हैं।वहीं ऐसे व्यक्ति, जो वेद-पुराणों पढ़ने वाले हैं, आस्तिक हैं, पंच देवों यानि गणेश, विष्णु, शिव, सूर्य व दुर्गा के उपासक व गृहस्थ हैं, 'स्मार्त' कहे जाते हैं।
वैष्णव योगिनी एकादशी पूजा के लाभ
इस व्रत को करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
योगिनी एकादशी व्रत करने से पूर्व जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है।
शास्त्रों में उल्लेख है कि इस व्रत का पुण्य हजारों गौदान के बराबर होता है।
यह व्रत शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।
जिन लोगों पर रोग, क्लेश या मानसिक तनाव हो, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी होता है।
इस व्रत से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता आती है।
हमारी कामना है कि आपको वैष्णव निर्जला एकादशी व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त हो, और भगवान विष्णु आपको सुखी-समृद्ध जीवन का वरदान दें। यह भी पढ़ें
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)