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Hanuman Ji Story: भगवान हनुमान जी को क्यों कहा जाता है बाला जी, जानिए

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Hanuman Ji Story: भारत के अलग-अलग हिस्सों में भगवान हनुमान की पूजा कई नामों से की जाती है। उन्हें संकटमोचन, बजरंगबली और मारुति नंदन जैसे नामों से जाना जाता है।

Hanuman Ji Story
Hanuman Ji Story: भारत के अलग-अलग हिस्सों में भगवान हनुमान की पूजा कई नामों से की जाती है। उन्हें संकटमोचन, बजरंगबली और मारुति नंदन जैसे नामों से जाना जाता है। उत्तर भारत, राजस्थान, मध्य प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में उन्हें बालाजी के रूप में भी पूजा जाता है। बहुत से लोग सोचते हैं कि हनुमान को बालाजी क्यों कहा जाता है। क्या इसके पीछे कोई पौराणिक कथा है, या इसका कोई खास धार्मिक महत्व है? आइए, इस नाम से जुड़ी मान्यताओं के बारे में जानें।

बालाजी नाम का क्या अर्थ है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाल शब्द का अर्थ बचपन या किशोरावस्था है, जबकि जी सम्मान दिखाने के लिए लगाया जाने वाला शब्द है। हनुमान को बालाजी कहने के पीछे यह मान्यता है कि वे अपने बाल रूप में भी अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। यह रूप ऊर्जा, साहस और अपार शक्ति का प्रतीक है। इसलिए, हनुमान के कई प्रसिद्ध मंदिरों में उनकी मूर्ति बाल या युवा रूप में स्थापित की जाती है, और भक्त उन्हें बालाजी कहकर बुलाते हैं।

सूरज को फल समझकर निगलने की कहानी

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब हनुमान बहुत छोटे थे, तो उन्होंने आसमान में उगते हुए लाल सूरज को एक पका हुआ फल समझ लिया था। उसे खाने की इच्छा से वे तेज़ी से आसमान की ओर उड़े। देवता उनके इस अद्भुत साहस को देखकर हैरान रह गए। कहा जाता है कि भगवान इंद्र ने हनुमान पर अपने वज्र से प्रहार किया, जिससे उनकी ठुड्डी पर चोट लग गई। इससे नाराज़ होकर वायु देव ने पूरी दुनिया में हवा का बहाव रोक दिया। इसके बाद, देवताओं ने मिलकर नन्हे हनुमान को कई दिव्य वरदान दिए। बचपन के इसी दौर में अपनी असाधारण शक्ति और साहस के कारण उन्हें विशेष सम्मान मिलने लगा।

एक ऋषि के श्राप के कारण अपनी शक्तियों को भूल जाना

एक और प्रचलित कथा के अनुसार, हनुमान बचपन में बहुत शरारती थे। अपनी शरारतों में वे अक्सर ऋषियों की तपस्या में बाधा डालते थे। नतीजतन, ऋषियों ने उन्हें श्राप दिया कि वे अपनी दिव्य शक्तियों को तब तक भूल जाएंगे जब तक कोई उन्हें उनकी शक्तियों की याद न दिलाए। बाद में, जब माता सीता की खोज में समुद्र पार करना ज़रूरी हो गया, तो जामवंत ने हनुमान को उनकी अपार शक्तियों की याद दिलाई। इसके बाद, हनुमान ने विशाल रूप धारण किया, लंका पहुँचे और भगवान श्री राम द्वारा उन्हें सौंपा गया कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया। यह कहानी बताती है कि हनुमान का बचपन का रूप न केवल मासूमियत का, बल्कि अपार शक्ति का भी प्रतीक था।

वे 'बालाजी' के नाम से क्यों प्रसिद्ध हुए?

धार्मिक विद्वानों के अनुसार, हनुमान को 'बालाजी' कहकर बुलाने की परंपरा उनके बचपन के रूप, उनकी दिव्य शक्ति और उनके सदा युवा रहने वाले स्वभाव से जुड़ी है। कई क्षेत्रों में स्थानीय रीति-रिवाजों के कारण यह नाम लोकप्रिय हुआ। राजस्थान में मेहंदीपुर बालाजी धाम की प्रसिद्धि के बाद यह नाम पूरे देश में खास तौर पर मशहूर हो गया। भक्तों का मानना है कि बालाजी के रूप में हनुमान उनके सभी कष्टों को दूर करते हैं, नकारात्मक शक्तियों से उनकी रक्षा करते हैं और उन्हें साहस, आत्मविश्वास व सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं।

बालाजी की पूजा का धार्मिक महत्व

ऐसी धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से बालाजी की पूजा करते हैं, उनके जीवन की बाधाएँ धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं। मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करना तथा सिंदूर, चमेली का तेल और गुड़-चने का भोग लगाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। माना जाता है कि बालाजी की कृपा से भय, शत्रुओं से उत्पन्न बाधाओं, मानसिक तनाव और नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

 

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