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Govardhan Puja: गोवर्धन पूजा पर 56 भोग लगाने का क्या है महत्व? जानें पूजन विधि और नियम

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Govardhan Puja Niyam: गोवर्धन पूजा के दिन मन में श्रद्धा और भक्ति का भाव रखना चाहिए। पूजा में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और भगवान को ताजा एवं शुद्ध भोजन ही अर्पित करें। 

Govardhan Puja Niyam
Govardhan Puja Celebration: दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा करने की परंपरा है। गोवर्धन पूजा को अन्नकूट उत्सव के नाम से भी जाना जाता है। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण को 56 प्रकार के पकवानों का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि 56 भोग अर्पित करने से भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। आइए जानते हैं गोवर्धन पूजा में 56 भोग लगाने का महत्व, इसकी पौराणिक कथा और पूजन विधि।

हिंदू धर्म में 56 भोग का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण दिन में आठ बार भोजन करते थे। एक बार जब भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र की पूजा करने के बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित किया, तब इंद्र देव क्रोधित हो गए। उन्होंने ब्रज में लगातार मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सभी ब्रजवासियों को उसके नीचे शरण दी। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने लगातार सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को उठाए रखा और इस दौरान उन्होंने भोजन नहीं किया।

जब सातवें दिन बारिश बंद हुई, तब ब्रजवासियों ने भगवान श्रीकृष्ण को भोजन कराने का निर्णय लिया। चूंकि भगवान दिन में आठ बार भोजन करते थे और उन्होंने सात दिनों तक भोजन नहीं किया था, इसलिए सात दिन के आठ पहर के हिसाब से 56 प्रकार के व्यंजन तैयार किए गए। इसी परंपरा को 56 भोग कहा जाता है। तभी से गोवर्धन पूजा पर भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाने की परंपरा प्रचलित हुई।

गोवर्धन पूजा की पूजन विधि

  • गोवर्धन पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 
  • इसके बाद घर के आंगन या पूजा स्थल पर गोबर अथवा मिट्टी से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं। इसे फूलों, पत्तियों और रंगोली से सजाएं। 
  • गोवर्धन पर्वत के पास भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। 
  • इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण को रोली, अक्षत, फूल, धूप और दीप अर्पित करें। 
  • गोवर्धन पर्वत की पूजा करें और भगवान को 56 भोग या अपनी श्रद्धा के अनुसार विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग लगाएं। 
  • पूजा के दौरान गोवर्धन पूजा की कथा सुनें और भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें। 
  • इसके बाद गोवर्धन पर्वत की सात बार परिक्रमा करने की परंपरा है।

56 भोग में किन चीजों को करें शामिल?

भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग में अलग-अलग प्रकार के पकवान अर्पित किए जाते हैं। इसमें माखन-मिश्री, दूध, दही, घी, खीर, मालपुआ, पेड़ा, लड्डू, जलेबी, रबड़ी, फल, मेवे और विभिन्न प्रकार की मिठाइयां शामिल की जाती हैं। इसके अलावा पूड़ी, कचौड़ी, सब्जियां, चावल और अन्य सात्विक व्यंजन भी भोग में रखे जाते हैं। ध्यान रखें कि भोग में प्याज, लहसुन और तामसिक खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल न करें। भगवान को शुद्ध और सात्विक भोजन अर्पित करना चाहिए।

गोवर्धन पूजा के दिन इन नियमों का रखें ध्यान

गोवर्धन पूजा के दिन मन में श्रद्धा और भक्ति का भाव रखना चाहिए। पूजा में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और भगवान को ताजा एवं शुद्ध भोजन ही अर्पित करें। गायों की सेवा और उन्हें हरा चारा खिलाना भी इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पूजा के बाद प्रसाद को परिवार और अन्य लोगों में बांटना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि गोवर्धन पूजा करने से भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह पर्व हमें प्रकृति, पर्यावरण, अन्न और गौसेवा के महत्व का संदेश भी देता है।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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