Diwali 2026: दिवाली का त्योहार मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के बिना अधूरा माना जाता है। इस दिन घरों में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ दोनों देवी-देवताओं की विधि-विधान से पूजा की जाती है। दिवाली नजदीक आते ही बाजारों में लक्ष्मी-गणेश की सुंदर मूर्तियां सजने लगती हैं। कोई मिट्टी की मूर्ति खरीदता है तो कोई पीतल, चांदी या संगमरमर की प्रतिमा घर लाता है। हालांकि, पूजा के लिए मूर्ति खरीदते समय केवल उसकी सुंदरता ही नहीं, बल्कि कुछ धार्मिक मान्यताओं का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है। क्या आपने कभी सोचा है कि दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और किस तरह की प्रतिमा शुभ मानी जाती है? आइए जानते हैं इससे जुड़ी खास बातें...
कैसी हो मां लक्ष्मी की मूर्ति?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की पूजा के लिए मां लक्ष्मी की ऐसी प्रतिमा खरीदनी चाहिए जिसमें देवी कमल के आसन पर विराजमान हों। मां लक्ष्मी के हाथों से धन और धान्य की वर्षा होती हुई दिखाई देना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसी प्रतिमा घर में सुख-समृद्धि और आर्थिक खुशहाली का प्रतीक होती है। मां लक्ष्मी की मूर्ति खरीदते समय ध्यान रखें कि उनका चेहरा प्रसन्न और शांत मुद्रा में हो। इसके अलावा, मां लक्ष्मी के दोनों हाथों में कमल का फूल होना भी शुभ माना जाता है।
गणेश जी की कैसी प्रतिमा खरीदें?
दिवाली की पूजा में मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करने का विशेष महत्व है। ऐसे में गणेश जी की मूर्ति खरीदते समय उनकी मुद्रा और स्वरूप का ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश की बैठी हुई प्रतिमा पूजा के लिए शुभ मानी जाती है। ऐसी मूर्ति घर में स्थिरता और मंगल का प्रतीक मानी जाती है। गणेश जी का चेहरा प्रसन्न होना चाहिए और उनके हाथों में मोदक या आशीर्वाद देने वाली मुद्रा हो सकती है।
मूर्ति की सूंड का रखें ध्यान
भगवान गणेश की प्रतिमा खरीदते समय उनकी सूंड की दिशा को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। सामान्य रूप से घर की पूजा के लिए दाईं ओर मुड़ी सूंड के बजाय बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी की प्रतिमा को अधिक उपयुक्त माना जाता है। मान्यता है कि बाईं सूंड वाले गणेश जी की पूजा अपेक्षाकृत सरल होती है। हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रतिमा का स्वरूप साफ-सुथरा और पूर्ण होना चाहिए।
खंडित मूर्ति न खरीदें
दिवाली की पूजा के लिए कभी भी टूटी-फूटी या खंडित मूर्ति नहीं खरीदनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में पूजा के लिए पूर्ण और सुंदर प्रतिमा को शुभ माना गया है। मूर्ति खरीदते समय उसके हाथ, पैर, आभूषण और अन्य हिस्सों को अच्छी तरह देख लेना चाहिए। प्रतिमा पर किसी तरह की टूट-फूट या दरार नहीं होनी चाहिए।
किस धातु या मिट्टी की मूर्ति खरीदें?
दिवाली पर मां लक्ष्मी और गणेश जी की मिट्टी की मूर्तियां खरीदने की परंपरा काफी पुरानी है। मिट्टी की प्रतिमाओं को प्राकृतिक और पारंपरिक पूजा का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा, लोग अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार पीतल, चांदी और संगमरमर की मूर्तियां भी खरीदते हैं। पूजा के लिए किसी खास धातु की मूर्ति खरीदना अनिवार्य नहीं है। अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रतिमा का चयन किया जा सकता है।
लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति एक साथ खरीदें
दिवाली की पूजा में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की एक साथ पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी धन और वैभव प्रदान करती हैं, जबकि भगवान गणेश विघ्नों को दूर कर शुभ कार्यों में सफलता का आशीर्वाद देते हैं। इसलिए दोनों की प्रतिमाएं साथ खरीदना और दिवाली के दिन विधि-विधान से उनकी पूजा करना शुभ माना जाता है।
मूर्ति खरीदते समय इन बातों का भी रखें ध्यान
मां लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति खरीदते समय ध्यान रखें कि प्रतिमा पर किसी तरह की गंदगी या रंगों का अनावश्यक फैलाव न हो। दोनों मूर्तियों का स्वरूप आकर्षक होने के साथ-साथ शांत और सौम्य होना चाहिए। साथ ही, ऐसी प्रतिमा चुनें जिसे घर के पूजा स्थान पर आसानी से स्थापित किया जा सके। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और स्वच्छ मन से की गई पूजा का विशेष महत्व होता है।
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)