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Diwali: दिवाली की रात शंख बजाने की परंपरा क्यों है खास? जानें धार्मिक मान्यता

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Spiritual Benefits: दिवाली की रात शंख बजाने की परंपरा हमें धर्म, आस्था और सकारात्मकता से जुड़ने का संदेश देती है। यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि जीवन में सुख-समृद्धि के साथ शांति, सद्भाव और अच्छे विचारों का होना भी जरूरी है। 
 

Diwali Shankh Tradition
Diwali Shankh Tradition: दिवाली का त्योहार हिंदू धर्म में बेहद खास और पवित्र माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। घरों को दीपों, रंगोली और फूलों से सजाया जाता है। शाम के समय शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश का पूजन करने के साथ कई घरों में शंख भी बजाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि दिवाली की रात शंख बजाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। यही वजह है कि सदियों से पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में शंख बजाने की परंपरा चली आ रही है।

हिंदू धर्म में शंख को बेहद पवित्र और मंगलकारी माना गया है। मान्यता है कि शंख की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और आसपास मौजूद नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है। दिवाली की रात जब मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है, तब शंख बजाना शुभ माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि शंख की आवाज से देवी-देवताओं का आह्वान होता है और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शंख की ध्वनि को विजय, शुभता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए मंदिरों के साथ-साथ घरों में भी पूजा के समय शंख बजाने की परंपरा है।

क्यों बजाया जाता है शंख?

दिवाली की रात को मां लक्ष्मी के आगमन का विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन भक्त माता लक्ष्मी से धन, वैभव, सुख और समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि शंख की ध्वनि मां लक्ष्मी को प्रिय है। इसलिए लक्ष्मी पूजन के दौरान शंख बजाना शुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शंख का संबंध समुद्र मंथन से भी है। समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी के साथ शंख सहित कई दिव्य रत्नों की प्राप्ति हुई थी। इसी वजह से शंख को मां लक्ष्मी से जुड़ा हुआ पवित्र प्रतीक माना जाता है।

शंख की ध्वनि से दूर होती है नकारात्मकता

धार्मिक विश्वास है कि शंख बजाने से घर का वातावरण पवित्र और सकारात्मक बनता है। इसकी गूंज को शुभता का प्रतीक माना जाता है। दिवाली की रात घर के मंदिर में पूजा के समय शंख बजाने से परिवार के सदस्यों के मन में शांति और भक्ति का भाव उत्पन्न होता है। शंख बजाने की परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे भारतीय संस्कृति में शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक भी माना गया है।

कब और कैसे बजाना चाहिए शंख?

दिवाली के दिन शाम को घर की साफ-सफाई और दीप सजाने के बाद शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान पहले भगवान का ध्यान करें और मंत्रों का जाप करें। इसके बाद शंख में स्वच्छ जल भरकर पूजा में रख सकते हैं। पूजा के अंत में आरती के समय या आरती के बाद शंख बजाना शुभ माना जाता है। शंख बजाते समय मन में श्रद्धा और सकारात्मक विचार रखने चाहिए। साथ ही ध्यान रखें कि शंख को हमेशा साफ-सुथरा रखें और पूजा के बाद उसे सम्मानपूर्वक मंदिर में स्थापित करें।

दिवाली पर शंख बजाने की परंपरा का संदेश

दिवाली की रात शंख बजाने की परंपरा हमें धर्म, आस्था और सकारात्मकता से जुड़ने का संदेश देती है। यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि जीवन में सुख-समृद्धि के साथ शांति, सद्भाव और अच्छे विचारों का होना भी जरूरी है। इसलिए इस दिवाली मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के साथ शंख की मंगल ध्वनि से अपने घर के वातावरण को भक्तिमय बनाएं।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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