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Shardiya Navratri: शारदीय नवरात्रि में क्यों पूजते हैं देवी के नौ रूप? जानें मां दुर्गा के स्वरूपों का महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Shardiya Navratri: नवरात्रि के हर दिन देवी के एक विशेष रूप को समर्पित माना गया है। मान्यता है कि मां के इन नौ स्वरूपों में शक्ति के अलग-अलग रूपों का वर्णन मिलता है।

Shardiya Navratri: 
Shardiya Navratri: शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के हर दिन देवी के एक विशेष रूप को समर्पित माना गया है। मान्यता है कि मां के इन नौ स्वरूपों में शक्ति के अलग-अलग रूपों का वर्णन मिलता है। भक्त नवरात्रि के दौरान विधि-विधान से पूजा और व्रत करके देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ ही रूपों की पूजा क्यों की जाती है और इन स्वरूपों का क्या महत्व है? आइए जानते हैं।

मां शैलपुत्री

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ है और इनके एक हाथ में त्रिशूल तथा दूसरे हाथ में कमल सुशोभित है। मां का यह स्वरूप शक्ति, स्थिरता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि की शुरुआत मां शैलपुत्री की आराधना से होती है।

मां ब्रह्मचारिणी

दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। देवी के इस स्वरूप को तप और साधना से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इनके एक हाथ में कमंडल और दूसरे हाथ में जप की माला रहती है। मां का यह रूप धैर्य, संयम और तपस्या का प्रतीक माना जाता है।

मां चंद्रघंटा

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। इनके मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार का घंटा सुशोभित रहता है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी का यह स्वरूप साहस और शक्ति से जुड़ा है। मां चंद्रघंटा की पूजा करने से भक्तों को भय और नकारात्मकता से मुक्ति मिलने की मान्यता है।

मां कूष्मांडा

चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में इन्हें सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में बताया गया है। कहा जाता है कि मां कूष्मांडा की दिव्य ऊर्जा से ब्रह्मांड की रचना हुई। देवी का यह स्वरूप तेज, ऊर्जा और सृजन शक्ति का प्रतीक माना जाता है। भक्त नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की विशेष पूजा करते हैं।

मां स्कंदमाता

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है। देवी को भगवान कार्तिकेय यानी स्कंद की माता माना जाता है। इसी कारण इनका नाम स्कंदमाता पड़ा। मां की गोद में बाल स्कंद विराजमान रहते हैं। धार्मिक मान्यता में देवी का यह स्वरूप मातृत्व, करुणा और ममता से जुड़ा माना जाता है। मां स्कंदमाता की पूजा से भक्तों को सुख-शांति और संतान संबंधी मंगल की कामना करने का अवसर मिलता है।

मां कात्यायनी

छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना की जाती है। मान्यता है कि देवी कात्यायन ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी पुत्री के रूप में प्रकट हुई थीं, इसलिए इन्हें कात्यायनी कहा गया। देवी का यह स्वरूप शक्ति और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी ने असुरों का संहार कर देवताओं को भय से मुक्ति दिलाई थी।

मां कालरात्रि

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। देवी का यह स्वरूप उग्र माना जाता है। इनका स्वरूप अंधकार और दुष्ट शक्तियों के विनाश से जुड़ा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कालरात्रि भक्तों के भय को दूर करने वाली और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करने वाली देवी हैं। इनके स्वरूप में शक्ति और साहस का विशेष महत्व बताया गया है।

मां महागौरी

आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। देवी का स्वरूप अत्यंत शांत और उज्ज्वल माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां महागौरी ने कठोर तपस्या की थी। तपस्या के कारण इनके शरीर का रंग धूल और मिट्टी से ढक गया था, लेकिन बाद में भगवान शिव ने गंगाजल से इनके स्वरूप को फिर से उज्ज्वल कर दिया। इसी कारण इन्हें महागौरी कहा गया। देवी का यह रूप शांति, पवित्रता और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है।

मां सिद्धिदात्री

नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी हैं। देवी कमल पर विराजमान मानी जाती हैं और इनके चार हाथों में शंख, चक्र, गदा और कमल सुशोभित रहते हैं। नवरात्रि में नौ दिनों की साधना मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ पूर्ण मानी जाती है।

नौ रूपों की पूजा का महत्व

नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करने के पीछे शक्ति के अलग-अलग रूपों की आराधना की मान्यता है। देवी के प्रत्येक स्वरूप का अपना अलग स्वरूप, कथा और धार्मिक महत्व बताया गया है। पहले दिन मां शैलपुत्री से शुरू होकर नौवें दिन मां सिद्धिदात्री तक नवरात्रि की पूजा शक्ति के विभिन्न रूपों की उपासना से जुड़ी मानी जाती है। यही कारण है कि नवरात्रि के दौरान हर दिन देवी के अलग स्वरूप की पूजा करने की परंपरा चली आ रही है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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