Shardiya Navratri: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के साथ अखंड ज्योति जलाने की परंपरा भी काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों तक कई घरों और मंदिरों में एक दीपक लगातार जलाया जाता है। मान्यता है कि अखंड ज्योति को देवी शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसे श्रद्धा और भक्ति के साथ जलाने से घर में सुख-शांति बनी रहती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नवरात्रि में अखंड ज्योति ही क्यों जलाई जाती है और इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता है? आइए जानते हैं।
अखंड ज्योति का क्या है अर्थ
अखंड ज्योति का अर्थ है ऐसी ज्योति जो लगातार जलती रहे और बीच में बुझने न पाए। नवरात्रि में इसे मां दुर्गा के सामने संकल्प के साथ प्रज्वलित किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक की लौ को ज्ञान, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने का उद्देश्य देवी के प्रति निरंतर भक्ति और समर्पण भाव बनाए रखना माना जाता है। भक्त ज्योति के सामने मां दुर्गा का ध्यान और पूजा करते हैं।
मां दुर्गा से जुड़ी है मान्यता
धार्मिक मान्यताओं में अग्नि को पवित्र माना गया है। देवी पूजा में भी दीपक जलाने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि दीपक की रोशनी अंधकार को दूर करती है और इसी तरह जीवन से नकारात्मकता दूर करने का प्रतीक मानी जाती है। नवरात्रि में मां दुर्गा को शक्ति का स्वरूप माना जाता है। ऐसे में उनके सामने अखंड ज्योति जलाना देवी की शक्ति और प्रकाश के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का एक तरीका माना जाता है। भक्त मानते हैं कि ज्योति की निरंतर लौ से पूजा स्थल पर सकारात्मक और आध्यात्मिक वातावरण बना रहता है।
अखंड ज्योति क्यों रखी जाती है?
नवरात्रि के नौ दिनों में अखंड ज्योति जलाने के पीछे सबसे प्रमुख मान्यता निरंतर साधना से जुड़ी है। जिस तरह नवरात्रि के दौरान भक्त नियमित रूप से मां दुर्गा की पूजा, आरती और मंत्र जाप करते हैं, उसी तरह अखंड ज्योति भी लगातार जलती रहती है। इसे भक्त के संकल्प का प्रतीक भी माना जाता है। ज्योति का लगातार जलना यह दर्शाता है कि देवी के प्रति श्रद्धा और पूजा का भाव निरंतर बना हुआ है। इसी कारण कई लोग नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ अखंड ज्योति भी प्रज्वलित करते हैं।
ज्योति की लौ से जुड़ी मान्यता
अखंड ज्योति की लौ को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं हैं। कुछ परंपराओं में ज्योति की लौ को देवी की उपस्थिति और कृपा का प्रतीक माना जाता है। वहीं, दीपक की स्थिर और उज्ज्वल लौ को घर में शांति, सुख और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, ज्योति की लौ के आकार या उसके हिलने-डुलने को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। इनका आधार धार्मिक परंपराएं हैं, इसलिए इन्हें निश्चित भविष्यवाणी के तौर पर नहीं देखा जाता।
अखंड ज्योति जलाने का धार्मिक महत्व
नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने को देवी उपासना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। दीपक की रोशनी ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक है, जबकि अंधकार को अज्ञान और नकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। इस तरह अखंड ज्योति जलाने का भाव जीवन में प्रकाश और सकारात्मकता बनाए रखने से जुड़ा है। कई भक्त नवरात्रि के दौरान सुबह-शाम ज्योति के सामने मां दुर्गा की आरती करते हैं। कुछ लोग दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या देवी मंत्रों का पाठ भी करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ की गई देवी उपासना से मन को शांति मिलती है।
अखंड ज्योति जलाते समय रखें ध्यान
अगर घर में नवरात्रि के नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाई जा रही है, तो दीपक को सुरक्षित और स्थिर स्थान पर रखना चाहिए। इसे ऐसी जगह रखना चाहिए जहां हवा का तेज झोंका न आए और दीपक के आसपास कोई ज्वलनशील वस्तु न हो। ज्योति में पर्याप्त तेल या घी रहे, इसका भी ध्यान रखना जरूरी है, ताकि दीपक लगातार जलता रहे। पूजा के दौरान दीपक को संभालते समय सावधानी बरतनी चाहिए। धार्मिक मान्यता के साथ-साथ इसकी सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)