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Jitiya Vrat: जितिया व्रत में महिलाएं गले में क्यों पहनती हैं जिउतिया? जानें क्या हैं इसका रहस्य और महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Jitiya Vrat: जिउतिया को जितिया माला या जिउतिया लॉकेट भी कहा जाता है। यह आमतौर पर लाल या पीले रंग के धागे में पिरोया जाता है। इसमें सोने या चांदी के छोटे लॉकेट अथवा गांठें होती हैं। कुछ लॉकेट पर भगवान जीमूतवाहन की आकृति भी बनी होती है।

Jitiya Vrat
Jitiya Vrat: जितिया व्रत में माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करती हैं। इस व्रत में पूजा-पाठ और निर्जला उपवास के साथ गले में जिउतिया पहनने की भी विशेष परंपरा है। कई महिलाएं लाल या पीले धागे में सोने-चांदी का लॉकेट पिरोकर इसे धारण करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि जिउतिया संतान की रक्षा और उसके मंगलमय जीवन की कामना का प्रतीक है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस धागे और लॉकेट को पहनने के पीछे क्या मान्यता है? इसका भगवान जीमूतवाहन की कथा से क्या संबंध है? आइए जानते हैं जिउतिया पहनने का रहस्य और इसका धार्मिक महत्व...

क्या होता है जिउतिया?

जिउतिया को जितिया माला या जिउतिया लॉकेट भी कहा जाता है। यह आमतौर पर लाल या पीले रंग के धागे में पिरोया जाता है। इसमें सोने या चांदी के छोटे लॉकेट अथवा गांठें होती हैं। कुछ लॉकेट पर भगवान जीमूतवाहन की आकृति भी बनी होती है। जिउतिया पहनने की परंपरा बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और मिथिलांचल सहित कई क्षेत्रों में प्रचलित है। हालांकि, इसे पहनने का तरीका और इससे जुड़ी कुछ परंपराएं परिवारों और क्षेत्रों के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।

संतान की लंबी आयु की कामना

जितिया व्रत में जिउतिया धारण करने का सबसे प्रमुख उद्देश्य संतान की लंबी उम्र और उसकी सलामती की कामना करना है। माताएं इस व्रत के दौरान भगवान जीमूतवाहन से अपने बच्चों की रक्षा और उनके सुखी जीवन की प्रार्थना करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जिउतिया को संतान के लिए मंगल और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। इसे धारण करते समय मां के मन में अपने बच्चों के प्रति प्रेम, समर्पण और उनके कल्याण की भावना जुड़ी होती है। यही वजह है कि जितिया व्रत में इस धागे और लॉकेट को विशेष महत्व दिया जाता है।

जीमूतवाहन की कथा से जुड़ा है जिउतिया

जिउतिया पहनने की परंपरा को समझने के लिए भगवान जीमूतवाहन से जुड़ी पौराणिक कथा का उल्लेख करना जरूरी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जीमूतवाहन एक दयालु और परोपकारी राजकुमार थे। उन्होंने एक नाग माता के पुत्र शंखचूड़ की जान बचाने के लिए स्वयं को पक्षीराज गरुड़ के सामने प्रस्तुत कर दिया था। कथा के अनुसार, जीमूतवाहन के इस त्याग से प्रसन्न होकर गरुड़ ने नागों को अभयदान दिया।

इस तरह जीमूतवाहन एक मां के पुत्र की रक्षा करने के साथ ही नागवंश के लिए भी रक्षक बने। उनकी इसी करुणा और त्याग के कारण जितिया व्रत में उनकी पूजा की जाती है। मान्यता है कि जिस तरह जीमूतवाहन ने एक मां की संतान के प्राण बचाए थे, उसी तरह उनकी कृपा से अपनी संतान के सुरक्षित और दीर्घायु होने की कामना की जाती है। जिउतिया धारण करना भी इसी आस्था से जुड़ा है।

गले में ही क्यों पहनती हैं महिलाएं?

जिउतिया को गले में धारण करना कई परिवारों में प्रचलित परंपरा है। महिलाएं पूजा के बाद इसे अपने गले में पहनती हैं। कुछ स्थानों पर इसे हाथ में बांधने की परंपरा भी मिलती है। गले में जिउतिया पहनने का भाव यह है कि मां अपनी संतान के मंगल और उसकी रक्षा के लिए भगवान से प्रार्थना कर रही है। यह केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि व्रत के संकल्प और धार्मिक आस्था से जुड़ा प्रतीक माना जाता है।

कितने लॉकेट या गांठें होती हैं?

जिउतिया में लॉकेट या गांठों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग परंपराएं हैं। कई परिवारों में संतान की संख्या के अनुसार लॉकेट या गांठें रखी जाती हैं। कुछ जगहों पर संतान की संख्या से एक अतिरिक्त लॉकेट या गांठ जोड़ने की परंपरा भी है। लॉकेट सोने या चांदी का हो सकता है। वहीं, कुछ महिलाएं साधारण धागे में जिउतिया धारण करती हैं। इसका धार्मिक महत्व उसकी कीमत या धातु से नहीं, बल्कि उससे जुड़ी आस्था और संतान के कल्याण की कामना से माना जाता है।

कब पहनती हैं जिउतिया?

जितिया व्रत के अवसर पर महिलाएं पूजा-अर्चना के बाद जिउतिया धारण करती हैं। कई परंपराओं में इसे व्रत के महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में शामिल किया जाता है। कुछ परिवारों में हर साल व्रत के समय नया जिउतिया धारण करने की परंपरा भी है। व्रत के दौरान महिलाएं भगवान जीमूतवाहन का स्मरण करती हैं और संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य तथा सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। इस तरह जिउतिया जितिया व्रत की धार्मिक आस्था और मां के अपनी संतान के प्रति प्रेम का प्रतीक है। इसे धारण कर महिलाएं भगवान जीमूतवाहन से अपने बच्चों के मंगलमय जीवन का आशीर्वाद मांगती हैं।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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