इस साल शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि शनिवार, 03 मई को सुबह 07:51 बजे शुरू होगी और रविवार, 04 मई को सुबह 07:18 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार 03 मई को गंगा सप्तमी मनाई जाएगी।
Ganga Saptami 2025 Mein Kab Hai: गंगा सप्तमी, जिसे गंगा जयंती के नाम से भी जाना जाता है, हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है। यह पवित्र नदी गंगा की जयंती का प्रतीक है, जिसके बारे में माना जाता है कि वह इसी दिन धरती पर अवतरित हुई थी। गंगा सप्तमी के शुभ दिन पर, भक्त गंगा नदी में डुबकी लगाते हैं और अपने पापों के लिए आशीर्वाद और क्षमा मांगते हैं। इस साल यह त्योहार पंचांग के अनुसार 03 मई को पड़ रहा है। इस साल गंगा सप्तमी के दिन दो बेहद शुभ योग पड़ रहे हैं, जो इसे और भी महत्वपूर्ण बना रहे हैं। आइए जानते हैं गंगा जयंती पर बनने वाले 2 शुभ योग और पूजा का शुभ मुहूर्त।
गंगा सप्तमी 2025 तिथि मुहूर्त
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, इस साल शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि शनिवार, 03 मई को सुबह 07:51 बजे शुरू होगी और रविवार, 04 मई को सुबह 07:18 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार 03 मई को गंगा सप्तमी मनाई जाएगी।
गंगा सप्तमी 2025 पूजा मुहूर्त
03 मई को मां गंगा की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 10:58 बजे से शुरू होकर दोपहर 01:38 बजे तक है। इस दौरान आप पवित्र नदी में स्नान, पूजा और दान कर सकते हैं।
इस साल गंगा सप्तमी पर दो शुभ योग बन रहे हैं। गंगा सप्तमी पर रवि योग सुबह 05:39 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक है, जबकि त्रिपुष्कर योग सुबह 07:51 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक है। गंगा सप्तमी पर पुनर्वसु नक्षत्र सुबह 6:37 बजे से शुरू होकर दोपहर 12:34 बजे समाप्त होगा और उसके बाद पूरे दिन पुष्य नक्षत्र रहेगा।
गंगा स्नान का महत्व
हिंदू धर्म में गंगा स्नान का अत्यधिक महत्व है। गंगा की कुछ बूंदें न केवल वातावरण को शुद्ध करती हैं बल्कि व्यक्ति के तन और मन को भी स्वच्छ करती हैं। इसके अलावा गंगा में स्नान करने से जीवन के सभी पापों से मुक्ति मिलती है। कहा जाता है कि विशेष अवसरों या त्योहारों पर गंगा में स्नान करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। खासतौर पर गंगा सप्तमी के दिन गंगा में स्नान करने से जीवन की सभी समस्याएं दूर होती हैं और जीवन में खुशहाली आती है। गंगा जयंती के दिन गंगा में स्नान करने से कई गुना अधिक शुभ फल मिलता है।
गंगा सप्तमी पर गंगा नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है। अगर ऐसा करना संभव न हो तो घर पर ही नहाते समय पानी में गंगा जल की कुछ बूंदें मिला लें। कहा जाता है कि गंगा सप्तमी पर गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। स्नान के बाद मां गंगा को जल चढ़ाएं और नदी में तिल का दान करें।
घर पर पूजा करते समय तांबे के कलश में जल भरकर उसमें गंगा जल डालें। इसके बाद आम के पत्ते से जल लेकर पूरे घर में छिड़कें। इससे घर में सकारात्मकता आती है और सुख-समृद्धि बनी रहती है।