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Sawan Shivratri: सावन शिवरात्रि पर कैसे करें भगवान शिव की पूजा, जानिए पूजा विधि, नियम और महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Shivling Abhishek: सावन शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का अत्यंत पवित्र और शुभ पर्व है। इस दिन विधि-विधान से पूजा, अभिषेक, व्रत और मंत्र जाप करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है। 
 

Sawan Shivratri
Sawan Shivratri Puja Vidhi: हिन्दू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे प्रिय और पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने में शिव भक्त व्रत, पूजा और जलाभिषेक करके भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। इन्हीं पावन दिनों में आने वाली सावन शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अविवाहित युवक-युवतियां मनचाहे जीवनसाथी की कामना से इस दिन व्रत रखते हैं, जबकि विवाहित लोग दांपत्य जीवन की सुख-शांति और परिवार की खुशहाली के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करते हैं।

हिंदू धर्म में सावन शिवरात्रि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की उपासना करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और उसे शुभ फल की प्राप्ति होती है। सावन का महीना स्वयं भगवान शिव का प्रिय माना जाता है, इसलिए इस महीने में आने वाली शिवरात्रि का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से इस दिन व्रत और पूजा करता है, उसके जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं तथा घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

सावन शिवरात्रि पूजा की तैयारी

सावन शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर या निकट स्थित शिव मंदिर में पूजा की तैयारी करें। पूजा के लिए शिवलिंग, गंगाजल, शुद्ध जल, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल, चंदन, अक्षत, मौली, धूप, दीप और मौसमी फल आदि सामग्री रखें। यदि संभव हो तो पूजा में भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र भी स्थापित करें। पूजा शुरू करने से पहले मन में भगवान शिव का स्मरण करें और अपने परिवार की सुख-समृद्धि तथा कल्याण की प्रार्थना करें।
 
शिव परिवार

सावन शिवरात्रि की पूजा विधि

  • सावन शिवरात्रि के दिन सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें ताकि पूजा में कोई बाधा न आए। 
  • इसके बाद शिवलिंग पर गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें। 
  • फिर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें। 
  • इसके बाद दोबारा स्वच्छ जल से शिवलिंग का स्नान कराएं।
  • अब शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएं और बेलपत्र अर्पित करें। ध्यान रखें कि बेलपत्र साफ और बिना कटे-फटे हों। 
  • इसके साथ ही धतूरा, भांग, सफेद पुष्प और फल भी भगवान शिव को अर्पित करें। 
  • धूप और दीप जलाकर आरती करें तथा "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। 
  • यदि समय हो तो शिव चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र या रुद्राष्टकम का पाठ भी किया जा सकता है।

पूजा के अंत में भगवान शिव और माता पार्वती से अपने परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन में सफलता की कामना करें। इसके बाद प्रसाद वितरित करें और जरूरतमंद लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार दान अवश्य दें।

सावन शिवरात्रि व्रत के नियम

सावन शिवरात्रि का व्रत श्रद्धा और संयम के साथ रखा जाता है। इस दिन सात्विक भोजन का पालन करना चाहिए और कई श्रद्धालु पूरे दिन फलाहार या निर्जल व्रत भी रखते हैं। व्रत के दौरान क्रोध, झूठ, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। मन, वचन और कर्म से पवित्र रहने का प्रयास करना चाहिए। पूरे दिन भगवान शिव का स्मरण करते हुए "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो रात्रि जागरण कर भगवान शिव के भजन, कीर्तन और मंत्रों का जाप करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है।
 
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पूजा के दौरान किन बातों का रखें ध्यान

भगवान शिव की पूजा करते समय साफ-सफाई और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। शिवलिंग पर केवल शुद्ध सामग्री ही अर्पित करें। बेलपत्र चढ़ाते समय उसकी चिकनी सतह भगवान शिव की ओर रखें। पूजा के दौरान केतकी का फूल अर्पित नहीं किया जाता। हल्दी और सिंदूर भी सामान्यतः शिवलिंग पर नहीं चढ़ाए जाते क्योंकि इन्हें सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, जबकि शिवलिंग वैराग्य और तपस्या का प्रतीक है। पूजा पूरी श्रद्धा और शांत मन से करनी चाहिए। दिखावे की बजाय सच्ची भक्ति और विश्वास को अधिक महत्व दिया जाता है।

सावन शिवरात्रि पर मंत्र जाप का महत्व

सावन शिवरात्रि के दिन भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। विशेष रूप से "ॐ नमः शिवाय" पंचाक्षरी मंत्र का जाप मन को शांति प्रदान करता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। धार्मिक मान्यता है कि इस मंत्र के नियमित जाप से मानसिक तनाव कम होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। भक्त अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार 108 बार या अधिक संख्या में इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। मंत्र जाप के दौरान मन को एकाग्र रखने का प्रयास करना चाहिए।

सच्ची श्रद्धा, पवित्र मन और पूरी आस्था 

सावन शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का अत्यंत पवित्र और शुभ पर्व है। इस दिन विधि-विधान से पूजा, अभिषेक, व्रत और मंत्र जाप करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है। सच्ची श्रद्धा, पवित्र मन और पूरी आस्था के साथ की गई पूजा जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मकता का मार्ग प्रशस्त करती है। इसलिए सावन शिवरात्रि के अवसर पर भगवान भोलेनाथ की आराधना करें और अपने साथ-साथ पूरे परिवार के सुखद एवं मंगलमय जीवन की कामना करें।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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