Mohini Ekadashi: हिंदू धर्म में साल में 24 एकादशी व्रत रखे जाते हैं। प्रत्येक माह में दो बार एकादशी व्रत रखा जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में एकादशी का व्रत रखते हैं।
Mohini Ekadashi: हिंदू धर्म में साल में 24 एकादशी व्रत रखे जाते हैं। प्रत्येक माह में दो बार एकादशी व्रत रखा जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में एकादशी का व्रत रखते हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, एकादशी के दिन पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि जो जातक भगवान विष्णु के विशेष पूजा करते हैं उन्हें शुभ फल की प्राप्ति होती है।
पंचांग के अनुसार, वैशाख माह को माघ और कार्तिक माह जितना ही पवित्र माना जाता है। ठीक उसी तरह वैशाख माह की एकादशी का भी विशेष महत्व होता है। बता दें कि इसी महीने में मोहिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। तो आइए आज इस खबर में मोहिनी एकादशी के व्रत के बारे में विस्तार से जानते हैं।
कब मनाई जाएगी मोहिनी एकादशी?
पंचांग के अनुसार, वैशाख माह में पड़ने वाली एकादशी तिथि को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। बता दें कि यह वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, यह तिथि 7 मई 2025 दिन बुधवार को सुबह 10 बजकर 19 मिनट से शुरू होगी। इसके बाद मोहिनी एकादशी की समाप्ति 8 मई को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर होगी। उदया तिथि के अनुसार, मोहिनी एकादशी का व्रत 8 मई दिन गुरुवार को रखा जाएगा।
मोहिनी एकादशी पूजा विधि
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मोहिनी एकादशी का व्रत जिस दिन है उस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। इसके बाद आप पीले रंग का वस्त्र पहनें। वस्त्र धारण करने के बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु को पीला रंग बहुत ही ज्यादा पसंद है। इसलिए इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु को पीले रंग का फूल चढ़ाएं। उसके बाद धूप, दीप और नैवेद्य आदि का भोग लगाएं। भगवान विष्णु की आरती करें। इस दिन गरीबों को भोजन कराने का भी विशेष महत्व है।
मोहिनी एकादशी का महत्व
मोहिनी एकादशी के दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु के अवतार मोहिनी रूप की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पद्म पुराण के अनुसार, त्रेता युग में महर्षि वशिष्ठ ने मार्यादा पुरुषोत्तम श्री राम को मोहिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी थी। तब भगवान राम ने यह व्रत किया था। मान्यता है कि यह व्रत को करने से सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति दिलाने वाला और सभी पापों को दूर करने वाला सर्वश्रेष्ठ व्रत है।