Vaishakh Mas 2025 Upay: वैशाख का महीना धार्मिक अनुष्ठान, व्रत आदि करने के लिए बहुत ही खास और विशेष फल देने वाला होता है।
Vaishakh Mas 2025 Upay: वैशाख का महीना धार्मिक अनुष्ठान, व्रत आदि करने के लिए बहुत ही खास और विशेष फल देने वाला होता है। इस महीने में यदि कोई भी धार्मिक अनुष्ठान शास्त्रों में बताई गई विधि के अनुसार किया जाए तो व्यक्ति को उसका पूर्ण और अक्षय फल से भी अधिक मिलता है। वैशाख का महीना जहां भगवान विष्णु को समर्पित बताया गया है, वहीं यह भगवान शिव की पूजा के लिए भी खास है।
मान्यता है कि इस महीने में यदि किसी विशेष दिन शिव के स्तोत्र आदि का पाठ किया जाए तो जीवन-मरण के बंधन टूट जाते हैं और भगवान शिव सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। वैशाख शुक्ल पक्ष के प्रदोष व्रत के दिन यदि शिव महापुराण में वर्णित विशेष स्तोत्र का विधि अनुसार पाठ किया जाए तो साधक को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
विवाह में आ रही रुकावटें होती हैं दूर
वैशाख का महीना धार्मिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस महीने में दो बार प्रदोष व्रत आता है। प्रदोष तिथि भगवान शिव को समर्पित एक विशेष दिन है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की एक साथ पूजा करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और शिव महापुराण व अन्य धार्मिक ग्रंथों में वर्णित भगवान शिव के चमत्कारी स्तोत्र 'शिव महिम्न' का पाठ करने से जन्म-मरण के सभी बंधन कट जाते हैं। शास्त्रों में शिव महिम्न स्तोत्र को बहुत महत्व दिया गया है।
व्रत कब रखा जाएगा?
वैशाख शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत 9 मई को होगा। इस दिन अगर सुबह, दोपहर और प्रदोष काल यानी शाम को शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ किया जाए तो भक्त के जन्म-मरण के सभी बंधन कट जाते हैं और मृत्यु के बाद उसे शिवलोक की प्राप्ति होती है और भय पर विजय मिलती है। शाम (प्रदोष काल) यानी सूर्यास्त से करीब 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
इस दौरान यदि भगवान शिव की पूजा, भगवान शिव का अभिषेक और इस स्तोत्र का पाठ वैशाख शुक्ल पक्ष प्रदोष व्रत के दिन 9 मई को किया जाए तो भक्त के जीवन में सुख, समृद्धि, खुशहाली और धन-संपत्ति आती है। भगवान शिव ऐसे भक्तों पर हमेशा अपनी कृपा बनाए रखते हैं। यह भी पढ़ें- Mohini Ekadashi: भगवान श्री राम ने रखा था मोहिनी एकादशी का व्रत, जानें इसका महत्व
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