Ganesh Visarjan: गणेश जी की प्रतिमा को सजाने के लिए मुकुट, हार, माला, मोती, कृत्रिम आभूषण और अन्य सजावटी सामान लगाए जाते हैं। विसर्जन से पहले इन सभी चीजों को मूर्ति से निकाल लेना चाहिए।
Ganesh Visarjan: गणेश चतुर्थी पर घर और पंडाल में विराजमान किए गए गणपति बप्पा की पूजा के बाद विधि-विधान से उनका विसर्जन किया जाता है। विसर्जन से पहले गणेश जी को अर्पित की गई कुछ चीजों को मूर्ति से अलग करने की परंपरा बताई जाती है। मान्यता है कि विसर्जन के समय बप्पा को चढ़ाई गई पूजन सामग्री को मूर्ति के साथ जल में प्रवाहित नहीं करना चाहिए। ऐसे में भक्तों के मन में अक्सर सवाल रहता है कि आखिर विसर्जन से पहले गणेश जी की मूर्ति से कौन-कौन सी चीजें हटानी चाहिए? क्या फूल, माला और वस्त्र भी निकालने जरूरी हैं? आइए जानते हैं।
मूर्ति से पहले हटाएं फूल और माला
गणेश जी की पूजा में फूल और माला का विशेष महत्व माना जाता है। लेकिन विसर्जन से पहले मूर्ति पर चढ़ाए गए पुराने या सूखे फूल और मालाओं को हटा देना चाहिए। इन्हें मूर्ति के साथ पानी में प्रवाहित करने के बजाय किसी स्वच्छ स्थान पर रखना उचित माना जाता है। अगर फूल-माला प्राकृतिक और जैविक हैं, तो उन्हें बाद में मिट्टी या पौधों के पास सम्मानपूर्वक रखा जा सकता है। पूजा सामग्री को इधर-उधर फेंकने से बचना चाहिए।
मूर्ति पर चढ़ाए वस्त्र निकालें
पूजा के दौरान गणेश जी की प्रतिमा को वस्त्र पहनाए जाते हैं। कई भक्त बप्पा को धोती, अंगवस्त्र या अन्य कपड़े अर्पित करते हैं। विसर्जन से पहले इन वस्त्रों को मूर्ति से अलग कर लेना चाहिए। इन वस्त्रों को फेंकना नहीं चाहिए। साफ और उपयोग योग्य वस्त्रों को पूजा के बाद सम्मानपूर्वक संभालकर रखा जा सकता है। कुछ परिवारों में इन्हें धार्मिक उपयोग में रखने की परंपरा भी होती है।
मुकुट और आभूषण भी करें अलग
गणेश जी की प्रतिमा को सजाने के लिए मुकुट, हार, माला, मोती, कृत्रिम आभूषण और अन्य सजावटी सामान लगाए जाते हैं। विसर्जन से पहले इन सभी चीजों को मूर्ति से निकाल लेना चाहिए। इन सामग्रियों को दोबारा पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है। खासकर धातु या अन्य टिकाऊ सामग्री को जल में प्रवाहित करने के बजाय सुरक्षित रखना चाहिए।
दूर्वा और प्रसाद का क्या करें?
गणेश जी को दूर्वा बेहद प्रिय मानी जाती है। पूजा के दौरान चढ़ाई गई दूर्वा को भी विसर्जन के समय मूर्ति के साथ जल में डालने के बजाय अलग कर देना बेहतर माना जाता है। इसे किसी पौधे या स्वच्छ स्थान पर रखा जा सकता है। इसी तरह मूर्ति के पास रखा हुआ प्रसाद, फल, मिठाई और अन्य खाद्य सामग्री भी विसर्जन से पहले अलग कर लेनी चाहिए। प्रसाद को परिवार के सदस्यों में बांटकर ग्रहण किया जा सकता है।
कलावा और अन्य पूजन सामग्री हटाएं
गणेश जी की पूजा के दौरान कई बार मूर्ति पर कलावा, मौली या अन्य पवित्र धागे बांधे जाते हैं। विसर्जन से पहले इन्हें भी मूर्ति से अलग करने की परंपरा है। इसके अलावा मूर्ति पर लगाए गए कागज, प्लास्टिक, सजावटी रिबन, चमकीली पन्नियां और अन्य गैर-प्राकृतिक सजावटी सामग्री को भी निकाल लेना चाहिए। इन चीजों को जल में प्रवाहित करना पर्यावरण के लिए भी उचित नहीं माना जाता।
मूर्ति के साथ न बहाएं ये चीजें
विसर्जन के समय गणेश जी की प्रतिमा के साथ फूल-माला, कपड़े, आभूषण, प्लास्टिक की सजावट, कागज और अन्य पूजन सामग्री को जल में प्रवाहित करने से बचना चाहिए। धार्मिक दृष्टि से पूजा सामग्री को सम्मानपूर्वक अलग करना उचित माना जाता है। वहीं, पर्यावरण की दृष्टि से भी मूर्ति के साथ ऐसी चीजों को जल में डालना सही नहीं है, इसलिए विसर्जन से पहले मूर्ति को सजाने वाली सभी अलग की जा सकने वाली वस्तुओं को निकाल लेना चाहिए।
सजावट हटाने के बाद करें विसर्जन
विसर्जन से पहले सबसे पहले गणेश जी की अंतिम पूजा करें। इसके बाद मूर्ति पर चढ़े फूल, माला, वस्त्र, आभूषण, कलावा और अन्य सजावटी सामग्री को श्रद्धा के साथ अलग करें। प्रसाद और फल को परिवार में बांटें और इसके बाद गणपति बप्पा की आरती करके विसर्जन की प्रक्रिया पूरी करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गणेश जी को विदा करते समय मन में श्रद्धा और सम्मान रखना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए विसर्जन की तैयारी में जल्दबाजी करने के बजाय पूजा की सामग्री को उचित तरीके से अलग करके बप्पा को विदा करना चाहिए।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)