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Ganesh Visarjan: गणेश विसर्जन के बाद कलश का क्या करें? जानें जल, नारियल और पूजा सामग्री से जुड़े सही नियम

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Ganesh Visarjan: गणेश विसर्जन के बाद सबसे पहले कलश का जल निकालना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस जल को घर में छिड़का जा सकता है। इसके बाद बचा हुआ जल किसी पौधे या साफ मिट्टी में अर्पित किया जा सकता है। 

Ganesh Visarjan
Ganesh Visarjan: गणेश उत्सव के दौरान भगवान गणेश की स्थापना के साथ कलश भी स्थापित किया जाता है। कलश में जल भरकर उसके ऊपर नारियल और आम के पत्ते रखे जाते हैं। पूजा पूरी होने तक कलश को पवित्र माना जाता है। लेकिन जब गणपति बप्पा का विसर्जन हो जाता है, तब कलश और उसमें रखी सामग्री को लेकर कई लोगों के मन में सवाल रहता है। क्या कलश का जल भी विसर्जित कर देना चाहिए? नारियल का क्या करना चाहिए और पूजा में इस्तेमाल हुई बाकी सामग्री को कहां रखना चाहिए? आइए जानते हैं गणेश विसर्जन के बाद कलश और पूजा सामग्री से जुड़े जरूरी नियम...

कलश के जल का क्या करें

गणेश विसर्जन के बाद सबसे पहले कलश का जल निकालना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस जल को घर में छिड़का जा सकता है। इसके बाद बचा हुआ जल किसी पौधे या साफ मिट्टी में अर्पित किया जा सकता है। पूजा का पवित्र जल नाली या गंदे स्थान पर नहीं डालना चाहिए। अगर कलश में गंगाजल या किसी तीर्थ का जल मिलाया गया है, तो उसे भी सम्मानपूर्वक घर में छिड़कने के बाद किसी पौधे या स्वच्छ स्थान पर अर्पित किया जा सकता है।

 

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नारियल का क्या करें

कलश के ऊपर रखा नारियल पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। गणेश विसर्जन के बाद इसे फेंकना नहीं चाहिए। यदि नारियल खाने योग्य है, तो इसे प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांट सकते हैं। नारियल को घर के मंदिर में कुछ समय के लिए रखने की परंपरा भी कई परिवारों में है। नारियल खराब या सड़ा हुआ हो तो उसे खाने के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में उसे किसी साफ मिट्टी या पौधे के पास श्रद्धापूर्वक रखा जा सकता है।

कलश के चावल का क्या करें

कलश में रखे अक्षत यानी चावल को भी सामान्य कचरे में नहीं फेंकना चाहिए। इन्हें घर के अनाज में मिलाया जा सकता है या पक्षियों को खिलाया जा सकता है। पूजा में इस्तेमाल हुए अक्षत को सम्मानपूर्वक उपयोग करने की परंपरा बताई जाती है। 

 

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सुपारी और सिक्के कहां रखें

यदि कलश में सुपारी, सिक्का या हल्दी की गांठ रखी गई है, तो विसर्जन के बाद इन्हें निकालकर साफ कर लें। सुपारी को परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा स्थान में रखा जा सकता है। वहीं सिक्के को साफ करके दोबारा पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है या धन रखने के स्थान पर रखा जा सकता है। अलग-अलग परिवारों में इसे लेकर अलग परंपराएं हो सकती हैं।

आम के पत्तों और दूर्वा का क्या करें

कलश में लगाए गए आम के पत्ते और पूजा में चढ़ाई गई दूर्वा सूख जाने के बाद उन्हें घर के कूड़े में डालने के बजाय किसी पौधे की मिट्टी में रखा जा सकता है। पूजा से जुड़ी ऐसी प्राकृतिक सामग्री को साफ मिट्टी में अर्पित करना उचित माना जाता है। 

 

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फूल और माला का क्या करें

गणपति पूजा में चढ़ाए गए फूल और मालाएं भी विसर्जन के बाद बच सकती हैं। इन्हें सीधे कूड़े में फेंकने के बजाय अलग करके किसी पौधे की मिट्टी में रखा जा सकता है या जहां निर्माल्य रखने की व्यवस्था हो, वहां अर्पित किया जा सकता है। पूजा सामग्री को सम्मानपूर्वक अलग करना चाहिए। 

कलश और पूजा के बर्तन का क्या करें

कलश, पूजा की थाली, दीपक और दूसरे धातु के बर्तनों को फेंकने की जरूरत नहीं होती। इन्हें साफ करके घर में सुरक्षित रख सकते हैं और आगे की पूजा में दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं। धार्मिक पूजा में इस्तेमाल होने वाली धातु की वस्तुओं को संभालकर रखने की परंपरा है। 

प्लास्टिक और सजावटी सामान पानी में न डालें

गणेश विसर्जन के दौरान पूजा सामग्री और सजावटी सामान को अलग रखना जरूरी है। प्लास्टिक, थर्मोकोल, रिबन, कृत्रिम फूल और दूसरी गैर-जैविक सजावट को जल में प्रवाहित नहीं करना चाहिए। प्रतिमा के साथ केवल वही सामग्री विसर्जित की जानी चाहिए जिसे स्थानीय व्यवस्था और परंपरा के अनुसार विसर्जित करने की अनुमति हो। 


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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