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Ganesh Visarjan: कैसे करें गणेश विसर्जन? बप्पा की विदाई से पहले जान लें ये जरूरी बातें

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Ganesh Visarjan: विसर्जन से पहले घर में भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करें। सबसे पहले पूजा स्थल की सफाई करें और गणपति बप्पा के सामने दीपक जलाएं। 

Ganesh Visarjan
Ganesh Visarjan: गणेश चतुर्थी के दौरान घर और पंडालों में गणपति बप्पा की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इसके बाद निर्धारित दिन भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन कर उन्हें विदाई दी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विसर्जन से पहले बप्पा की दोबारा पूजा, आरती और विदाई की रस्में पूरी की जाती हैं। साल 2026 में अनंत चतुर्दशी के दिन 25 सितंबर को गणेश विसर्जन किया जाएगा। हालांकि, परंपरा के अनुसार डेढ़ दिन, तीसरे, पांचवें और सातवें दिन भी गणपति विसर्जन किया जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि गणेश विसर्जन से पहले कौन-कौन सी पूजा करनी चाहिए और बप्पा को किस तरह विदाई देनी चाहिए? आइए जानते हैं गणेश विसर्जन की संपूर्ण विधि, जरूरी नियम और धार्मिक महत्व।

गणेश विसर्जन से पहले करें ये तैयारी

विसर्जन से पहले घर में भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करें। सबसे पहले पूजा स्थल की सफाई करें और गणपति बप्पा के सामने दीपक जलाएं। इसके बाद उन्हें फूल, दूर्वा, मोदक या अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित करें। पूजा के बाद गणेश जी की आरती करें और परिवार के सभी सदस्य बप्पा से सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करें। इसके बाद विसर्जन की तैयारी की जाती है।

 

Ganesh Visarjan

बप्पा की विदाई से पहले करें ये पूजा

गणेश जी की प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाने से पहले एक बार फिर उनकी पूजा की जाती है। भगवान को फूल, अक्षत, दूर्वा और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप दिखाकर आरती करें। कई स्थानों पर इस दौरान गणपति बप्पा को घर में आने और परिवार पर कृपा बनाए रखने के लिए धन्यवाद देते हुए अगले वर्ष फिर आने का आग्रह किया जाता है। पूजा के बाद गणेश जी की प्रतिमा को सम्मानपूर्वक उठाकर विसर्जन स्थल की ओर ले जाया जाता है।

गणेश जी की प्रतिमा को ऐसे ले जाएं

विसर्जन के लिए गणेश जी की प्रतिमा को साफ कपड़े या सजाए हुए आसन पर रखकर ले जाना चाहिए। इस दौरान भक्त गणपति बप्पा मोरया और मंगल मूर्ति मोरया जैसे जयकारे लगाते हैं। घर में स्थापित छोटी प्रतिमा हो तो परिवार के सदस्य मिलकर प्रतिमा को ले जा सकते हैं। विसर्जन के दौरान श्रद्धा और शांति बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

 

Ganesh Visarjan

विसर्जन से पहले करें अंतिम आरती

विसर्जन स्थल पर पहुंचने के बाद गणेश जी की अंतिम आरती करें। भगवान को फूल और दूर्वा अर्पित करें। इसके बाद हाथ जोड़कर उनसे परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें। इसके बाद गणेश जी की प्रतिमा को श्रद्धापूर्वक जल में विसर्जित किया जाता है। घर पर विसर्जन करने वाले लोग बाल्टी, टब या किसी बड़े पात्र में पानी लेकर भी प्रतिमा का विसर्जन कर सकते हैं।

गणेश विसर्जन का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता में गणेश विसर्जन भगवान गणेश की विदाई का प्रतीक है। गणेश चतुर्थी पर भगवान की प्रतिमा की स्थापना कर पूजा की जाती है और कुछ दिनों बाद विसर्जन के माध्यम से उन्हें विदाई दी जाती है। इसे गणपति के अपने धाम लौटने की धार्मिक भावना से जोड़ा जाता है। विसर्जन से यह भाव भी व्यक्त किया जाता है कि भगवान गणेश भक्तों के जीवन से विघ्न दूर करके फिर आने का आशीर्वाद दें।

 

Ganesh Visarjan

कब किया जाता है गणेश विसर्जन?

गणेश विसर्जन के लिए एक ही दिन निर्धारित नहीं है। कई परिवार डेढ़ दिन बाद विसर्जन करते हैं, जबकि कुछ लोग तीसरे, पांचवें, सातवें या अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन करते हैं। 2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को है और इसी दिन गणेश विसर्जन का प्रमुख अवसर रहेगा। पंचांग में 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी की तिथि 24 सितंबर की रात 11:18 बजे से शुरू होकर 25 सितंबर की रात 11:06 बजे तक बताई गई है।

विसर्जन के समय इन बातों का रखें ध्यान

गणेश जी की प्रतिमा को विसर्जन से पहले सम्मानपूर्वक पूजा स्थल से उठाएं। प्रतिमा के साथ रखी पूजा सामग्री को इधर-उधर न फेंकें। फूल और अन्य पूजन सामग्री को अलग करके उचित तरीके से रखें।
यदि घर में विसर्जन किया जा रहा है तो प्रतिमा को पर्याप्त पानी वाले स्वच्छ पात्र में विसर्जित करें। प्रतिमा के पूरी तरह गलने के बाद उस मिट्टी को पौधों या साफ स्थान पर रखा जा सकता है।
सार्वजनिक स्थान पर विसर्जन करते समय स्थानीय प्रशासन की ओर से बनाए गए विसर्जन स्थल और नियमों का पालन करना चाहिए। इससे धार्मिक परंपरा के साथ स्वच्छता और सुरक्षा भी बनी रहती है।
 
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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